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अफगानिस्तान से ग्राउंड रिपोर्ट: तालिबान के 20 साल पहले रूप से खौफ में महिलाएं

कंधार में सिर से पांव तक बुर्के में ढकी हर महिला आजकल सोते जागते बस यही सोच रही हैं कि 20 साल बाद महिलाओं को लेकर तालिबान की सोच कितनी बदली है?

कंधार में मौजूद अफगान सेना के जवान (फोटो - इंडिया टुडे) कंधार में मौजूद अफगान सेना के जवान (फोटो - इंडिया टुडे)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • तालिबान 85% फीसदी अफगानिस्तान को निगल चुका है
  • महिलाएं सोच रही हैं कि 20 साल में तालिबान की सोच कितनी बदली होगी

अफगानिस्तान (afghanistan) का कंधार तालिबान (Taliban) के निशाने पर है. तालिबान नाम का खतरा शहर के बाहर खड़ा है और शहर के अंदर रहने वाले लोग डरे हुए हैं. सबसे ज्यादा बुरा हाल कंधार की उन महिलाओं का है जिनके जेहन में 20 साल पहले तालिबान के अत्याचार की याद अब भी ताजा हैं. 

कंधार के बाजार में मौजूद दुकानदार बताते हैं कि महिलाएं इसलिए खौफजदां हैं कि 20 साल पहले उन्होंने बहुत खतरनाक शासन किया था. कंधार में सिर से पांव तक बुर्के में ढकी हर महिला आजकल सोते जागते बस यही सोच रही हैं कि 20 साल बाद महिलाओं को लेकर तालिबान की सोच कितनी बदली है?

क्या कंधार में दाखिल होते ही तालिबान महिलाओं को पहले जैसी पाबंदियों से लाद देगा?
क्या तालिबान अफगानिस्तान की महिलाओं से पढ़ने-लिखने और नौकरी करने का हक छीन लेगा ?
क्या तालिबान के राज में घर से अकेले निकलने वाली महिलाओं को फिर से पीटा जाएगा?

ऐसे डर महिलाओं को सता रहे हैं. कंधार बाजार में दुकानदार मोहम्मद रहमत ने कहा, 'पहले 5 महिलाएं एक साथ आती थीं तो उन्हें डंडों से मारा जाता था. भगाया जाता था कि तुम क्यों निकले हो. कुछ दिन पहले फेसबुक पर पढ़ा कि तालिबान ने कहा है कि औरत अकेली बाजार नहीं जाएगी. डॉक्टर के पास नहीं जाएगी. एक औरत है शौहर बाहर गया है तो बच्चा बीमार है तो वो कहां जाए. तो इन चीजों से औरतें डरी हुई हैं.'

तालिबान के बारे में नहीं बोलीं महिलाएं

तालिबान आखिर अफगान महिलाओं के साथ कैसा सलूक करेगा. ये जानने की दिलचस्पी सारी दुनिया की है. आजतक जब कंधार के बाजार पहुंचा तो वहां महिला दिखी वो पूरी तरह से बुर्के से ढकी हुई थी. महिलाओं से तालिबान के बारे में सवाल किए गए लेकिन उन्होंने जवाब देने से इनकार किया. कंधार और काबुल फिलहाल तालिबान के चंगुल से बाहर हैं. इसीलिए यहां बाजारों में महिलाओं को इस तरह से अकेले घूमने फिरने की छूट है. लेकिन फिर भी इनमें से
कोई भी तालिबान के बारे में एक शब्द भी बोलने को तैयार नहीं हुआ.

लोगों को डर- पहले 6 महीने अच्छा, फिर रंग दिखाएगा तालिबान

तालिबान को लेकर ये डर जायज भी है, क्योंकि दुनिया का सबसे खूंखार आतंकवादी संगठन 85% फीसदी
अफगानिस्तान को निगल चुका है और अब वो जल्द से जल्द बाकी हिस्से को भी कब्जाना चाहता है. हालांकि, तालिबान के प्रवक्ता मौलाना यूसुफ अहमदी ने आजतक से बातचीत में कहा था, 'किसी को डरने की जरूरत नहीं है. हमारे राज में सभी सुरक्षित रहेंगे. हम महिलाओं को भी हक देंगे. तालिबान को लेकर अफवाह फैलाई जा रही है. हमने महिलाओं पर पाबंदियों वाले कोई भी पोस्टर नहीं लगवाए हैं . हम किसी के साथ भी नाइंसाफी नहीं होने देंगे.'

पढ़ें - अफगानिस्तान के राष्ट्रपति ने तालिबान को दिया अल्टीमेटम, पाकिस्तान को भी लिया आड़े हाथों

तालिबान के मुंह से इंसाफ की बात सुनना बहुत अजीब लगता है क्योंकि महिलाओं का दमन करने वाला, जब महिलाओं के हक सुरक्षित करने का दावा करता है तो ये बात कंधार में दुकान चलाने वाले मोहम्मद रहमत के गले नहीं उतरती.

रहमत ने कहा, 'यहां बहुत सारा खौफ है. कारोबार पर भी फर्क पड़ा है. लोग प्रेशर में हैं. लोग भागकर यहां आ रहे हैं . बता रहे हैं कि पहले वाला रवैया नहीं है काफी अच्छा है. लेकिन तालिबान का राज देखने वाले कहते हैं कि वो शुरुआत में अच्छा बनने की कोशिश करेंगे . जब 6 महीने साल गुजर जाएगा तो इनका महिलाओं के साथ बुरा सलूक शुरू हो जाएगा. किसी चलते जवान को रोकना कि तुम्हारे बाल क्यों बढ़े हैं. आपकी दाढ़ी क्यों छोटी है. आपने नमाज क्यों नहीं पढ़ा है. नहीं पढ़ा है तो करवाते थे. इसलिए लोगों में खौफ है. हर रात झड़पें होती हैं.'

तालिबान के जुल्म का गवाह रह चुके लोग तालिबान की फितरत जानते हैं. उन्हें तालिबान की ये चाल अच्छे से समझ में आ रही है. इसीलिए बेहतर भविष्य के लिए कंधार में रहने वाले ये लोग जल्द से जल्द अपना मुल्क छोड़ देना चाहते हैं .

20 साल पहले तालिबान के शासन में महिलाओं पर जुल्म करने के ढेरों वीडियो सामने आए. जिसमें महिलाओं को खुलेआम गोली से उड़ा दिया गया. यही खौफ अब दोबारा अफगानिस्तान के सामने लौट आया है क्योंकि पिछले 20 सालों में अफगानिस्तान में महिलाओं ने काफी तरक्की हासिल की है. लेकिन अब उसके पलट जाने का
खतरा मंडरा रहा है क्योंकि तालिबान के आने का मतलब सिर्फ बर्बादी है.

चिंता के समंदर में डूबी अफगान की महिलाएं

9/11 के बाद अमेरिका तालिबान को कुचलने के लिए अफगानिस्तान आया और उसने तालिबान को सत्ता से बेदखल कर दिया. इसके बाद अफगानिस्तान में महिलाओं की हालत में सुधार आया. लेकिन अमेरिकी सेना ने तालिबान से महिलाओं की सुरक्षा का आश्वासन लिए बगैर लौटने का फैसला कर लिया. जिसने एक बार फिर अफगानिस्तान की महिलाओं को चिंता के समंदर में फेंक दिया है.

तालिबान कह रहा है कि वो महिलाओं को हक देगा. ये बात सुनकर ही हंसी आती है. तालिबान अपने आका पाकिस्तान के नक्शे कदम पर चल रहा है. तभी तो दानिश सिद्दीकी हों या फिर अफगानिस्तान में भारतीय निवेश को नुकसान पहुंचाने का मामला, तालिबान एक के बाद एक सफेद झूठ बोलने में लगा है.

कंधार हवाई अड्डा, जहां हुआ था सबसे बड़ा हाइजैक

अफगानिस्तान के कंधार का जिक्र आते ही उस विमान अपहरण कांड (साल 1999) की तस्वीरें हर भारतीय
की आंखों में तैरने लगती है. कंधार में ही पूरे 8 दिनों तक तालिबान ने ऐसा ड्रामा रचा कि भारत को 155 बंधकों के बदले मौलाना मसूद अजहर समेत तीन आतंकवादियों को रिहा करना पड़ा. 20 साल बाद तालिबान एक बार फिर झूठ बोलकर भारत को धोखा देने की कोशिश कर रहा है. उसका पहला झूठ भारतीय फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी की मौत को लेकर है.

दानिश सिद्दीकी अफगानिस्तान की पाकिस्तान से लगने वाली सीमा पर स्पिन बोल्डक नाम की जगह पर 16 जुलाई को मारे गए. बताया गया कि दानिश अफगान सेना और तालिबान के बीच हुई मुठभेड़ में फंस गए और गोली लगने से उनकी मौत हो गई. लेकिन कंधार में जब आजतक ने इस मामले की पड़ताल की तो अफगान सेना के कमांडर ने दानिश सिद्दीकी से तालिबान की क्रूरता के बारे में बताया.

एक तरफ तालिबान खुद के बदलने का प्रचार कर रहा है. भारत के खिलाफ रवैए से भी वो इनकार करता है लेकिन असलियत ये है कि वो रत्तीभर भी नहीं बदला है. तालिबान की बेशर्मी देखिए कह रहा है कि दानिश को हमसे पूछ कर आना चाहिए था. ऐसी ही दलील वो भारतीय निवेश को नष्ट करने के सवाल पर देता है. पाकिस्तान के इशारे पर वो लगातार भारतीय निवेशों को नुकसान पहुंचा रहा है. लेकिन सवाल पूछने पर वो सफेद झूठ बोल देता है .

सवाल - तालिबान भारतीय निवेश को क्यों निशाना बना रहा है?
जवाब - स्कूल अस्पताल हमारी तरफ से खराब नहीं हुए हैं. अमेरिका और नाटो की जंग की वजह से ये जगह खराब हुईं. हमने भारतीय ठिकानों को निशाना नहीं बनाया. हम सिर्फ अमेरिकी ठिकानों को उड़ाएंगे बाकी किसी चीज को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे.

तालिबान की कोशिश इस बार अपनी छवि को बेहतर बनाने की है. इसीलिए उसने भी अपनी हर करतूत पर पाकिस्तान की तरह पर्दा डालना शुरू कर दिया है. जबकि वो जानता है कि भारत ने अफगानिस्तान की बेहतरी के लिए 22 हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं. लेकिन पाकिस्तान के इशारे पर उसने विकास की हर उस इमारत को ढहाने का फैसला कर लिया है, जो भारत और अफगानिस्तान की दोस्ती का प्रतीक हो.

तालिबान को बनाना हो, उसकी मदद करना हो, तालिबान की सरकार को मान्यता देना हो. हर मामले में पाकिस्तान आगे रहा है. ऐसे में तालिबान के इस झूठ पर विश्वास करना किसी के भी बस के बाहर है.

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