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बांग्लादेशः हिंदुओं पर हमले के विरोध में कई संगठनों का देशव्यापी प्रदर्शन, कहा- कब तक सहेंगे हिंसा

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने हिंदुओं पर हो रहे हमलों का विरोध जताया. दरअसल, बांग्लादेश के नरेल के सहपारा में भीड़ ने जुमे की नमाज के बाद घरों में आग लगा दी थी. हिंसा की वजह सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करने से भावनाएं आहत होना बताई गई थी. लिहाजा भीड़ ने लूटपाट और बलात्कार की घटनाओं को अंजाम दिया.

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बांग्लादेश में हिंसा के विरोध में हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन किया बांग्लादेश में हिंसा के विरोध में हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन किया
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 15 जुलाई को हिंसा को अंजाम दिया गया था
  • भीड़ ने जुमे की नमाज के बाद घरों में आग लगाई

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हो रहे लगातार हमले के विरोध में कई संगठनों ने प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है. बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमले, हिंदू शिक्षकों की हत्या और हिंदू महिलाओं के बलात्कार के खिलाफ हिंदू संगठनों ने देशव्यापी प्रदर्शन करते हुए चटगांव में एक मार्च निकाला. 

बांग्लादेश की एक समाचार एजेंसी के मुताबिक नरैल सहपारा में हिंदुओं पर बर्बर कट्टरपंथी हमले के विरोध में देशभर में विभिन्न हिंदू संगठनों ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया. इससे पहले, बांग्लादेश के गृहमंत्री असदुज्जमां खान ने कहा कि सरकार देश में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगी.

बांग्लादेश राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भी गृह मंत्रालय को हमलों की जांच करने और यह निर्धारित करने का निर्देश दिया कि उन्हें रोकने में क्या लापरवाही हुई. NHRC ने यह भी कहा कि एक "धर्मनिरपेक्ष देश" में हिंसा किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है.

नरेल के लोहागड़ा के सहपारा में कुछ लोगों ने 15 जुलाई को हिंदू अल्पसंख्यकों के घरों में आग लगा दी गई थी. भीड़ ने जुमे की नमाज के बाद घरों में आग लगाई. हमले के बाद कहा गया था कि एक 18 वर्षीय व्यक्ति ने फेसबुक पर उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत किया है.

स्थानीय लोगों के मुताबिक सोशल मीडिया पर गांव के 18 वर्षीय कॉलेज के छात्र आकाश साहा ने पोस्ट किया था. इसके बाद प्रदर्शनकारी जुमे की नमाज के बाद एकत्र हुए और गिरफ्तारी की मांग को लेकर छात्र के घर के सामने प्रदर्शन करने लगे. भीड़ हिंदू अल्पसंख्यकों के घरों में पहुंच गई. घरों में आग लगा दी. लूटपाट की.

हिंसा के बाद एक पीड़िता ने कहा कि नहीं पता कि हिंसा का यह खतरा हमें कब तक सताएगा. हमें न्याय कौन देगा. हमें सुरक्षा कौन देगा. हो सकता है कि हिंसा में मेरी भी जान चली जाती. भगवान ने मुझे बचा लिया, लेकिन क्या यह जीवित रहने का कोई तरीका है? मेरे पास अब केवल मेरे शरीर पर साड़ी है. वहीं पुलिस ने आकाश के पिता अशोक साहा को स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए हिरासत में लिया. 

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