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अफगानिस्तान संकट पर बोले रूस के विदेश मंत्री- अमेरिकी सैनिकों की वापसी से बिगड़े हालात

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद से रूस का उसके प्रति रवैया नरम पड़ा दिख रहा है. रूस की तरफ से अबतक जो बयान आए हैं उनसे ऐसा लगता है कि वह तालिबान के साथ संबंध बनाकर रखेगा.

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अफगानिस्तान पर तालिबान ने किया कब्जा (फाइल फोटो) अफगानिस्तान पर तालिबान ने किया कब्जा (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • रूस के विदेश मंत्री का अफगान संकट पर बयान
  • अमेरिका को अफगान की स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया

अफगानिस्तान में तालिबान (Taliban) के कब्जे को लेकर अब रूस ने अमेरिका को जिम्मदार ठहराया है. रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की तरफ से ऐसा कहा गया है. विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव बोले कि अफगानिस्तान से अमेरिका द्वारा अपने सैनिक वापस बुलाए जाने के बाद स्थिति बिगड़ी है. बता दें कि इससे पहले रूसी दूत ने कहा था कि काबुल की स्थिति जैसी अशरफ गनी की सरकार में थी, उससे बेहतर तालिबान के कब्जे के बाद है.

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद से रूस का उसके प्रति रवैया नरम पड़ा दिख रहा है. रूस की तरफ से अबतक जो बयान आए हैं उनसे ऐसा लगता है कि वह तालिबान के साथ संबंध बनाकर रखेगा. हालांकि, अबतक रूस में तालिबान को आतंकी संगठन ही माना जाता है.

बता दें कि इसी साल मई में अमेरिका ने अफगानिस्तान से अपने सैनिकों को वापस बुलाना शुरू किया था. इसके बाद देखते ही देखते करीब तीन महीने में तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान पर फिर कब्जा जमा लिया. अफगानिस्तान पर 1996 से 2001 तक तालिबान का शासन था और 11 सितंबर, 2001 को अमेरिका में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले के बाद अमेरिका नीत सैन्य बलों ने देश से उसका शासन समाप्त कर दिया था.

तालिबान राज को रूसी दूत ने बताया गनी सरकार से बेहतर

अफगानिस्तान में मौजूद रूसी राजदूत दिमित्री ज़िरनोव ने कहा है कि काबुल पर कब्जे के बाद से देखें तो अबतक स्थिति ठीक है. काबुल की स्थिति तालिबान के राज में अशरफ गनी की सरकार से बेहतर है. बता दें कि काबुल स्थित रूसी दूतावास का हवाला देते हुए ही रूस की सरकारी समाचार एजेंसी ‘तास’ ने खबर दी थी कि 72 वर्षीय राष्ट्रपति अशरफ गनी नकदी से भरा हेलीकॉप्टर लेकर काबुल से भागे थे.

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