चीन के बीजिंग में आसमानी गार्डनिंग की एक हरी-भरी क्रांति जन्म ले रही है. शहर के पॉल्यूशन को ये कम तो करती ही हैं, सुकून भी देती है. ऐसी गार्डनिंग देख कोई भी यह कह उठेगा कि पत्थरों के शहर में दिल बाग-बाग हो गया.
बीजिंग की खूबसूरती और हरियाली देख यकीन करना मुश्किल है कि ये शहर दुनिया के सबसे ज्यादा भीड़-भाड़ वाले शहरों में शुमार है. यहां 25 लाख गाड़ियों का शोर और पॉल्यूशन लोग रोज झेलते हैं. भीड़भाड़ में चलना मुश्किल है और जगह की भारी तंगी है. बावजूद इसके यहां ऐसे खूबसूरत गार्डन हैं, जिसमें हरी-भरी सब्जियां, फूल, तरह-तरह के पौधे और क्यारियों की पानी के बीच तैरती मछलियां हैं.
ये कोई ऐतिहासिक बेबीलोन गार्डन नहीं, बल्कि बीजिंग के आसमानी यानी रूफ टॉप गार्डन हैं, जिनकी अपनी अलग खूबसूरती और खासियत है.
बीजिंग की हरी-भरी क्रांति देखते ही देखते खूब लोकप्रिय हो चुकी है. शहर को निखारने और धूल, धुएं के बीच ताजी हवा के झोंके के लिए ये हरी-भरी क्रांति किसी वरदान की तरह साबित हो रही है. यही वजह है कि बीजिंग के लोगों में धीरे-धीरे इसका क्रेज बढ़ रहा है.
80 वर्ग मीटर में ही 30 तरह की फल-सब्जियां
56 साल के झांग गुईचुन ने सिर्फ 80 वर्ग मीटर की जगह में शानदार गार्डन तैयार किया है. कमाल की बात तो ये है कि 80 वर्ग मीटर के इस गार्डन में सब्जियों और फलों की कुल 30 वैरायटी हैं. यकीन करना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन यह सच है.
गुईचुन को अपने दो-मंजिला मकान की छत पर गार्डन बनाने का ख्याल 2007 में आया. पिछले 6 सालों की मेहनत गुईचुन के गार्डन में बखूबी नजर आती है. जो भी इस रूफ टॉप गार्डन में आता है, बस खो जाता है. लटकते पम्पकीन और सब्जियां सबका मन मोह लेते हैं.
इस रूफ टॉप गार्डन के मालिक झांग गुईचुन कहते हैं, 'ये मेरा हैंगिंग गार्डन है. ये मेरी एक खूबसूरत दुनिया है. मैं चाहता हूं कि मेरे गार्डन में सभी तरह की सब्जियां हों. मैं गार्डन में उगाई गई सब्जियों का इस्तेमाल खाने के लिए नहीं करता. फुर्सत के समय में मैं अपने गार्डन में काम करता हूं. परिवार, पड़ोसियों और दोस्तों के साथ मौज-मस्ती के लिए ये गार्डन परफेक्ट है.'
अपने शानदार रूफ टॉप गार्डन से गुईचुन ने बीजिंग के लोगों में ना सिर्फ अपनी अलग पहचान और इज्जत बनाई, बल्कि उसने लोगों को एक ऐसी राह दिखाई, जिससे शहर के दम घुटते वातावरण में हरियाली और ताजगी का अहसास होता है.
एक आइडिया बदल सकता है दुनिया
सही है कि एक छोटा सा आइडिया दुनिया बदल सकता है. भीड़भाड़ और शहरों में बढ़ते प्रदूषण के बीच रूफ टॉप गार्डेनिंग का आइडिया भी कुछ ऐसा ही है. इसकी तस्दीक चीन के प्रशासन ने भी की है.
बीजिंग का ये ग्रीन रिवोल्यूशन लोगों को खूब पसंद आ रहा है. यही वजह है कि शहर के रिहाइशी बिल्डिंगों के साथ साथ कमर्शियल इमारतें भी इस क्रांति का हिस्सा बनकर बीजिंग को हराभरा बनाने में जुट गई हैं.
कमर्शियल इमारतों की छतों पर फूल-पौधों से तैयार ऐसे गार्डन में आने-जाने और मौज-मस्ती के लिए ग्राहकों को भी इजाजत दी जा रही है. ऐसे आसमानी गार्डन लोगों को खूब भा रहे हैं. ऊंची-ऊंची इमारतों के बीच ऐसी हरियाली लोगों को हैरान भी करती है. सुकून का अहसास भी कराती है.
रूफ टॉप लैंडस्केपिंग एसोसिएशन के चीफ तान तिआनिंग ने कहा, 'सिर्फ चीन ही नहीं कई देशों में छतों पर बागवानी को काफी महत्व दिया जा रहा है. जिस तरह से शहरीकरण और औद्योगिकरण में इजाफा हो रहा है, उससे शहर ज्यादा प्रदूषित और गर्म हो रहे हैं. छतों पर पेड़-पौधे लगाकर शहर के वातावरण को काफी हद तक बचाया जा सकता है.
ग्रीन लैंडस्केपिंग से जुड़े लोगों का कहना है कि इस समय बीजिंग की इमारतों की छतों पर कुल मिलाकर 13 लाख वर्ग मीटर में ऐसी हरियाली फैली हुई है. सिटी प्लानर्स का इरादा ग्रीन रूफ टॉप में हर साल 10 फीसदी बढ़ोतरी का है. यही वजह है कि छतों पर बागवानी को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन खास मुहिम चला रहा है, जिसके तहत सब्सिडी के साथ साथ लोगों को हर तरह की तकनीकी जानकारी भी दी जा रही है.
तो दिल्ली और मुंबई क्यों नहीं
सवाल है कि अगर छतों पर बागवानी से बीजिंग की तस्वीर बदल सकती है तो दिल्ली और मुंबई की क्यों नहीं. छतों पर बागवानी को बढ़ावा देने के काम में लगे लोगों का कहना है कि कई देश शहरों में पॉल्यूशन को कम करने के लिए इस तकनीक को आजमा रहे हैं.
रूफ टॉप गार्डेनिंग से सिर्फ बीजिंग की ही नहीं, न्ययॉर्क की तस्वीर भी बदली है. शहर में घूमते वक्त भले ही इसके एहसास ना हो, लेकिन छतों पर ऐसी हरियाली दिखाई देती है कि दिल खुश हो जाता है. यहां छत पर रेस्टोरेंट से लेकर पार्क सबकुछ है.
न्यूयॉर्क दुनिया के उन शहरों में शुमार है, जहां रूफ टॉप गार्डन की शुरुआत सबसे पहले हुई. न्यूयॉर्क की देखा-देखी दुनिया के कई शहरों में ऐसी आसमानी बागवानी की शुरुआत हो चुकी है. सवाल ये कि ऐसी हरियाली की तरफ हिन्दुस्तान के शहर कब देखेंगे.