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केदारनाथ धाम में मंदिर के सिवा कुछ नहीं बचा

दस दिन पहले आए तबाही के सैलाब का सताया उत्तराखंड आज भी कराह रहा है. वहां तबाही के आए सैलाब ने सबसे ज्यादा विनाश का तांडव मचाया खुद केदार धाम में. वहां मंदिर के सिवा कुछ नहीं बचा है.

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केदारनाथ केदारनाथ

दस दिन पहले आए तबाही के सैलाब का सताया उत्तराखंड आज भी कराह रहा है. वहां तबाही के आए सैलाब ने सबसे ज्यादा विनाश का तांडव मचाया खुद केदार धाम में. वहां मंदिर के सिवा कुछ नहीं बचा है.

दस दिन बाद केदारनाथ के मंदिर का क्या हाल है, इसके लिए पूरे 24 घंटे तक कैमरामैन संजय चौधरी के साथ केदारनाथ में रुक कर हालात का जायजा लिया हमारे संवाददाता अशोक सिंघल ने.

संहार के देवता के दर पर मौत का मंजर कुछ ऐसा फैला कि 10 दिन बाद भी यहां कुछ है तो एक डरावना सन्नाटा. चारो धाम में से एक भगवान केदारनाथ का मंदिर भी केदारधाम के वजूद को बताने के लिए बचा है. नहीं तो सब कुछ तबाह हो गया. आसमान से बादलों को फाड़ते हुए ऐसी तबाही बरसी कि बाबा केदारनाथ के इस मंदिर के सिवा यहां कुछ नहीं बचा.

मंदाकिनी और सरस्वती नदी की कल-कल धाराएं भगवान शिव के कदमों को चूमकर यहां आगे बढ़ती हैं. लेकिन 16 जून को केदारनाथ के चारों तरफ मौजूद पर्वत श्रृंखलाओं से खौफनाक सैलाब की आहट सुनाई पड़ी. उस वक्त जो लोग मंदिर में थे, उनके लिए वो सैलाब महाप्रलय से कम नहीं था.

बाबा की नगरी तबाह होने लगी. बड़ी बड़ी इमारतें गिरने लगीं. परिवार के साथ, अपने गांव- शहर के लोगों के साथ जत्थों में आए लोग, जत्थों में ही लहरों में तैरने लगे.

तेजधार लहरों के साथ आते बड़े बड़े पत्थरों ने देवभूमि की सबसे पावन धरती को मटियामेट करना शुरू कर दिया. सदियों में जो देवनगरी आबाद हुई थी, वो लम्हों में बर्बाद हो गई.

बाबा केदारनाथ के दर पर पहुंचकर वहां का हाल आपको बता रहा है आजतक...
सैलाब की धार में भगवान तो बच गए हैं लेकिन भक्त नहीं. भगवान का मंदिर भी बच गया है लेकिन अब उनके चबूतरे पर भक्ति की गूंज नहीं. नंदी भी विराजमान हैं लेकिन अब नंदी की सुध लेने वाला कोई नहीं.

जिस नगरी में कभी भी शिव धुन की महिमा बंद नहीं हुई, वहां मौत का सन्नाटा और अनहोनी की आशंका के सिवा कुछ भी नहीं बचा है. जहां हर हर महादेव की गूंज सुनाई पडती थी, वहां अब बाबा के नाम की घंटी नहीं बज रही है. और ना ही भोले भंडारी का जलाभिषेक हुआ.

जब सैलाब आया तो एक बड़ा पत्थर आकर मंदिर के पीछे लग गया. इससे मंदिर तो सुरक्षित बच गया, लेकिन आगे-पीछे-दाएं-बाएं कुछ भी नहीं बचा. सैलाब का सितम खत्म हुआ तो तबाही और विनाश के बीच बस मंदिर ही बचा रहा.

कुदरत के कहर ने भक्ति के सबसे बड़े केंद्र को हिला दिया. अब इंतजार है कि जल्द से जल्द मौसम खुले और फिर से केदारनाथ के दर पर रौनक लौटे.

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