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अहमद मसूद को मनाने में जुटा तालिबान, समुदाय के बुजुर्गों से मिले मुख्य वार्ताकार

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद यहां हालात गंभीर हैं. देश छोड़ने की कोशिश में हजारों लोग इधर-उधर भटक रहे हैं. बीते शुक्रवार को काबुल एयरपोर्ट पर हजारों की संख्या में जमा हो गए. दरअसल, अफवाह फैली कि अमेरिका काबुल एयरपोर्ट पर लोगों को देश से बाहर निकलने में मदद कर रहा है.

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अफगानिस्तान में समुदाय के बुजुर्गों से मिल रहे तालिबान के मुख्य वार्ताकार
अफगानिस्तान में समुदाय के बुजुर्गों से मिल रहे तालिबान के मुख्य वार्ताकार
स्टोरी हाइलाइट्स
  • काबुल की सुरक्षा का जिम्मा हक्कानी नेटवर्क के हाथ
  • तालिबान की आधिकारिक वेबसाइट्स गायब 
  • तालिबान प्रशासन ने मीडिया के लिए समिति गठित की

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद यहां हालात गंभीर हैं. देश छोड़ने की कोशिश में हजारों लोग इधर-उधर भटक रहे हैं. शुक्रवार (20 अगस्त) को काबुल एयरपोर्ट पर हजारों की संख्या में लोग जमा हो गए. दरअसल, अफवाह फैली कि अमेरिका काबुल एयरपोर्ट पर लोगों को देश से बाहर निकलने में मदद कर रहा है. निकासी प्रक्रिया की अफवाह सुनकर वहां हजारों की संख्या में लोग जमा हो गए.

तालिबान के कब्जे के बाद से अफगानिस्तान में हालात बिगड़े हैं. यहां जानिए तालिबान से जुड़े बड़े अपडेट्स...

Updates:

काबुल से रोजाना 2 उड़ानें संचालित करेगा भारत
शीर्ष सरकारी सूत्रों ने आजतक/इंडिया टुडे को बताया कि अमेरिकी सुरक्षा बलों द्वारा भारत को अफगानिस्तान से अपने नागरिकों को निकालने के लिए काबुल से रोजाना दो उड़ानें संचालित करने की अनुमति दी गई है, जो वर्तमान में काबुल हवाई अड्डे और रनवे की सुविधाओं और रनवे को नियंत्रित कर रहे हैं.

अफगानिस्तान में अमेरिकियों और नाटो बलों द्वारा कुल 25 उड़ानें संचालित की जा रही हैं, जो वर्तमान में सैन्य विमानों की उड़ानों में अपने नागरिकों, हथियारों और उपकरणों को वहां से ले जाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं. जबकि भारत को अपने 300 से अधिक नागरिक और अन्य लोग हैं जिन्हें युद्धग्रस्त देश से बाहर निकालना बाकी है, जहां तालिबान ने कुछ ही हफ्तों में पूरे देश पर कब्जा कर लिया है.

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अहमद मसूद को मनाने की कोशिश

तालिबान में मुख्य वार्ताकार अब्दुल्ला अब्दुल्ला काबुल में समुदाय के बुजुर्गों के पास पहुंचे हैं और अहमद शाह के बेटे मसूद अहमद मसूद को तालिबान में लाने का प्रयास किया जा रहा है.

इस बीच तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह ने ट्वीट कर बताया कि तालिबान प्रशासन ने मीडिया के लिए समिति गठित की है, इसमें मीडिया, तालिबान और पुलिस के सदस्य होंगे. जबीहुल्लाह ने कहा कि काबुल में अधिकांश मीडिया को संतुष्ट करने के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है. समिति काबुल में मीडिया की समस्याओं का समाधान करेगी.

मदद के लिए काबुल में पहले से मौजूद हैं भारतीय अधिकारी: सूत्र
काबुल में भारतीय नागरिकों के अगवा होने की खबरों के बीच सूत्रों का कहना है कि काबुल एयरपोर्ट के बाहर फंसे भारतीय लोगों की सुरक्षित वतन वापसी के लिए वहां पहले से ही भारतीय अधिकारियों की टीम मौजूद है. दरअसल, इससे पहले खबर आई थी कि तालिबानियों ने काबुल एयरपोर्ट के पास से करीब 150 लोगों को जबरन उठा लिया है. इसमें ज्यादातर भारतीय लोग शामिल हैं. हालांकि तालिबान ने इस घटना से इनकार किया है.

काबुल पहुंचा मुल्ला बरदार
तालिबान का को- फाउंडर सरकार बनाने को लेकर चर्चा करने काबुल पहुंचा है. मुल्ला अब्दुल गनी बरदार काबुल में जिहादी नेताओं और राजनीतिज्ञों से भी मुलाकात करेगा. हाल ही में तालिबानी नेताओं ने  हामिद करजई, अब्दुल्ला अब्दुल्ला से भी मुलाकात की थी और भरोसा दिलाया था कि मौजूदा तालिबान पहले के तालिबान से ज्यादा उदार होगा.

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एयरपोर्ट पर अफरातफरी का माहौल
काबुल हवाई अड्डे पर अमेरिका और ब्रिटेन के सैनिकों को अलग करने के लिए कंटीले तार लगाए गए हैं. तार और गेट के आसपास मौजूद ये अफगानिस्तान के लोग मदद के लिए विदेशी सैनिकों से गुहार लगा रहे हैं. स्थानीय मीडिया और अमेरिकी रिपोर्टर द्वारा ट्वीट किए गए एक वीडियो में नजर आ रहा है कि तालिबान के डर से देश छोड़कर जाने की कोशिश में अफगानी लोग इन कंटीले तारों पर चढ़कर दूसरी तरफ पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं.

तालिबान की आधिकारिक वेबसाइट्स गायब
तालिबान द्वारा अफगान और दुनिया के लोगों को अपने और अपनी जीत के बारे में आधिकारिक संदेश देने वाली कई वेबसाइट शुक्रवार को अचानक गायब हो गईं. हालांकि अभी तक इसके पीछे की वजह का पता नहीं चल पाया है. इसे तालिबान की ऑनलाइन माध्यम से लोगों तक पहुंच को रोकने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है. पश्तो, उर्दू, अरबी, अंग्रेजी और डारी भाषा वाली वेबसाइटें शुक्रवार को ऑफलाइन क्यों हो गईं इसके कारण का पता नहीं चल पाया है.

काबुल की सुरक्षा का जिम्मा हक्कानी नेटवर्क के हाथ
तालिबान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल की सुरक्षा हक्कानी नेटवर्क के वरिष्ठ सदस्यों के हाथों में सौंप दी है, जिसके अल-कायदा के साथ लंबे समय से जुड़े विदेशी जिहादी समूहों के साथ घनिष्ठ संबंध हैं. पश्चिमी खुफिया अधिकारियों का कहना है कि ऐसा होना खतरनाक है. तालिबान ने 1996 से 2001 तक देश पर शासन करने वाले आंदोलन की तुलना में अधिक उदारवादी रास्ते पर चलने का वादा किया था लेकिन यह फैसला उस वादे का भी उल्लंघन नजर आता है.

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