भारत के मशहूर फोटो जर्नलिस्ट रघु राय अब हमारे बीच नहीं रहे. 83 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. वे काफी समय से बीमार थे और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था. उनके बेटे नितिन राय ने बताया कि उन्हें कैंसर था और उम्र बढ़ने की वजह से भी कई दिक्कतें हो रही थीं. कुछ साल पहले उन्हें प्रोस्टेट कैंसर हुआ था, जो बाद में शरीर के अन्य हिस्सों तक फैल गया और आखिरकार यह बीमारी उनके दिमाग तक पहुंच गई. उनके निधन के बाद आज उनकी उन तस्वीरों के लिए पूरे देश में उन्हें याद किया जा रहा है.
जब भी भारत की सबसे दर्दनाक घटनाओं की बात होती है, तो भोपाल गैस ट्रेजेडी की वह मशहूर तस्वीर जरूर याद आती है, जिसमें एक मासूम बच्चा मिट्टी में दबा हुआ नजर आता है. यह तस्वीर रघु राय ने ही खींची थी, और यही फोटो उनके करियर की सबसे प्रभावशाली तस्वीरों में गिनी जाती है. आज उनकी खींची तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.
तस्वीर को याद कर दे रहें श्रद्धांजलि
यह तस्वीर सिर्फ एक फोटो नहीं थी, बल्कि एक पूरा दर्द, एक पूरी कहानी अपने अंदर समेटे हुए थी. इसे देखने के बाद दुनिया भर के लोग हिल गए थे. इस एक तस्वीर ने भोपाल गैस त्रासदी की भयावहता को दुनिया के सामने ला दिया. आज जब रघु राय हमारे बीच नहीं हैं, तो लोग उनकी इसी तस्वीर को याद करके उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं. भोपाल गैस ट्रेजेडी दुनिया की सबसे भयानक दुर्घटनाओं में से एक मानी जाती है. इस त्रासदी की कई तस्वीरें आज भी लोगों को अंदर तक झकझोर देती हैं. उन्हीं में से एक है एक छोटे बच्चे की तस्वीर, जो मिट्टी में दबा हुआ नजर आता है. यह फोटो सालों तक इस हादसे की सबसे दर्दनाक पहचान बन गई.

राजनीति, समाज और संस्कृति से जुड़ी घटनाओं को किया कवर
आपको बता दें कि रघु राय ने बहुत कम उम्र में फोटोग्राफी शुरू की थी. 1965 में उन्होंने कैमरा उठाया और सिर्फ एक साल बाद, 1966 में, उन्हें 'द स्टेट्समैन' अखबार में काम करने का मौका मिल गया. यहां उन्होंने करीब 10 साल तक काम किया और अपनी खास पहचान बनाई. उनकी फोटोग्राफी की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे हर तस्वीर में एक कहानी दिखाते थे. चाहे वह आम लोगों की जिंदगी हो, देश की संस्कृति हो या कोई बड़ी घटना. वे हर चीज को अपने कैमरे में बहुत ही सजीव तरीके से कैद करते थे.
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और बांग्लादेश शरणार्थियों की स्थिति को उन्होंने अपने कैमरे में बेहद प्रभावशाली तरीके से दिखाया. उनके इसी काम के लिए 1972 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा. 1980 के दशक में उन्होंने इंडिया टुडे मैगजीन के साथ काम किया. यहां उन्होंने कई बड़े प्रोजेक्ट किए और राजनीति, समाज और संस्कृति से जुड़ी घटनाओं को अपनी तस्वीरों के जरिए लोगों तक पहुंचाया.

फोटोग्राफर ऑफ द ईयर का मिला अवॉर्ड
उनकी तस्वीरें सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर की बड़ी पत्रिकाओं में छपी. 1992 में उन्हें नेशनल ज्योग्राफिक में प्रकाशित एक स्टोरी के लिए फोटोग्राफर ऑफ द ईयर का अवॉर्ड मिला. 2009 में फ्रांस सरकार ने भी उन्हें एक बड़ा सम्मान दिया.उनके निधन के बाद एक बार फिर उनकी वही तस्वीरें सोशल मीडिया और खबरों में छाई हुई हैं. लोग कह रहे हैं कि रघु राय सिर्फ एक फोटोग्राफर नहीं थे, बल्कि एक कहानीकार थे, जिन्होंने कैमरे के जरिए इतिहास को जीवित कर दिया.

कौन था यह बच्चा?
यह तस्वीर मशहूर फोटोग्राफर रघु राय ने खींची थी. इस फोटो में एक मासूम बच्चे का चेहरा दिखाई देता है, जो आधे मिट्टी में दबा हुआ है. उसकी आंखें बंद हैं और चेहरा बिल्कुल शांत, लेकिन बेहद दर्दनाक नजर आता है. इस तस्वीर को देखकर ऐसा लगता है जैसे उस बच्चे ने बहुत तकलीफ झेली हो. इस तस्वीर में दिख रहे बच्चे की पहचान पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाई थी. यही कारण है कि यह फोटो और भी ज्यादा रहस्यमयी और भावनात्मक बन जाती है. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बच्चा उन हजारों बच्चों में से एक था, जो जहरीली गैस के कारण अपनी जान गंवा बैठे थे.
इस बच्चे की कोई एक आधिकारिक पहचान सामने नहीं आई, लेकिन यह तस्वीर उन सभी मासूम जिंदगियों का प्रतीक बन गई, जो इस हादसे में खत्म हो गईं. इसलिए इसे भोपाल गर्ल या भोपाल गैस ट्रेजेडी गर्ल के नाम से भी जाना जाता है.
क्या है इस फोटो की कहानी
1984 की उस रात, जब यूनियन कार्बाइड के प्लांट से जहरीली मिथाइलआइसोसाइनाइट (MIC) गैस लीक हुई, तब हजारों लोग नींद में ही इसकी चपेट में आ गए. सुबह होते-होते शहर में हर तरफ मौत और तबाही का मंजर था. इसी दौरान फोटोग्राफर रघु राय वहां पहुंचे और उन्होंने इस दर्दनाक सच्चाई को अपने कैमरे में कैद किया. उन्होंने कई तस्वीरें लीं, लेकिन यह बच्ची वाली तस्वीर सबसे ज्यादा चर्चित हुई. इसमें एक आदमी का हाथ भी दिखता है. यह दृश्य इतना भावुक था कि जिसने भी इसे देखा, वह अंदर तक हिल गया. इस तस्वीर ने पूरी दुनिया का ध्यान भोपाल गैस त्रासदी की ओर खींचा.
इस फोटो की खास बात यह है कि इसमें बिना कुछ बोले ही बहुत कुछ कहा गया है. इसमें न सिर्फ एक बच्चा का दर्द दिखता है, बल्कि उस पूरी त्रासदी का असर नजर आता है. यह तस्वीर कई अंतरराष्ट्रीय मैगजीन और अखबारों में छपी. इसने लोगों को यह समझाने में मदद की कि यह हादसा कितना बड़ा और भयावह था. कई लोग कहते हैं कि अगर यह फोटो न होती, तो शायद दुनिया को इस त्रासदी की गंभीरता इतनी जल्दी समझ नहीं आती.

इस तस्वीर ने लोगों के दिलों को झकझोर दिया. इसे देखने के बाद दुनियाभर में गुस्सा और दुख दोनों फैला. लोगों ने सवाल उठाए कि इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो सकती है? और क्यों इतने निर्दोष लोगों की जान चली गई? भोपाल गैस त्रासदी को कई साल बीत चुके हैं, लेकिन इस तस्वीर को लोग आज भी याद करते हैं. जब भी इस हादसे की बात होती है, यह फोटो जरूर सामने आती है.