देवरिया के चायवाले साहिल राजभर की कहानी है दिलचस्प. संस्कृत में बारहवीं तक पढ़े साहिल, गंगा किनारे चाय बेचते हैं. मां से मिली गायन की प्रेरणा, भोजपुरी गीतों में महारत. अपनी मां के लिए लिखा गीत 'माई तो हरी अचरा के छ हो' गाकर सुनाया. गांव की परंपराओं से जुड़े गीतों से लेकर आधुनिक रचनाओं तक, साहिल की प्रतिभा है बहुआयामी. एक साधारण चायवाले की असाधारण प्रतिभा की यह कहानी है प्रेरणादायक.