पाकिस्तान अमेरिका के साथ अपने संबंधों की बेहतरी के लिए लगातार कोशिशें कर रहा है. हाल ही में ये बात सामने आई थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ पाकिस्तानी पीएम इमरान खान की कॉल के लिए पाकिस्तानी प्रशासन तमाम हथकंडे अपना रहा है क्योंकि राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद से ही बाइडेन ने इमरान से बात नहीं की है. जो बाइडेन तो पाकिस्तान को साइडलाइन कर ही रहे हैं साथ ही एंटी तालिबान विधेयक के चलते भी अमेरिकी प्रशासन पाकिस्तान को घेरने की कोशिश कर रहा है. अब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला है.
अमेरिका के इस पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार(एनएसए) का कहना है कि पाकिस्तान काफी लंबे समय से अपने 'दोनों हाथों में लड्डू रखे हुए है'. उन्होंने सांसदों को ये सलाह भी दी है कि पाकिस्तान को अब किसी भी तरह की मदद नहीं दी जानी चाहिए. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के दौरान एनएसए रहे जनरल एच आर मैकमास्टर ने अफगानिस्तान के मुद्दे पर कांग्रेस की शक्तिशाली समिति के सामने पेश हुए थे. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने अमेरिका के खिलाफ कुछ टिप्पणियां की हैं और इन बयानों के लिए इमरान खान को अमेरिका प्रशासन द्वारा जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.
'पाकिस्तान की मदद क्यों करें हम?'
उन्होंने कहा कि काबुल पर अफगानिस्तान के कब्जे के बाद उन्होंने कुछ बयान दिए थे और इसके लिए इमरान खान को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. हम आखिर क्यों पाकिस्तान की आर्थिक सहायता करें? मेरा तो ये मानना है कि उन्हें तालिबान, लश्कर-ए-तैयबा और हक्कानी नेटवर्क जैसे संगठनों की मदद के चलते अंतरराष्ट्रीय अलगाव का सामना करना चाहिए क्योंकि ये संगठन मानवता के लिए खतरा हैं. बता दें कि ट्रंप प्रशासन के दौरान ही अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली सभी सुरक्षा सहायता पर रोक लगा दी थी और बाइडेन प्रशासन ने पाकिस्तान के इस सुरक्षा सहयोग को अब तक शुरू नहीं किया है.
उन्होंने आगे कहा कि मेरा मानना है कि पाकिस्तान को किसी भी तरह की सहायता नहीं देनी चाहिए. पाकिस्तान ने लंबे समय तक काफी फायदा उठाया है. पाकिस्तान को उनके पिछले कुछ सालों के काम के तौर पर जज किया जाना चाहिए. कांग्रेसमैन स्कॉट पेरी के एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मेरे हिसाब से ये एक अच्छा आइडिया होगा अगर पाकिस्तान को नॉन-नैटो सहयोगी के तौर पर हटा दिया जाए. तालिबान को लेकर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि ये सोचना भी भ्रम है कि तालिबान के माध्यम से किसी भी धन का उपयोग मानव कल्याण में खर्च होगा. साफ तौर पर तालिबान इस पैसों को अपने आपको मजबूत बनाने में करेगा. यही कारण है कि हम एक असाधारण दुविधा का सामना कर रहे हैं और तालिबान को सशक्त किए बिना मानवीय संकट से जुड़े काम अफगानिस्तान में करना एक कड़ी चुनौती होने जा रहा है.