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विश्व

चीन के खिलाफ भारत के समर्थन में सामने आया अमेरिका

एंटनी ब्लिंकन
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अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन मंगलवार को दो दिन के भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे. अमेरिकी विदेश मंत्री के इस दौरे में अफगानिस्तान में सुरक्षा स्थिति, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संपर्कों को बढ़ावा देने और कोविड-19 महामारी की चुनौतियों से निपटने सहित विभिन्न मसलों पर चर्चा होगी. एंटनी ब्लिंकन के भारत पहुंचने पर अमेरिका ने है कहा कि वह भारत के एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में उभरने का समर्थन करता है. अमेरिका ने कहा कि वह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और बढ़ती समृद्धि और आर्थिक समावेश का क्षेत्र सुनिश्चित करने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण भागीदार है. चीन के बढ़ते वर्चस्व से निपटने के लिए अमेरिका ने क्वाड को मजबूत बनाने पर जोर दिया है. 

(फोटो-PTI)

एंटनी ब्लिंकन
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अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच रक्षा सहयोग नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है, जिसमें सूचना साझा करना, संपर्क अधिकारी और मालाबार जैसे जटिल अभ्यास शामिल हैं.

(फोटो-PTI)

भारत-अमेरिका
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पदभार संभालने के बाद अपनी पहली भारत यात्रा के दौरान एंटनी ब्लिंकन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात करेंगे. इसमें कोविड-19 से निपटने के प्रयासों पर निरंतर सहयोग, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, साझा क्षेत्रीय मुद्दों, सुरक्षा हितों, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और जलवायु संकट सहित कई मसलों पर चर्चा होगी.  

(फोटो-PTI)

भारत-अमेरिका रिश्ते
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एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा, 'अमेरिका-भारत रक्षा सहयोग नई ऊंचाइयों तक पहुंच रहा है, जिसमें सूचना साझा करना, संपर्क अधिकारी, मालाबार युद्धाभ्यास और सुरक्षित संचार करार COMCASA जैसे रक्षा समझौते शामिल हैं. अमेरिका ने 2020 तक 20 बिलियन डॉलर से अधिक रक्षा बिक्री की भारत को अनुमति दी है.'

(फोटो-PTI)
 

भारत-अमेरिका
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अमेरिका-भारत रक्षा प्रौद्योगिकी और व्यापार पहल के माध्यम से रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन और सह-विकास पर मिलकर काम करते हैं. भारत और अमेरिका अफगानिस्तान जैसे क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर मिलकर काम कर रहे हैं.

(फोटो-AP)
 

अमेरिका
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अमेरिका की तरफ से जारी फैक्ट शीट के मुताबिक दोनों देश रक्षा, अप्रसार, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्षेत्रीय सहयोग, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, आतंकवाद विरोधी मुहिम, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, ऊर्जा सहित राजनयिक, व्यापार और निवेश, शांति स्थापना, पर्यावरण, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, कृषि, अंतरिक्ष, महासागर, आर्थिक और सुरक्षा मुद्दों पर एक दूसरे के सहयोगी के तौर पर काम करते हैं. 

(फोटो-AP)

चीन
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चीन की बढ़ती सैन्य ताकत के मद्देनजर भारत, अमेरिका और कई अन्य विश्व शक्तियां क्षेत्र में एक स्वतंत्र, खुले और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति सुनिश्चित करने की आवश्यकता के बारे में बात कर रही हैं. चीनी सेना बीजिंग के प्रभाव को बढ़ाने के लिए रणनीतिक हिंद महासागर क्षेत्र पर भी सक्रिय रूप से नजर गड़ाए हुए है.

(फोटो-AP)

चीन
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चीन विवादित दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है. हालांकि ताइवान, फिलीपींस, ब्रुनेई, मलेशिया और वियतनाम सभी इसके कुछ हिस्सों का दावा करते हैं. बीजिंग ने दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीप और सैन्य प्रतिष्ठान बना लिए हैं.

(फोटो-AP)

अमेरिका
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यही वजह है कि 2017 में भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए 'क्वाड' को स्थापित करने के लंबे समय से लंबित प्रस्ताव को मूर्त रूप दिया.  दक्षिणी चीन सागर में चीन के दावे को अमेरिका खारिज करता है.

(फोटो-AP)

अमेरिका
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अमेरिका और भारत ने 2008 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए. इससे भारत फुलब्राइट प्रोग्राम में पूर्ण भागीदार बन गया है. भारत  अब दुनिया में सबसे बड़ा फुलब्राइट स्कॉलर (संकाय) कार्यक्रम का हिस्सेदार बन गया है. वित्त वर्ष 2019 में इस कार्यक्रम के जरिये 61 अमेरिकी विद्वानों, 66 भारतीय विद्वानों, 29 अंग्रेजी शिक्षण सहायकों सहित 80 अमेरिकी छात्रों और 13 विदेशी भाषा शिक्षण सहायकों सहित 55 भारतीय छात्रों को अवसर मिले हैं. 

(फोटो-AP)

एस जयशंकर-एंटनी ब्लिंकन
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अमेरिका ने कहा कि दोनों देश अंतरराष्ट्रीय संगठनों में सहयोग बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं. अमेरिका ने जनवरी 2021 में दो साल के कार्यकाल के लिए भारत के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शामिल होने का स्वागत किया. अक्टूबर 2020 में, भारत ने तीसरे 2+2 मंत्रिस्तरीय संवाद की मेजबानी की, और अमेरिका इस साल के अंत में अगले 2+2 की मेजबानी करेगा. 

(फोटो-PTI)