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फ्रांसीसी मैगजीन शार्ली हेब्डो ने फिर छापा पैगंबर मोहम्मद पर विवादित कार्टून, राष्ट्रपति की दो टूक

पैगंबर पर जिसा विवादित कार्टून को लेकर फ्रांसीसी मैगजीन के दफ्तर पर 2015 में आतंकी हमले हुए थे, मैगजीन ने उन्हें फिर से प्रकाशित किया है. फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा कि वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे क्योंकि उनके देश में प्रेस को अभिव्यक्ति की आजादी है.

शार्ली हेब्डो ने फिर से छापा विवादित कार्टून शार्ली हेब्डो ने फिर से छापा विवादित कार्टून
स्टोरी हाइलाइट्स
  • फ्रांसीसी मैगजीन में फिर छपा विवादित कार्टून
  • पैगंबर के कार्टून पर 2015 में हुए थे आतंकी हमले
  • ट्रायल शुरू होने से एक दिन पहले फिर छपे कार्टून

फ्रांस की सैटायरिकल मैगजीन शार्ली एब्डो ने पैगंबर मोहम्मद के उन कार्टूनों को फिर से प्रकाशित किया है जिनकी वजह से साल 2015 में वह आतंकी हमले का निशाना बनी थी.

इन कार्टूनों को ऐसे समय में फिर से प्रकाशित किया गया है जब एक दिन बाद ही साल 2015 को शार्ली एब्डो के दफ्तर पर हमला करने वालों की मदद करने के आरोप में 14 लोगों पर मुकदमा शुरू होने वाला है. इस हमले में मैगजीन के कार्टूनिस्टों समेत 12 लोगों की मौत हो गई थी. कुछ दिन बाद पैरिस में इसी से जुड़ा एक अन्य हमला हुआ था जिसमें पांच लोगों की जान चली गई थी. इस हमले के बाद पूरे फ्रांस में जिहादी हमलों का सिलसिला शुरू हो गया था.

मैगजीन के कवर पेज पर पैगंबर मोहम्मद के वे 12 कार्टून छापे गए हैं, जिन्हें शार्ली एब्डो में प्रकाशित होने से पहले डेनमार्क के एक अखबार ने छापा था. इनमें से एक कार्टून में पैगंबर मोहम्मद को पगड़ी के बजाय बम पहने दिखाया गया है. फ्रेंच हेडलाइन में कहा गया है- "इस एक कार्टून के लिए इतना सब कुछ"

संपादकीय में कहा गया है कि साल 2015 में हुए हमले के बाद लोग पैगंबर के उन कार्टून को प्रकाशित करने की मांग करते रहे हैं. मैगजीन के संपादक ने लिखा है, "हमने हमेशा ऐसा करने से इनकार किया लेकिन इसलिए नहीं कि ये प्रतिबंधित है. कानून हमें ऐसा करने की इजाजत देता है लेकिन ऐसा करने के पीछे अच्छी वजह होनी चाहिए थी, ऐसी वजह जिसका कोई मतलब हो और जिससे लोगों के बीच एक स्वस्थ बहस शुरू हो सके. जनवरी 2015 में हुए आतंकी हमलों के ट्रायल शुरू होने से पहले हमें इन कार्टूनों को छापना जरूरी लगा."

वहीं, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने मंगलवार को कहा कि व्यंग्य पत्रिका में कार्टून फिर से प्रकाशित करने के फैसले पर वह किसी भी तरह का कॉमेंट नहीं करेंगे. मैक्रों ने कहा कि फ्रांस में हमेशा से अभिव्यक्ति की आजादी रही है. उन्होंने कहा, किसी पत्रकार या न्यूजरूम की संपादकीय पसंद को लेकर किसी तरह की प्रतिक्रिया देना राष्ट्रपति के लिए उचित नहीं है. कभी नहीं. क्योंकि हमारे यहां प्रेस की स्वतंत्रता सबसे ऊपर है. हालांकि, उन्होंने कहा कि फ्रांसीसी नागरिक एक-दूसरे के प्रति सम्मान दिखाएं और नफरत फैलाने वाले संवाद से बचें.

 

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