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ताइवान के विदेश मंत्री बोले- भारत ने उजागर किया चीन का चेहरा

ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने आजतक से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि चीन अपने आर्थिक रसूख का इस्तेमाल कर रहा है और दूसरे देशों पर दबाव डाल रहा है.

ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू (फाइल फोटो) ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • चीन अपने आर्थिक रसूख का इस्तेमाल कर रहा: ताइवान
  • हम भारत के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं: ताइवान के विदेश मंत्री
  • 'हमें बहुत खुशी है कि भारतीय हमारे साथ राष्ट्रीय दिवस मना रहे'

जंग की धमकी देने वाले चीन पर चौतरफा निशाना साधा जा रहा है. LAC पर भारत एक ओर जहां चीन पर हावी है तो वहीं अब ताइवान ने भी ड्रैगन पर हमला बोला है. ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने आजतक से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि चीन अपने आर्थिक रसूख का इस्तेमाल कर रहा है और दूसरे देशों पर दबाव डाल रहा है.

जोसेफ वू से सवाल किया गया कि आपके राष्ट्रीय दिवस पर चीन ने उन देशों को धमकी दी जो जश्न मनाने की कोशिश कर रहे थे. भारतीय मीडिया को कवर नहीं करने को कहा गया, लेकिन हम नहीं रुके. इस पर ताइवान के विदेश मंत्री ने कहा कि इन हालातों का सामना हम दशकों से कर रहे हैं. स्थिति पहले से अधिक गंभीर होती जा रही है. चीन अपने आर्थिक रसूख का इस्तेमाल कर रहा है और दूसरे देशों पर दबाव डाल रहा है. भारत ने चीन का चेहरा उजागर किया है. 

उन्होंने कहा कि हमारे लिए भारत एक बड़ा लोकतंत्र है, जो शायद पूरी दुनिया में सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां प्रेस को आजादी है. हम यह देखकर बहुत खुश हैं कि भारतीय प्रेस चीनी के दबाव में नहीं आया और हमारे साथ राष्ट्रीय दिवस मनाया. 
असलियत यह है कि ताइवान लोकतांत्रिक देश है और भारतीयों के समान मूल्य साझा करता है और हमें बहुत खुशी है कि भारतीय हमारे साथ राष्ट्रीय दिवस मना रहे हैं. 

जोसेफ वू ने कहा कि हम भारत के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं. ताइवान और भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर काम करना भी बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है. हमें कई अंतरराष्ट्रीय मंचों से बाहर रखा गया है, लेकिन ताइवान में अंतरराष्ट्रीय समाज में योगदान देने की पूरी क्षमता है. 

भारत और ताइवान दोनों चीनी आक्रमण के अंतिम छोर पर हैं. ऐसे अवैध दावों को रोकने के लिए दुनिया को एक साथ कैसे आना चाहिए? इस पर उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि यह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है. ताइवान एकमात्र देश नहीं है जो इस संबंध में समस्याओं का सामना कर रहा है. ईस्ट चाइना सी को देखें. मुझे यकीन है कि जापान को चीन से निपटने में भी काफी दिक्कतें हैं. हमने भारत-चीन सीमा पर विवाद को भी देखा है. समान विचारधारा वाले देशों को आगे बढ़कर विचार करना होगा. जापान और अमेरिका के साथ हमारे पारंपरिक, अच्छे संबंध हैं और हम भारत के साथ भी घनिष्ठ संबंध विकसित करना चाहते हैं.


 

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