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सचिन के बाद अब धोनी को राज्‍यसभा भेजने की मुहिम

'क्रिकेट के भगवान' सचिन तेंदुलकर को राज्‍यसभा में भेजने के बाद अब टीम इंडिया के कप्‍तान महेंद्र सिंह धोनी को भी संसद भेजने की मांग उठने लगी है.

महेंद्र सिंह धोनी महेंद्र सिंह धोनी

'क्रिकेट के भगवान' सचिन तेंदुलकर को राज्‍यसभा में भेजने के बाद अब टीम इंडिया के कप्‍तान महेंद्र सिंह धोनी को भी संसद भेजने की मांग उठने लगी है. पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की पार्टी ने तो बाकायदा इसके लिए मुहिम भी शुरू कर दी है. लोक जनशक्ति पार्टी की झारखंड यूनिट ने धोनी के नाम का एक प्रस्ताव तैयार किया है जिसमें सभी राजनीतिक दलों से मांग की गई है कि धोनी को निर्विरोध राज्यसभा में भेजा जाए.

गौरतलब है कि झारखंड के कोटे से राज्यसभा की दो सीटों के लिए फरवरी में चुनाव होने हैं. सूबे के मौजूदा राजनीतिक समीकरण की वजह से कोई भी पार्टी अपने बूते किसी उम्मीदवार को नहीं जिता सकती है. ऐसे में पार्टी समर्थित उम्मीदवार भी जीत के लिए दूसरों के भरोसे रहेंगे. वहीं स्थानीयता का मुद्दा जोर पकड़ने के कारण बाहरी निर्दलीय उम्मीदवार भी किसी क्षेत्रीय पार्टी के सहारे चुनावी वैतरणी पार करने की जुगत में हैं.

लोजपा की झारखंड इकाई के अध्‍यक्ष बबन गुप्‍ता ने सभी राजनीतिक दलों से अनुरोध किया है कि धोनी को राज्‍यसभा में भेजने में मदद करें. दरअसल, लोजपा का झारखंड में कोई आधार नहीं है. ऐसे में लग रहा है कि पार्टी धोनी को राज्‍यसभा भेजने का मसला उठाकर सुर्खियां बटोरने की ताक में है. धोनी के गृह नगर रांची के बुद्धिजीवियों का भी मानना है कि किसी बाहरी को जिताने से बेहतर है कि साफ-सुथरी छवि के स्थानीय व्यक्ति को ही राज्यसभा भेजा जाए. सूबे की दूसरी राजनितिक पार्टियां इस मुद्दे पर अभी अपने पत्‍ते खोलने से परहेज कर रही हैं.

जेवीएम के नेता प्रदीप यादव ने धोनी को राज्‍यसभा भेजने की मांग पर कहा, 'ये काल्पनिक बातें हैं. धोनी को क्रिकेट खेलने देना चाहिए.' झारखंड के भवन निर्माण मंत्री हाजी हुसैन अंसारी ने कहा कि पार्टी के विधायकों की बैठक के बाद ही इस मसले पर कोई फैसला लिया जाएगा.

फिर से राज्‍यसभा पहुंचने की जोर-आजमाइश
झारखंड कोटे से राज्‍यसभा पहुंचे सांसद भी एक बार फिर से सदन पहुंचने की आजमाइश कर रहे हैं. अप्रैल में अपना कार्यकाल पूरा कर रहे परिमल नाथवानी आजसू, जेवीएम और सत्ताधारी जेएमएम के साथ नजदीकियां बढ़ाने में लगे हैं.

पिछले चुनाव के दौरान खरीद-फरोख्‍त (हॉर्सट्रेडिंग) का मामला सामने आने के बाद इस बार सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं. ऐसे में कम से कम इस बार ऐसे उम्‍मीदवारों के राज्यसभा में पहुंचने की मंशा पर पानी फिर सकता है जो धनबल के बूते सदन पहुंचने में कामयाब हो जाते हैं.

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