scorecardresearch
 
विश्व

अफगान संकट के बीच अमेरिका पर क्यों भड़का रूस?

Taliban
  • 1/10

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद शरणार्थी पड़ोस के देशों की तरफ रुख कर रहे हैं. ईरान ने अफगान शरणार्थियों को स्वीकार करने से इनकार किया है तो तुर्की उन्हें रोकने के लिए अपनी सीमा पर दीवार खड़ी कर रहा है. इस बीच, रूस ने आतंकियों की घुसपैठ की आशंका में अफगान लोगों को पनाह देने से मना कर दिया है. 

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस मसले पर पहली बार प्रतिक्रिया जाहिर की है. उन्होंने अफगानिस्तान से रूस के पास के देशों में अफगान शरणार्थियों को पनाह देने के विचार को खारिज कर दिया है और कहा कि वह नहीं चाहते कि आतंकवादी यहां शरणार्थियों की आड़ में दिखें.

(फोटो-AP)

Putin
  • 2/10

पुतिन ने कुछ पश्चिमी देशों के अफगानिस्तान से शरणार्थियों को मध्य एशियाई देशों में भेजने के विचार की आलोचना की, जबकि अमेरिका और यूरोप में शरणार्थियों के वीजा को लेकर काम जारी है. 

(फोटो-AP)

taliban
  • 3/10

रूस की न्यूज एजेंसी ताश ने पुतिन के हवाले से कहा, "क्या इसका मतलब यह है कि शरणार्थियों को बिना वीजा के हमारे पड़ोसी मुल्कों में भेजा जा रहा है जबकि वे खुद (पश्चिम) उन्हें बिना वीजा के नहीं ले जाना चाहते हैं?" रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए यह अपमानजनक प्रक्रिया क्यों अपनाई जा रही है.

(फोटो-Getty Images)
 

Taliban
  • 4/10

असल में, अमेरिकी और नाटो सैनिकों के लिए काम करने वाले अफगान लोगों को बचाने के लिए अमेरिका ने कई देशों से गोपनीय बातचीत की है. इसी के तहत वह अफगानिस्तान के पड़ोसी मुल्कों में शरणार्थियों को भेजना चाहता है. पुतिन ने कहा कि रूस इसका विरोध करता है. उन्होंने कहा, "हम नहीं चाहते कि आतंकवादी यहां शरणार्थियों की आड़ में दिखाई दें." रूस पूर्व सोवियत मध्य एशियाई देशों मसलन उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान के निवासियों के लिए वीजा मुक्त यात्रा की अनुमति देता है.

(फोटो-AP)

Taliban
  • 5/10

रूस आशंकित है कि अफगान में संकट बढ़ने से उसके लिए आतंकवाद की समस्या बढ़ सकती है. अफगानिस्तान से आने वाले शरणार्थियों के चेचन्या तक पहुंचने और विद्रोही गुटों से मिलने से रूस के लिए खतरा खड़ा हो जाएगा.

(फाइल फोटो-AP)
 

taliban
  • 6/10

कई पश्चिमी देशों को अफगानिस्तान से लोगों को निकालने को लेकर काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. हालांकि रूस ने अफगानिस्तान पर कब्जा किए जाने के बाद व्यवस्था बहाल करने के लिए तालिबान के रवैये की सराहना की है. रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि तालिबान नेता अब तक अपने वादों पर अड़े हुए हैं.

(फोटो-Getty Images)

Taliban
  • 7/10

तालिबान की सराहनाः रूस की न्यूज एजेंसी के मुताबिक सर्गेई लावरोव ने कहा, "हम तालिबान की तरफ से जंग रोकने के बारे में दिए गए बयानों को देख रहे हैं. तालिबान ने टकराव में शामिल सभी लोगों के लिए माफी और एक राष्ट्रव्यापी संवाद की आवश्यकता को लेकर कदम उठाने की बात कही है." लावरोव ने कहा कि तालिबान ने अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई के साथ संपर्क शुरू कर दिया है.

(फोटो-AP)

UK
  • 8/10

इस बीच, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने सोमवार को कहा कि तालिबान को शब्दों के बजाय उसके कामों से आंका जाएगा. अफगान संकट पर जी-7 देशों की आपातकालीन बैठक से पहले उन्होंने यह बात कही. मंगलवार को बैठक के दौरान ब्रिटेन के पीएम, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और अमेरिका के सात नेताओं के समूह से अफगान लोगों के साथ खड़े रहने, शरणार्थियों और मानवीय सहायता के लिए समर्थन जारी रखने का आह्वान करेंगे.  

(फोटो-AP)

Afghanistan
  • 9/10

बोरिस जॉनसन बैठक के दौरान अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से मानवाधिकारों की रक्षा, क्षेत्र की स्थिरता में योगदान और लोगों के पुनर्वास पर ब्रिटेन की प्रतिबद्धताओं के अनुरूप काम करने का आग्रह करेंगे. उन्होंने कहा, "हमारी पहली प्राथमिकता अपने नागरिकों और उन अफ़गानों को निकाला जिन्होंने पिछले 20 वर्षों में हमारी मदद की. लेकिन जैसा कि हम अगले चरण की ओर देख रहे हैं, यह महत्वपूर्ण है कि हम एक अंतरराष्ट्रीय समुदाय के रूप में लंबी अवधि के लिए एक साथ आएं और एक संयुक्त दृष्टिकोण पर सहमत हों." 

(फोटो-AP)
 

taliban
  • 10/10

बोरिस जॉनसन ने कहा, 'तात्कालिक संकट से निपटने को लेकर समन्वय स्थापित करने, अफगान लोगों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करने के लिए, और अपने अंतरराष्ट्रीय भागीदारों से जरूरतमंदों की सहायता के लिए ब्रिटेन की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की खातिर मैंने जी-7 की एक आपात बैठक बुलाई है.' 

ब्रिटिश पीएम ने कहा, "अपने सहयोगियों के साथ हम मानवाधिकारों की रक्षा और अफगानिस्तान में पिछले दो दशकों में हमने जो हासिल किया उसे बचाने के साथ साथ हम हर मानवीय और राजनयिक कदमों को जारी रखेंगे. तालिबान को उनके कार्यों से आंका जाएगा, न कि उनके शब्दों से."

डाउनिंग स्ट्रीट की तरफ से जारी बयान के मुताबिक दुनिया के सात प्रमुख देश के नेताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे पिछले 20 वर्षों में अफगानिस्तान में विशेष रूप से लड़कियों की शिक्षा और महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराएंगे.

(फोटो-AP)