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यूएस के टॉप डिप्लोमेट बोले- बड़बोले चीन ने बढ़ाई भारत और अमेरिका की चिंता

अमेरिका के पूर्व विदेश उपमंत्री निकोलस बर्न्‍स ने कहा कि जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ओवल आफिस में मुलाकात करेंगे, जो चीज उन्हें एक साथ बांधेगी वह एशिया में नए तौर पर मुखर चीन के बारे में उनकी साझी चिंता होगी.

नरेंद्र मोदी और बराक ओबामा ओवल आफिस में मुलाकात करनेवाले हैं नरेंद्र मोदी और बराक ओबामा ओवल आफिस में मुलाकात करनेवाले हैं

भारत के साथ अमेरिका के रिश्तों की हिमायत करते हुए एक पूर्व शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने कहा है कि भारत और अमेरिका दोनों ही इस कशमकश से गुजर रहे हैं कि एशिया में मुखर हो रहे चीन से कैसे रिश्ता बनाएं?

अमेरिका के पूर्व विदेश उपमंत्री निकोलस बर्न्‍स ने कहा कि जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ओवल आफिस में मुलाकात करेंगे, जो चीज उन्हें एक साथ बांधेगी वह एशिया में नए तौर पर मुखर चीन के बारे में उनकी साझी चिंता होगी.

एक ही कशमकश से गुजर रहे हैं भारत-अमेरिका
बर्न्‍स के मुताबिक दोनों देश एक ही कशमकश से गुजर रहे हैं. चीन के व्यापक अंतरराष्ट्रीय वजन और प्रभाव के मद्देनजर कारोबार, वैश्विक आर्थिक स्थिरता और जलवायु परिवर्तन पर उसके साथ रिश्ता बनाने के सिवा उनके पास कोई और रास्ता नहीं है. उन्होंने शुक्रवार को ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ में संपादकीय लिखकर कहा कि इसके साथ ही अमेरिका और भारत दोनों वियतनाम, फिलीपीन और दक्षिण चीन सागर में स्परैटली और पारासेल द्वीप समूह के दीगर दावेदारों पर चीन की दबंगई के समक्ष खड़ा होने की जरूरत समझते हैं.

एश्टन कार्टर ने जोड़े भारत से मजबूत सामरिक रिश्ते
बर्न्‍स ने कहा कि अमेरिकी रक्षामंत्री एश्टन कार्टर भारत के साथ अमेरिकी सैन्य भविष्य को ज्यादा मजबूत करने के लिए आधारशिला रखने में खास तौर पर प्रभावी रहे हैं. वह हाल की भारत यात्रा के दौरान वरिष्ठ भारतीय नेताओं के रूख में परिवर्तन से दंग रह गए जिन्होंने लंबे अरसे तक इस पर बहस की थी कि भारत के पारंपरिक गुटनिरपेक्षता के मद्देनजर उन्हें अमेरिका के साथ किस हद तक रिश्ता मजबूत करना चाहिए.

मजबूत भारत से अमेरिका का राष्ट्रीय हित
बर्न्‍स ने कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेदों के बावजूद अपने ठोस लोकतांत्रिक आधारों के चलते भारत और अमेरिका इस सदी में वैश्विक प्रभाव डालने के लिए बेहतरीन स्थिति में हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि भारत को एक वास्तविक विश्व शक्ति में रूपांतरित करने की मोदी की मुहिम ओबामा और उनके पूर्ववर्ती जॉर्ज बुश के लक्ष्य को प्रतिबिंबित करता है कि एक मजबूत अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है.

अमेरिका जारी रखेगा भारत की हिमायत
बर्न्‍स ने कहा कि वास्तव में, जैसा कई लोग उन्हें कहते हैं कि यह विदेश नीति भारत को दक्षिण एशिया के मजबूत देश से एक वास्तविक विश्व शक्ति में रूपांतरित करना चाहते हैं. यह लक्ष्य ओबामा और बुश के आकलन को प्रतिबिंबित करता है कि एक मजबूत भारत हमारे हित में है. उन्होंने कहा कि रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक नेताओं को भारत की हिमायत करना जारी रखना चाहिए.

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