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देश की सबसे साफ नदी में शुमार चंबल हो रही मैली, गिर रहा लाखों लीटर गंदा पानी

चंबल नदी में स्वच्छ पानी होने के कारण ही इसे घड़ियाल अभयारण्य संरक्षित क्षेत्र घोषित किया हुआ है. घड़ियाल स्वच्छ पानी में ही निवास करते हैं लेकिन इस चंबल नदी को नगर परिषद ने गंदा कर रखा है. चंबल नदी स्थित राजघाट गांव के पास तीन नालों के माध्यम से शहर का पानी जा रहा है लेकिन इस ओर नगर परिषद, जिला प्रशासन और जलदाय विभाग ध्यान ही नहीं दे रहे हैं.

देश की सबसे साफ नदी में शुमार चंबल नदी हो रही मैली, गिर रहा लाखों लीटर गंदा पानी . देश की सबसे साफ नदी में शुमार चंबल नदी हो रही मैली, गिर रहा लाखों लीटर गंदा पानी .
स्टोरी हाइलाइट्स
  • चंबल नदी में गिर रहा है शहर के नालों का पानी
  • जलीय जीव जंतुओं के साथ-साथ आम जनजीवन पर संकट
  • चंबल नदी नमामि गंगे प्रोजेक्ट में है शामिल

राजस्थान के धौलपुर जिले से होकर गुजर रही देश की सबसे साफ नदी में शुमार चंबल नदी में अब शहर का लाखों लीटर गंदा पानी घुल रहा है. जानकारी के मुताबिक, धौलपुर शहर का आधा गंदा पानी नालों के माध्यम से चंबल नदी में गिर रहा है. जिले के राजघाट गांव के पास तीन नालों से बेतहाशा गंदा पानी जाने से चंबल नदी के स्वच्छ पानी में गंदगी समा रही है. इससे जहां जलीय जीवों के जीवन पर संकट के बादल छाए हैं तो वहीं शहरवासियों में चिंता की लकीरें नजर आने लगी हैं.

चंबल नदी से ही धौलपुर और भरतपुर तक पानी पहुंच रहा है. इससे शुद्ध पेयजल की बात कहना बेमानी साबित हो रही है. चंबल नदी में स्वच्छ पानी होने के कारण ही इसे घड़ियाल अभयारण्य संरक्षित क्षेत्र घोषित किया हुआ है. घड़ियाल स्वच्छ पानी में ही निवास करते हैं लेकिन इस चंबल नदी को नगर परिषद ने गंदा कर रखा है. 

चंबल नदी स्थित राजघाट गांव के पास तीन नालों के माध्यम से शहर का पानी जा रहा है लेकिन इस ओर नगर परिषद, जिला प्रशासन और जलदाय विभाग ध्यान ही नहीं दे रहे हैं. गंदे पानी को चंबल नदी में जाने से रोकने के लिए किसी ने पहल नहीं की है. इससे चंबल दूषित होती जा रही है. हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय घड़ियाल चंबल सेंचुरी को बचाने के लिए चंबल नदी के तटों से बजरी का खनन रोकने के आदेश दे रखे हैं.

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जिला मुख्यालय पर करीब-करीब पूरे शहर में सीवर लाइन डाली गई है. जहां छोटी गलियां थीं वहां पर अमृत योजना के तहत सीवर लाइन डाली गई है. इससे करीब दस से बारह हजार मकानों में कनेक्शन दिए गए हैं. इसके बावजूद चंबल नदी में गंदा पानी नालों के माध्यम से जा रहा है. नमामि गंगे में शामिल चंबल नदी केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में शामिल है. इससे आसपास के स्थान को विकसित किया जाएगा, जिससे पानी भी स्वच्छ रहे लेकिन नगर परिषद् को इसका ख्याल तक नहीं हैं.

चंबल को बचाने के लिए रेत उत्खनन पर भी प्रतिबंध है और उसी नदी में गंदा पानी छोड़ना इतना गंभीर विषय है. इस नदी में यदि इसी तरह गंदा पानी मिलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब इस नदी में रहने वाले जलीय जीवों का तो नामोनिशान मिट ही जाएगा. साथ ही लोगों को मिल रहा पीने का स्वच्छ पानी का स्रोत भी समाप्त हो जाएगा. चंबल नदी में घड़ियाल और मगरमच्छ अच्छी संख्या में हैं. उनकी संख्या में और वृद्धि करने के प्रयास चल रहे हैं.

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धौलपुर के नगर परिषद आयुक्त सौरभ जिंदल ने बताया कि हमारे यहां पर चंबल नदी नमामि गंगे प्रोजेक्ट में सम्मलित है. इसमें वर्षों से नालों का गंदा पानी जाता रहा है लेकिन राज्य सरकार द्वारा सम्पूर्ण शहर में अमृत योजना और आरयूआईडीपी के द्वारा सीवर लाइन डाली गई है. सीवर लाइन डालने से 80 प्रतिशत तक जो गंदा पानी जाता था वो अब रुक गया है. हमारे यहां दो स्टोपी ( गंदे पानी को रोकने के लिए) भी बने हुए हैं. 

सागरपाड़ा और तगावली में इसका परिशोधन और शुद्धिकरण होता है लेकिन इसके अलावा कुछ पानी सीधे नालों के द्वारा चंबल में जा रहा है. इसके लिए नगर परिषद डब्ल्यूटीपी प्लांट की एक डीपीआर तैयार कर रहा है. वो डीपीआर तैयार होते ही राज्य सरकार को बजट के लिए भेजी जाएगी. बजट स्वीकृत होते ही तुरंत कार्य कराया जाएगा.

स्थानीय नागरिक आशीष मुद्गल ने बताया कि चंबल का पानी धौलपुर जिले के साथ-साथ भरतपुर जिले की पेयजल आपूर्ति भी पूरी करती है लेकिन बेहद दुःख की बात यह है कि यह स्वच्छ नदी घड़ियालों सहित अन्य जलीय जीवों की प्रजनन स्थली है.

उसमें धौलपुर शहर के तीन बड़े नालों का गंदा पानी नदी को प्रदूषित कर रहा है. यह  दुख का विषय है. अगर इस ओर ध्यान दिया जाए तो यह स्वच्छ नदी और साफ हो सकती है और पानी दूषित नहीं होगा तो हम आगे आने वाली पीढ़ी के लिए जल संचय कर सकते हैं. 

 

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