यूपी के इटावा में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का सहज और सरल अंदाज देखने को मिला. सैफई से लौटते समय अखिलेश अचानक सड़क किनारे रुके और एक शादी वाले घर में पहुंच गए. वहां उन्होंने मट्ठा के आलू की सब्जी चखते हुए लोगों के साथ फोटो खिंचवाए. उनका यह अंदाज देखकर स्थानीय लोग नेताजी मुलायम सिंह यादव की यादों में खो गए.
लखनऊ से सैफई आते समय एक्सप्रेस-वे से जैसे ही काफिला नीचे आया तो सड़क पर कुछ युवा उनके स्वागत में खड़े हुए थे, तभी उन्होंने गाड़ी रुकवाई और देखा कि सड़क के किनारे एक टेंट लगा हुआ है और वहां शादी का कार्यक्रम है और दावत चल रही है तो रुक गए. उस घर में अचानक पहुंच गए तो वहां खुशी की लहर दौड़ गई.
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लोग हक्के-बक्के रह गए कि अखिलेश यादव उनके बीच आए हैं. यह आदत तो नेताजी मुलायम सिंह यादव की थी कि वह अपने क्षेत्र में किसी के घर में भी जाकर भोजन करने लगते थे. वहां घर में पहुंचने पर अखिलेश यादव ने प्लास्टिक के गिलास में मठा के आलू की सब्जी का आनंद लिया.
दरअसल, 13 फरवरी को सैफई तहसील क्षेत्र के अंतर्गत हवाई पट्टी के निकट नगला कहरी गांव के रहने वाले किसान राजेंद्र सिंह के बेटे की हल्दी और मंडप का कार्यक्रम चल रहा था. उनके बेटे की बारात जा रही है.
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गांव के लोग निमंत्रण में आए हुए थे पूरी व मट्ठा के आलू की सब्जी का आनंद ले रहे थे. तभी अखिलेश यादव वहां रुक गए और शादी में शामिल पुरुषों व महिलाओं से बात करने लगे. उनके साथ फोटो भी खिंचवाई. इस बीच अखिलेश ने मट्ठा के आलू खाने की बात कही. लोगों ने तुरंत उन्हें गिलास में मट्ठा के आलू लाकर दिए, जिन्हें अखिलेश ने बड़े प्रेम और सहजता से खाया.
स्थानीय लोग और कार्यकर्ता उनकी इस सहजता को नेताजी मुलायम सिंह यादव की यादों से जोड़ने लगे. लोगों ने अखिलेश यादव का स्वागत किया. कई लोग उनसे फोटो खिंचवाने और हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़े.
स्थानीय शिक्षक अरविंद उर्फ गुड्डू यादव ने बताया कि अखिलेश यादव ने न केवल शादी वाले परिवार से बातचीत की, बल्कि समारोह में मौजूद लोगों और बच्चों के साथ क्रिकेट की चर्चा भी की. इसी दिन अखिलेश यादव इटावा में मीरा पुरवार नाम की एक वृद्ध महिला के घर भी पहुंचे. मीरा पुरवार मोतियों और अन्य सामान का हस्तनिर्माण करती हैं. उन्होंने उन्हें शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया.