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यूक्रेन और रूस युद्ध के कगार पर? जानें क्या है दशकों पुराना विवाद?

रूस और यूक्रेन के बीच तनातनी थमने का नाम नहीं ले रही है. पश्चिमी देशों और रूस के बीच फंसे यूक्रेन को नाटो का पूरा समर्थन मिल रहा है. यूक्रेन की सीमा के निकट रूस के सैन्य जमावड़े को लेकर हाल के हफ्तों में तनाव बढ़ा है वही रूस ने भी दावा किया है कि यूक्रेन ने अपनी आधी सेना यानि लगभग सवा लाख सैनिकों को यूक्रेन के रूसी समर्थक अलगाववादियों वाले पूर्वी हिस्से में लगा दिया है.  माना जा रहा है कि यूक्रेन और रूस के बीच बढ़ता तनाव शीत युद्ध के बाद यूरोप में सुरक्षा को लेकर सबसे बड़ा संकट हो सकता है. 

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यूक्रेन के राष्ट्रपति अपने देश के पूर्वी हिस्से में और व्लादिमीर पुतिन, फोटो क्रेडिट: रॉयटर्स यूक्रेन के राष्ट्रपति अपने देश के पूर्वी हिस्से में और व्लादिमीर पुतिन, फोटो क्रेडिट: रॉयटर्स
स्टोरी हाइलाइट्स
  • रूस और पश्चिमी देशों के बीच फंसा यूक्रेन
  • रूस और यूक्रेन में बन रहे जंग के आसार

रूस और यूक्रेन के बीच तनातनी थमने का नाम नहीं ले रही है. पश्चिमी देशों और रूस के बीच फंसे यूक्रेन को नाटो का पूरा समर्थन मिल रहा है. यूक्रेन की सीमा के निकट रूस के सैन्य जमावड़े को लेकर हाल के हफ्तों में तनाव बढ़ा है. वहीं, रूस ने भी दावा किया है कि यूक्रेन ने अपनी आधी सेना यानी लगभग सवा लाख सैनिकों को यूक्रेन के रूसी समर्थक अलगाववादियों वाले पूर्वी हिस्से में लगा दिया है. इस संबंध में अमेरिकी खुफिया एजेंसिया भी गंभीर चेतावनी दे रही हैं. माना जा रहा है कि यूक्रेन और रूस के बीच बढ़ता तनाव शीत युद्ध के बाद यूरोप में सुरक्षा को लेकर सबसे बड़ा संकट हो सकता है. दोनों के बीच युद्ध छिड़ने की आशंका भी जताई जा रही है.

रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने साफ तौर पर कहा है कि यूक्रेन की सेना इस क्षेत्र में अपनी सैन्यक्षमता में जबरदस्त इजाफा कर रही है. हालांकि, यूक्रेन ने इस मामले में कोई बयान नहीं दिया है. अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने भी बुधवार को दिए बयान में कहा है कि यूक्रेन को लेकर रूस एक आक्रामक कदम उठाने की तैयारी कर रहा है.

बता दें कि हाल के चुनावों में, यूक्रेन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वे यूरोप में ही अपना भविष्य देखते हैं.

रूस के लिए क्यों खास है यूक्रेन?

अतीत में सोवियत संघ का हिस्सा होने की वजह से यूक्रेन के रूस के साथ गहरे सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक संबंध हैं. यूक्रेन की राजधानी कीव को 'रूसी शहरों की मां' भी कहा जाता है. इस शहर का सांस्कृतिक प्रभाव उतना ही है जितना रूस की राजधानी मॉस्को या सेंट पीटर्सबर्ग जैसे शहर का.

सोवियत संघ के पतन के बाद यूक्रेन के अलग होने को कई रूसी राजनेता इतिहास की एक बड़ी गलती मानते है. यूक्रेन पर स्थायी पकड़ खोने और पश्चिमी देशों के यूक्रेन में दबदबे को कई रूसी राजनेता रूस की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को एक आघात के रूप में देखते हैं. रूस यूक्रेन में रहने वाले 80 लाख रूसी लोगों की रक्षा को लेकर मुखर रहा है, व्यापार की दृष्टि से भी रूस के लिए यूक्रेन महत्वपूर्ण है. रूस किसी भी कीमत पर यूक्रेन को नाटो का सदस्य बनते हुए देखना नहीं चाहता है. रूस का मानना है कि यूक्रेन अगर नाटो में शामिल होता है तो ये सुरक्षा संगठन रूस पर भी शिकंजा कसने की कोशिश करेगा.
 

क्या है रूस-यूक्रेन विवाद?

गौरतलब है कि 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद यूक्रेन को स्वतंत्रता मिली थी. यूक्रेन यूरोप का दूसरा सबसे बड़ा देश है. एक तरफ इस देश में बेहद उपजाऊ मैदानी इलाका है, वहीं दूसरी तरफ पूर्व की तरफ इस देश में कई बड़े उद्योग हैं. यूक्रेन के पश्चिमी हिस्से का यूरोपीय पड़ोसियों खासकर पोलैंड से गहरा रिश्ता है. यूक्रेन के पश्चिमी हिस्से में राष्ट्रवाद की भावना प्रबल है. हालांकि यूक्रेन में रूसी भाषा बोलने वाले अल्पसंख्यकों की संख्या भी अच्छी खासी है और ये लोग विकसित पूर्वी इलाके में ज्यादा मौजूद हैं.

साल 2014 में रूस की ओर झुकाव रखने वाले यूक्रेन के राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच के खिलाफ यूक्रेन की सरकार में विद्रोह होने लगा था. रूस ने इस मौके का फायदा उठाया और यूक्रेन में मौजूद क्रीमिया प्रायद्वीप पर कब्जा कर डाला था और यहां मौजूद विद्रोही गुटों ने पूर्वी यूक्रेन के हिस्सों पर कब्जा कर लिया. यूक्रेन में हुए आंदोलनों के चलते राष्ट्रपति विक्टर को अपना पद छोड़ना पड़ा लेकिन तब तक रूस क्रीमिया का अपने साथ विलय कर चुका था. इस घटना के बाद से ही यूक्रेन पश्चिमी यूरोप के साथ अपने रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिश में जुटा है लेकिन रूस लगातार इसके खिलाफ रहा है. यही वजह है कि यूक्रेन, रूस और पश्चिमी देशों की खींचतान के बीच फंसा हुआ है.  

नाटो ने दिया यूक्रेन को पूरा समर्थन

नाटो का सदस्य ना होने के बावजूद भी यूक्रेन के नाटो संग अच्छे रिश्ते हैं. यूक्रेन अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो सैन्य गठबंधन से हजारों रूसी सैनिकों द्वारा संभावित आक्रमण को रोकने के लिए रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने का आग्रह भी कर चुका है. यूक्रेन नाटो का सदस्य नहीं है, लेकिन नाटो ने साफ तौर पर कहा है कि वो पूर्व सोवियत गणराज्य की संप्रभुता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है. नाटो के महासचिव जेन्स स्टोल्टनबर्ग भी रूस को चेतावनी दे चुके हैं. स्टोल्टनबर्ग ने साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि रूस अगर यूक्रेन के खिलाफ किसी तरह की आक्रामकता दिखाता है अथवा सैन्य कार्रवाई करता है तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. नाटो महासचिव का कहना है कि पश्चिमी देश रूस के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध और अन्य कदम भी उठा सकते हैं. 

पुतिन भी दे चुके हैं नाटो को चेतावनी

वहीं, यूक्रेन पर आक्रमण करने की रूस की योजना को लेकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का बयान भी सामने आ चुका है. पुतिन ने साफ शब्दों में कहा है कि रूस नाटो से इस बात की गारंटी मांगेगा कि वे पूर्व की तरफ ना बढ़े. उन्होंने कहा कि रूस, अमेरिका और इसके सहयोगी देशों के साथ वार्ता में हम विशेष समझौते करने पर जोर देंगे. ये समझौता पूर्व की ओर नाटो को और अधिक बढ़ने और रूसी क्षेत्र के पास हथियार प्रणाली की तैनाती रोकने के संबंध में होगा.

इससे पहले पुतिन ने नाटो को यूक्रेन में अपने सैनिक और हथियार तैनात करने के खिलाफ सख्त चेतावनी देते हुए कहा था कि यह एक कड़ी प्रतिक्रिया को आमंत्रित करेगा. पुतिन ने ये भी कहा था कि इस तरह के समझौते में सभी देशों के हितों में ध्यान रखा जाना चाहिए.

रूस और अमेरिका के बीच राजनयिकों को लेकर तनाव बना हुआ है. अमेरिका ने कुछ समय पहले रूस के 55 राजनयिकों को अमेरिका छोड़ने के लिए कहा था जिसके बाद रूस ने भी अमेरिका के कुछ राजनयिकों को 31 जनवरी से पहले रूस छोड़ने के लिए कहा है. अमेरिका और रूस के बीच इस तनाव को भी यूक्रेन से जोड़कर देखा जा रहा है. 

 

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