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पाकिस्तान को ट्रंप की दो टूक- नहीं बुलाए अपने नागरिक तो US का वीजा होगा बैन

अमेरिका की यह चेतावनी पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है. क्योंकि पाकिस्तान उन देशों में शामिल है, जिन पर अमेरिका का अवैध नागिरक संबंधी कानून लागू होता है. इस कानून के मुताबिक, अमेरिका से प्रत्यर्पित किए गए और वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी रह रहे अपने नागरिकों को जो देश वापस नहीं लेंगे उनके नागरिकों को अमेरिकी वीजा नहीं दिया जाएगा.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

अवैध नागरिकों के मसले पर सख्ती बरते वाला अमेरिका अब इस दिशा में पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखा सकता है. वीजा अवधि खत्म होने के बावजूद भी अमेरिका में रह रहे अपने नागरिकों को पाकिस्तान ने लेने से इनकार कर दिया है. जिसके बाद पाकिस्तान के इस रुख पर अमेरिका ने सख्त लफ्जों में उसे चेतावनी दे डाली है. अमेरिका ने यहां तक कह दिया है कि वह पाकिस्तानियों के वीजा पर रोक लगा सकता है और इसकी शुरुआत सबसे पहले अधिकारियों से होगी.

अमेरिका की यह चेतावनी पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है. क्योंकि पाकिस्तान उन देशों में शामिल है, जिन पर अमेरिका का अवैध नागिरक संबंधी कानून लागू होता है. इस कानून के मुताबिक, अमेरिका से प्रत्यर्पित किए गए और वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी रह रहे अपने नागरिकों को जो देश वापस नहीं लेंगे उनके नागरिकों को अमेरिकी वीजा नहीं दिया जाएगा. पाकिस्तान ने अमेरिका के इस कानून की अवहेलना करते हुए अपने नागिरकों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. जिसके बाद अमेरिका ने यह चेतावनी दी है.

अमेरिका के विदेश विभाग ने शुक्रवार को कहा कि पाकिस्तान में दूतावास संबंधित कामकाज में अभी के लिए 'कोई बदलाव नहीं' है लेकिन अमेरिका पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रोक सकता है जिसकी शुरुआत उसके वरिष्ठ अधिकारियों से हो सकती है.

यह चेतावनी इसलिए सामने आई है क्योंकि पाकिस्तान उन दस देशों की सूची में नया देश है जिन पर अमेरिकी कानून के तहत प्रतिबंध लागू किए गए है जिसके अनुसार जो देश प्रत्यर्पित किए गए और वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी रह रहे अपने नागरिकों को वापस नहीं लेंगे उन देशों के नागरिकों को अमेरिकी वीजा नहीं दिया जाएगा.

हालांकि, विदेश विभाग ने पाकिस्तान पर इन प्रतिबंधों के असर को कम करने की कोशिश की है. विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने न्यूज एजेंसी भाषा को बताया है कि पाकिस्तान में दूतावास संबंधित कामकाज में कोई बदलाव नहीं होगा. विदेश विभाग के मुताबिक, यह अमेरिका और पाकिस्तानी सरकारों के बीच चल रहा द्विपक्षीय मुद्दा है और हम इस समय बारीकियों में नहीं जा रहे हैं.

वहीं, अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी का मानना है कि इससे पाकिस्तान के लिए मुश्किलें पैदा होंगी. हक्कानी का कहना है कि इस कदम से पाकिस्तानियों के लिए मुश्किलें पैदा होंगी जो अमेरिका में यात्रा करना चाहते हैं और इससे बचा जा सकता था अगर पाकिस्तानी अधिकारियों ने प्रत्यर्पण की कानूनी अनिवार्यताओं के संबंध में अमेरिका के अनुरोधों को नजरअंदाज नहीं किया होता. उन्होंने कहा कि अमेरिका से प्रत्यर्पित किए अपने नागरिकों को स्वीकार करने से पाकिस्तान द्वारा इनकार करना कोई नई बात नहीं है.

यानी अगर पाकिस्तान अपने रुख पर कायम रहता है तो ऐसे हालात भी पैदा हो सकते हैं कि उसके नागरिकों को अमेरिका की सीमा में दाखिल होने की इजाजत ही न मिल सके. यहां तक कि पाकिस्तान के अधिकारियों को भी इस मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है.

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