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'सत्य ट्रांसफर नहीं होता', अनुज चौधरी पर FIR का आदेश देने वाले जज के तबादले पर बोले अखिलेश यादव

संभल हिंसा मामले में 15–20 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर का आदेश देने वाले CJM विभांशु सुधीर का संभल से सुल्तानपुर तबादला कर दिया गया है. इस फैसले पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए हैं. अदालत के आदेश को लेकर पुलिस पहले ही अपील की बात कह चुकी थी. जज के तबादले के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है, अब सबकी नजर हाईकोर्ट की कार्रवाई पर टिकी है.

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जज का ट्रांसफर सुल्तानपुर हो गया है. (Photo: ITG)
जज का ट्रांसफर सुल्तानपुर हो गया है. (Photo: ITG)

उत्तर प्रदेश के संभल हिंसा मामले में एएसपी अनुज चौधरी और इंस्पेक्टर अनुज तोमर समेत 15 से 20 पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश देने वाले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर का तबादले का आदेश देने के बाद स्थानांतरण कर दिया गया है. उन्हें अब संभल से सुल्तानपुर भेजा गया है.

इस आदेश को लेकर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने X पर पोस्ट किया है. अखिलेश ने कहा, 'सत्य स्थानांतरित नहीं होता, उसका स्थान अचल है. न्यायपालिका की स्वतंत्रता का हनन सीधे-सीधे लोकतंत्र का हनन है. स्वतंत्र न्यायपालिका ही संविधान की अभिभावकीय सुरक्षा कर सकती है.'
 


15 से 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR का था आदेश
संभल में हुई हिंसा के दौरान घायल युवक आलम के पिता यमन की याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर ने बड़ा फैसला सुनाया था. अदालत ने एएसपी अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर समेत 15 से 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे. इस आदेश को संभल हिंसा मामले में पुलिस की भूमिका तय करने की दिशा में अहम माना गया था.

अदालती आदेश के सामने आते ही जिले में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई थी. संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि पुलिस इस आदेश के तहत मुकदमा दर्ज नहीं करेगी. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी और इसके खिलाफ अपील दायर की जाएगी.

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तबादले ने लिया नया मोड़
अब CJM विभांशु सुधीर के तबादले ने पूरे प्रकरण को एक नया मोड़ दे दिया है. उनके ट्रांसफर के बाद फैसले के समय और परिस्थितियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. भले ही प्रशासन इसे सामान्य तबादला प्रक्रिया बता रहा हो, लेकिन इस कदम पर कई सवाल भी उठ रहे हैं.

फिलहाल संभल हिंसा का मामला बेहद संवेदनशील बना हुआ है. अदालत के आदेश, पुलिस प्रशासन के रुख और अब जज के तबादले के बाद सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि उच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई क्या दिशा लेती है और पीड़ित परिवार को न्याय की प्रक्रिया में आगे क्या राहत मिलती है.

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