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गलत पता, फर्जी ID और गायब शिकायतकर्ता ... शेख हसीना केस में बांग्लादेश की जांच एजेंसी का चौंकाने वाला खुलासा

बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ दर्ज 'हत्या की कोशिश' का मामला पूरी तरह फर्जी निकला है. जांच एजेंसी PBI ने कोर्ट को बताया कि ना तो पीड़ित का कोई अस्तित्व मिला, ना शिकायतकर्ता का पता सही निकला और ना ही घटना के सबूत. इसके बावजूद एजेंसी ने माना कि केस आगे बढ़ाने का राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा था.

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बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ हत्या की कोशिश का केस फर्जी निकला. (File Photo- PTI)
बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ हत्या की कोशिश का केस फर्जी निकला. (File Photo- PTI)

बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को फंसाने के लिए दर्ज किया गया ‘हत्या की कोशिश’ का मामला अब पूरी तरह बिखर चुका है. जांच में सामने आया कि जिस पीड़ित के नाम पर केस दर्ज हुआ, वो कभी मौजूद ही नहीं था. शिकायतकर्ता का पता और पहचान फर्जी निकली और जिस घटना का दावा किया गया, उसके होने के कोई सबूत नहीं मिले.

इस केस में शेख हसीना के साथ 112 अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें अवामी लीग के वरिष्ठ नेता और हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय और पार्टी महासचिव ओबैदुल कादर भी शामिल थे. इस केस की अगली सुनवाई 3 फरवरी को होनी है.

पीड़ित गायब, केस की बुनियाद ही झूठी निकली

यह मामला 3 सितंबर 2024 को ढाका के धानमंडी थाने में दर्ज किया गया था. शिकायतकर्ता ने खुद को एमडी शरीफ बताते हुए दावा किया कि उसके छोटे भाई शाहेद अली (27) पर 4 अगस्त 2024 को विरोध प्रदर्शन के दौरान हत्या की कोशिश की गई. लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि शाहेद अली नाम का कोई व्यक्ति उस पते पर कभी रहा ही नहीं. वह शिकायतकर्ता का भाई भी नहीं था. FIR में दर्ज नेशनल ID नंबर फर्जी निकला. उस ID से जुड़ा कोई मोबाइल नंबर भी नहीं मिला.

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ढाका स्थित जांच एजेंसी पुलिस ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन ने कोर्ट को बताया कि केस में तथ्यात्मक गलतियों की भरमार है. 

9 घायल बताए गए, कोई रिकॉर्ड नहीं

FIR में दावा किया गया था कि ढाका कॉलेज और सिटी कॉलेज के 9 छात्र भी घायल हुए. लेकिन सिर्फ नाम दिए गए. लेकिन न पता, न मेडिकल रिकॉर्ड पाया गया. कॉलेज प्रशासन भी उनकी पहचान सत्यापित नहीं कर सका. शिकायतकर्ता भी फर्जी निकला. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि शिकायतकर्ता एमडी शरीफ अपने बताए गए हजारीबाग पते पर कभी नहीं रहा. असल नाम शरीफुल इस्लाम निकला. वो लक्ष्मीपुर जिले का रहने वाला बताया गया. वहां के लोग भी उसे पहचान नहीं सके. जब जांच एजेंसी ने उससे संपर्क किया तो वो न पीड़ित को पेश कर सका, ना कोई मेडिकल दस्तावेज दे सका.

PBI का बयान- केस मूल रूप से 'अविश्वसनीय'

PBI ने कोर्ट में दाखिल अंतिम रिपोर्ट में कहा कि बताए गए समय और जगह पर कोई घटना हुई ही नहीं. मौके से मिले सबूत FIR के दावों से मेल नहीं खाते. केस मूलतः अविश्वसनीय हैं. इसके आधार पर एजेंसी ने सिफारिश की कि
शेख हसीना और बाकी 112 आरोपियों को इस केस से बरी किया जाए. 

जांच एजेंसी पर दबाव...

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सबसे अहम बात यह रही कि PBI ने माना कि इस रिपोर्ट को लेकर उस पर दबाव बनाया जा रहा था. यह दबाव ऐसे समय में सामने आया है जब 2024 के विरोध प्रदर्शनों के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी. अवामी लीग नेताओं पर बड़ी संख्या में केस दर्ज किए गए. 

कानून का राजनीतिक इस्तेमाल

अवामी लीग पहले ही आरोप लगाती रही है कि यूनुस सरकार के दौर में झूठे और मनगढ़ंत मामलों का इस्तेमाल हुआ. इन्हें पार्टी ‘Ghost Cases’ कहती है. पार्टी के मुताबिक, अक्टूबर 2025 तक सिर्फ 3 महीनों में 2,264 केस दर्ज हुए. 32,000 से ज्यादा राजनीतिक गिरफ्तारियां हुईं. 

हिरासत में मौत ने बढ़ाई चिंता

इसी तरह के मामलों की गंभीरता उस वक्त और बढ़ गई जब अवामी लीग से जुड़े मशहूर संगीतकार प्रलय चाकी पुलिस हिरासत में अस्पताल में मृत पाए गए. उनके बेटे ने दावा किया कि पिता का नाम किसी केस में नहीं था. बाद में उन्हें एक विस्फोटक मामले में फंसा दिया गया.

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