एक व्यक्ति अपने पिता की अचानक दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु के दो हफ्ते बाद उनके बैंक खाते बंद कराने एसबीआई पहुंचे. वहीं, उन्हें पता चला कि उनके पिता पर लगभग 18.5 लाख रुपये का पर्सनल लोन था, जिसमें से 10.6 लाख रुपये अभी बाकी हैं. यह सुनकर वह परेशान हो गया क्योंकि वह इतनी रकम चुकाने की स्थिति में नहीं है. बैंक कर्मचारियों ने उसे बताया कि इस लोन पर कोई बीमा नहीं है, और कानून के अनुसार कानूनी उत्तराधिकारी यानी परिवार के सदस्यों को यह कर्ज चुकाना पड़ेगा. उसके पिता पंचायत सचिव थे और उनका एसबीआई सैलरी पैकेज (डायमंड टियर) खाता भी था. मैनेजर ने कहा कि शायद इसमें बीमा कवर हो, लेकिन पक्का नहीं बता पाए.

युवक ने लोगों से मांगी सलाह
इस बीच EMI कटनी भी शुरू हो गई है, जबकि पेंशन, PF और ग्रेच्युटी जैसे फायदे मिलने में 6–12 महीने लगेंगे. इसलिए युवक ने Reddit पर पूछा कि क्या सच में उसे यह असुरक्षित (Unsecured) लोन चुकाना पड़ेगा, और क्या सैलरी अकाउंट में कोई लोन बीमा कवर होता है.परेशान युवक ने एक अपडेट में बताया कि वह बैंक को ईमेल करके लोन एग्रीमेंट की कॉपी, और किसी भी बीमा कवर की जानकारी औपचारिक रूप से मांगने वाला है, क्योंकि व्यक्तिगत बातचीत ने उसकी उलझन और बढ़ा दी है. उसने अपने परिवार को भी वकील से सलाह लेने की सलाह दी है.
Reddit यूज़र्स की सलाह
कई यूज़र्स ने कहा कि सबसे पहले वकील रखो और लोन डॉक्यूमेंट ध्यान से पढ़ें. अगर डॉक्यूमेंट में यह नहीं लिखा कि कानूनी वारिस कर्ज चुकाने के लिए जिम्मेदार है, तो बैंक मजबूर नहीं कर सकता. एक यूजर ने बताया कि पर्सनल लोन असुरक्षित होता है, इसलिए बैंक के पास कानूनी वारिस से पैसे वसूलने के सीमित विकल्प होते हैं.उन्होंने सलाह दी कि बैंक से लोन डॉक्यूमेंट मांगो और जब तक वह न दें, कोई फैसला मत करो. एक अन्य यूजर ने साफ कहा कि कानूनी उत्तराधिकारी तभी कर्ज चुकाने के लिए जिम्मेदार होते हैं जब उन्होंने लोन में गारंटर के रूप में साइन किया हो.