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जर्मनी समेत 4 यूरोपीय देशों ने भी एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन पर लगाई रोक

डेनमार्क पहला देश है जहां एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन के इस्तेमाल पर अस्थायी रुप से प्रतिबंध लगा. वहां एक शख्स की कोरोना वैक्सीन डोज लेने के 10 दिन बाद ही उसकी मौत हो गई. डेनमार्क का लक्ष्य था कि वो अपने सभी नागरिकों को 15 अगस्त तक वैक्सीन लगा देगा लेकिन अब उसके लिए चार हफ्ते तक बढ़ा दिया गया है.  

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4 और देशों ने एस्ट्राजेनेका वैक्सीन पर लगाई अस्थायी रोक (सांकेतिक) 4 और देशों ने एस्ट्राजेनेका वैक्सीन पर लगाई अस्थायी रोक (सांकेतिक)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 1.7 करोड़ लोगों में से 37 ब्लड क्लाट्स केसः एस्ट्राजेनेका
  • डेनमार्क ने सबसे पहले वैक्सीन के प्रयोग पर रोक लगाई
  • यूरोपीय संघ ने समीक्षा के लिए गुरुवार को बैठक बुलाई

जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन सोमवार को उन देशों में शामिल हो गए जिन्होंने डोज लेने वालों में से कुछ में खतरनाक ब्लड क्लॉट्स की रिपोर्ट पर एस्ट्राजेनेका के कोविड-19 वैक्सीन के उपयोग को सस्पेंड कर दिया. हालांकि कंपनी और यूरोपीय नियामकों का कहना है कि डोज पर दोष लगाने के कोई सबूत नहीं है.

एस्ट्राजेनेका यूरोपीय महाद्वीप में उन 3 वैक्सीन में शामिल है जिसका उपयोग किया जा रहा है. लेकिन कई देशों की ओर से इस पर प्रतिबंध लगा दिए जाने की वजह से यूरोपीय संघ के टीकाकरण अभियान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच पहले से ही इसकी कमी और अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. यह टीकाकरण अभियान में ब्रिटेन और अमेरिका से काफी पीछे है.

गुरुवार को समीक्षा बैठक

यूरोपीय संघ (EU) की दवा नियामक एजेंसी ने एस्ट्राजेनेका वैक्सीन पर विशेषज्ञों के निष्कर्षों की समीक्षा करने और यह तय करने के लिए गुरुवार को एक बैठक बुलाई कि क्या कार्रवाई करने की आवश्यकता है. कोरोना के फिर से बढ़ते मामलों के बीच यूरोप के अधिकांश स्कूलों और बिजनेस को कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है.

जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि एस्ट्राजेनेका शॉट्स को निलंबित करने का निर्णय देश के वैक्सीन नियामक, पॉल एहरलिच इंस्टीट्यूट की सलाह पर लिया गया था. यह फैसला वैक्सीन लेने वाले लोगों में से 7 लोगों के दिमाग में ब्लड क्लॉट्स होने के बाद लिया गया था. जेन्स स्पैन ने कहा कि आज का निर्णय पूरी तरह से एहतियाती उपाय है.

इस बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने कहा कि उनका देश इसी तरह से कम से कम मंगलवार दोपहर तक शॉट्स को निलंबित कर देगा. इटली के ड्रग रेगुलेटर ने भी वैक्सीन के इस्तेमाल पर अस्थायी प्रतिबंध की घोषणा कर डाला. स्पेन ने भी कहा कि वह अपने यहां दो हफ्ते के लिए वैक्सीन का उपयोग करना बंद कर देगा और इस दौरान विशेषज्ञ इसकी सुरक्षा की समीक्षा करेंगे.

दूसरी ओर, एस्ट्राजेनेका ने कहा कि यूरोपीय संघ के 27 देशों और ब्रिटेन में 1.7 करोड़ लोगों को दिए गए टीकाकरण में से महज 37 ब्लड क्लाट्स के मामले सामने आए हैं. दवा निर्माता कंपनी ने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि वैक्सीन से ब्लड क्लॉट्स का खतरा बढ़ जाता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूरोपीय संघ (EU) की यूरोपियन मेडिसिंस एजेंसी ने भी कहा है कि डेटा वैक्सीन का सुझाव नहीं देते हैं क्योंकि इससे ब्लड क्लॉट्स हो रहे हैं और लोगों को टीकाकरण जारी रखना चाहिए.

सबसे पहले डेनमार्क ने लगाया बैन

इससे पहले डेनमार्क ने भी पिछले दिनों ब्लड क्लॉट की शिकायत मिलने के बाद एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी थी. डेनमार्क ने कहा कि ब्लड क्लॉट बनने का एक मामला उनके यहां भी आया है. ब्लड क्लॉट के और कितने मामले कहां मिले हैं, इसकी पूरी जानकारी अभी नहीं है.

डेनमार्क पहला देश है जिसने एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन के इस्तेमाल पर अस्थायी रुप से प्रतिबंध लगा दिया. वहां पर एक शख्स के कोरोना वैक्सीन डोज लेने के 10 दिन ही उसकी मौत हो गई. डेनमार्क का लक्ष्य था कि वो अपने सभी नागरिकों को 15 अगस्त तक वैक्सीन लगा देगा लेकिन अब उसके लिए चार हफ्ते तक बढ़ा दिया गया है.  

ऑस्ट्रिया ने भी अस्थायी रूप से इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी. ऑस्ट्रिया में पिछले दिनों ब्लड क्लॉटिंग से एक व्यक्ति की मौत भी हो गई थी और इसकी जांच चल रही है. यूरोप के अन्य छह देशों में भी एस्ट्राजेनेका की कोविड वैक्सीन पर अस्थायी रोक लगा दी गई है.  

अस्थायी रुप से प्रतिबंध लगाने वाले अन्य देशों में आयरलैंड, थाइलैंड, नीदरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड, कांगो और बुल्गारिया भी शामिल हैं. जबकि ब्रिटेन और कनाडा एस्ट्राजेनेका के वैक्सीन का समर्थन कर रहे हैं.

 

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