लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों पर चीन के हमले ने एक बार फिर उसके डबल फेस को उजागर कर दिया है. इतना ही नहीं, चीन के डबल फेस का एक और उदाहरण भी सामने आया है. एक तरफ चीन जहां कई दिनों से भारत से सैन्य और राजनयिक स्तर की बातचीत से ताजा सीमा विवाद सुलझाने की कोशिश करता दिखाई दे रहा थी, वहीं दूसरी तरफ साथ ही साथ उसकी सेना ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र में एडवांस हथियारों के साथ अभ्यास भी कर रही थी.
चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स में इससे जुड़ी एक रिपोर्ट लिखी गई है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन ने हाल ही में एक बहुत ही ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्र में सैन्य अभ्यास किया. चीन की स्पेशल फोर्स ने एडवांस टैंक, लंबी दूरी की तोप, जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का अभ्यास किया.
अखबार की रिपोर्ट में लिखा गया है कि 15 जून की रात भारत के साथ बॉर्डर पर हिंसक झड़प होने के बाद अगले दिन 16 जून को चीन की आर्मी यानी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) तिब्बत मिलिट्री कमांड ने ये जानकारी दी. चीन की सेना ने ये अभ्यास 4700 मीटर की ऊंचाई वाले नियांकिंग तेंगुला (Nianqing Tanggula) क्षेत्र में किया है.
गलवान में यहां हुई थी भारत-चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प, देखें Exclusive तस्वीर
चीन की सेना की यह तैयारी कोई आम नहीं है. ड्रिल के नाम पर चीनी सैनिकों को सूचनाएं जमा करने से लेकर टारगेट सेट करने तक की तमाम वो बारीकियां सिखाई गई हैं, जैसे युद्ध के दौरान ट्रेनिंग दी जा रही हो. इतना ही नहीं, चीन ने इस ट्रेनिंग के दौरान अपने एडवांस हथियारों का इस्तेमाल किया है जिसमें टाइप 15 वाले हल्के वजन वाले टैंक भी शामिल थे.
ग्लोबल टाइम्स ने इस अभ्यास में शामिल बिग्रेड कमांडर जांग जियालिन के हवाले से लिखा है कि सैनिकों ने एक चुनौतीपूर्ण वातावरण में ये प्रैक्टिस की है, जो उन्हें किसी भी तरह के मिशन को अंजाम देने में काम आएगी.
गौरतलब है कि चीन ने ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्र में ये अभ्यास ऐसे वक्त में किया है जब उसका भारत के साथ सीमा विवाद चल रहा है. गलवान घाटी में बातचीत के बावजूद चीन ने अपना असली चेहरा दिखाया और भारतीय सैनिकों पर हमला किया. गलवान घाटी की ऊंचाई करीब 4300 मीटर है, यानी चीन ने इससे भी ज्यादा ऊंचाई वाले क्षेत्र में अपने जवानों की ट्रेनिंग कराई है. इससे उसकी डायलॉग से मसले का हल निकालने की कथनी और करनी में फर्क साफ तौर पर समझा जा सकता है.