
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक अभूतपूर्व घटनाक्रम के तहत, इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने लखनऊ मेयर सुषमा खर्कवाल की प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों को फ्रीज (Freeze) कर दिया है. यह कार्रवाई समाजवादी पार्टी के फैजुल्लागंज वार्ड से नवनिर्वाचित पार्षद ललित किशोर तिवारी को शपथ दिलाने में जानबूझकर की जा रही देरी के चलते की गई है.
कोर्ट के इस कड़े आदेश के बाद, मेयर की तरफ से मौखिक आदेश मिलते ही नगर निगम ने आदेश जारी कर दिया है. ललित किशोर तिवारी का शपथ ग्रहण कल सुबह 9 बजे नगर निगम मुख्यालय में संपन्न होगा.
हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस सैयद कमर हसन रिजवी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान बेहद सख्त टिप्पणी की. कोर्ट ने निर्देश दिया कि जब तक यह मामला सुलझ नहीं जाता, मेयर के पद को 'अस्थायी अनुपस्थिति' वाला पद माना जाए और नगर निगम का कामकाज इसी आधार पर चले.
अवमानना की चेतावनी
बेंच ने साफ किया कि संवैधानिक अदालतें मूकदर्शक नहीं रह सकतीं जब अधिकारी बार-बार न्यायिक निर्देशों की अनदेखी करें. कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि 29 मई तक आदेश का पूर्ण पालन नहीं हुआ, तो मेयर को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अवमानना की कार्यवाही का सामना करना होगा.

'हीट स्ट्रोक' का बहाना
मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 13 मई को ही कोर्ट ने 7 दिनों के भीतर शपथ दिलाने का निर्देश दिया था. सुनवाई के दौरान मेयर ने 'हीट स्ट्रोक' (लू लगना) और अस्पताल में भर्ती होने का हवाला देकर पेशी से छूट मांगी थी.
कोर्ट का ऑब्जर्वेशन
अदालत ने पाया कि मेयर ने दाखिल हलफनामे में कहीं भी शपथ दिलाने की मंशा या इरादे का जिक्र नहीं था. कोर्ट ने इसे न्यायिक आदेशों की जानबूझकर की गई अवहेलना माना.
क्या है पूरा मामला?
समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी ललित किशोर तिवारी को चुनाव न्यायाधिकरण ने निर्वाचित घोषित किया था. निर्वाचित होने के बावजूद, उन्हें लंबे समय से शपथ नहीं दिलाई जा रही थी, जिससे वे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग नहीं कर पा रहे थे. इसके खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी.
अब आगे क्या?
हाई कोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता को कहा है कि राज्य सरकार को तुरंत सूचित किया जाए ताकि कोर्ट के आदेश का पालन हो. रविवार सुबह होने वाला शपथ ग्रहण इसी कानूनी दबाव का परिणाम माना जा रहा है. (इनपुट एजेंसी से भी)