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शिक्षकों ने खारिज की थी ब्रिटिश नोबेल विजेता की प्रतिभा

चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांतिकारी खोज करने वाले और 2012 का नोबेल पुरस्कार हासिल करने वाले ब्रिटेन के शोधार्थी की वैज्ञानिक बनने की तमन्ना को उनके स्कूल के दिनों में एक शिक्षक ने खारिज कर दी थी.

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सर जॉन गुरडॉन
सर जॉन गुरडॉन

चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांतिकारी खोज करने वाले और 2012 का नोबेल पुरस्कार हासिल करने वाले ब्रिटेन के शोधार्थी की वैज्ञानिक बनने की तमन्ना को उनके स्कूल के दिनों में एक शिक्षक ने खारिज कर दी थी. एक समाचार पत्र की रिपार्ट के मुताबिक शिक्षक ने कहा था कि उसकी वैज्ञानिक बनने की महत्वाकांक्षा हास्यास्पद है.

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के 79 वर्षीय सर जॉन गुरडॉन को सोमवार को जापानी वैज्ञानिक 50 वर्षीय शिन्या यामानाका के साथ संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया. उन्हें यह पुरस्कार फिजियोलॉजी या चिकित्सा के क्षेत्र में दिया गया.

एटन के उनके स्कूल के शिक्षक के मुताबिक 15 वर्ष की अवस्था में गुरडॉन में वैज्ञानिक बनने की प्रतिभा दिखाई नहीं पड़ती थी. वर्ष 2006 में गुरडॉन ने अपनी एक स्कूल की रिपोर्ट की टिप्पणी के बारे में लिखा था, 'मेरे खयाल से गुरडॉन वैज्ञानिक बनना चाहता है. वर्तमान स्थिति के हिसाब से यह हास्यास्पद है.'

रिपोर्ट में लिखा गया था, 'यदि वह जीव विज्ञान की साधारण बातों को नहीं सीख सकता है तो उसमें विशेषज्ञ बनने की कोई सम्भावना नहीं हो सकती और यह उसके और उसको पढ़ाने वाले के समय की बर्बादी होगी.'

गुरडॉन और उनके सहयोगी वैज्ञानिक यामानाका ने प्रयोग कर यह दिखाया कि एक परिपक्व कोशिका सिर्फ त्वचा, मस्तिष्क या अन्य विशेषज्ञ कार्य ही नहीं करती बल्कि इसे फिर से युवा बनाकर शरीर के दूसरे हिस्से के लायक बनाई जा सकती है.

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