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लखनऊ: इस इंजीनियर की मदद से बची थीं पांच जिंदगी, 3 घंटे में बना ली थी सर्च डिवाइस

लखनऊ बिल्डिंग हादसे में दबे लोगों की जान बचाने वालों में एक ऐसा नौजवान भी था, जिसने मलबे में दबे लोगों की सही दिशा पता करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की. इस नौजवान ने हादसे को देखने के महज ढाई से 3 घंटे के अंदर एक अलग डिवाइस बनाकर मलबे में दबे लोगों को ढूंढना शुरू किया और पांच लोगों की जान बचाई.

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घटनास्थल पर मौजूद मिलिंद राज
घटनास्थल पर मौजूद मिलिंद राज

लखनऊ के हजरतगंज इलाके में मंगलवार शाम को अचानक पांच मंजिला अलाया अपार्टमेंट ढह गया. अपार्टमेंट में रहने वाले लोग मलबे के नीचे दब गए. आनन-फानन में स्थानीय पुलिस के साथ सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें बुलाई गई. रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. करीब 18 घंटे के बचाव कार्य के बाद 14 लोगों को सकुशल निकाल लिया गया. हालांकि दो महिलाओं की मौत भी हो गई है.

सेना और एनडीआरएफ के जवानों के साथ मलबे में दबे लोगों की जान बचाने वालों में एक ऐसा नौजवान भी था, जिसने मलबे में दबे लोगों को ढूंढने में उनकी सही दिशा पता करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की. इस नौजवान ने हादसे को देखने के महज ढाई से 3 घंटे के अंदर एक अलग डिवाइस बनाकर मलबे में दबे लोगों को ढूंढना शुरू किया और पांच ऐसे लोगों की जान बचाई, जिनका बचना नामुमकिन था, जो मलबे के नीचे से सिर्फ सांस भर ले पा रहे थे.

मंगलवार शाम लगभग साढ़े सात बजे हजरतगंज इलाके के वजीर हसन रोड पर स्थित अलाया अपार्टमेंट अचानक तेज आवाज के साथ ढह गया. स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी. पुलिस ने घटनास्थल को देखने के बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना की टीमों को भी बुला लिया गया लेकिन मौके पर एक ऐसा नौजवान भी पहुंचा था, जिसमें एक अपार्टमेंट के मलबे में कई लोगों के दबे होने की खबर टीवी चैनल पर देखी थी.

अपनी रोबोटिक इंजीनियरिंग लैब चलाते हैं मिलिंद

लखनऊ के गोमतीनगर इलाके में रहने वाले मिलिंद राज कंप्यूटर साइंस में बीटेक है. गोमती नगर में इनकी अपनी रोबोटिक इंजीनियरिंग की लैब है. तरह-तरह के रोबोट के जरिए यह अनूठे प्रयोग करते रहते हैं. मंगलवार शाम जैसे ही हादसे की खबर मिलिंद को लगी तो खुद ही घटनास्थल पर पहुंचे. बारीकी से उन्होंने मौके का मुआयना किया और वापस अपनी लैब आ गए. करीब 3 घंटे की मशक्कत के बाद उन्होंने मलबे में दबे लोगों को सही जगह पर लोकेट करने के लिए एक अलग डिवाइस बनाई और फिर मौके पर पहुंच गए.

मिलिंद राज लगभग 10:00 बजे फिर मौके पर पहुंचे. पुलिस और एनडीआरएफ के अफसरों से बातचीत कर उन्होंने बताया कि वह बता सकते हैं कि मलबे के नीचे कोई व्यक्ति किस दिशा में कितनी गहराई पर दबा है. मिलिंद ने अपनी डिवाइस को मलबे में नीचे डालना शुरू किया और आवाज लगाकर मलबे में दबे लोगों से कहा कि वह जहां हो वहां से दीवाल को ठोकर पत्थर मारे या कुछ आवाज करें ताकि वह उनको सुन सके.

मिलिंद के अनुसार, लोगों ने कराहना शुरू कर दिया, किसी ने सांसे ली तो किसी ने आवाज लगाई- बचा लो बचा लो. उनकी इन्हीं आवाजों को सुनने के बाद उनकी सही लोकेशन अपने डिवाइस से पता की और उस जगह पर राहत कार्य शुरू किया और जिसकी वजह से मलबे में बुरी तरह से दबे लगभग 5 लोगों को समय रहते पता लगाया जा सका और बचाव कार्य कर उनको सकुशल बाहर निकाला गया.

मंगलवार रात 10:00 बजे से बुधवार दोपहर लगभग 1:00 तक मिलिंद इस बचाव कार्य में लगे रहे. मंगलवार को हनुमान जी का व्रत रखने वाले मिलिंद लोगों को बचाने के चक्कर में फलाहार करना भी भूल गए और अब जब लोग बाहर निकले तो लोगों को बचाने का सुकून उनके चेहरे पर जरूर था. मिलिंद ने आजतक से बातचीत में साफ कहा कि यह उनके लिए भी अपना पहला अनुभव था, इससे पहले उन्होंने कभी ऐसा कोई रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं किया, लखनऊ उनका अपना शहर है लिहाजा वह अपने आप को रोक नहीं पाए और वह यह खुद ही आ गए.

 

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