केरल के वायनाड जिले में एक आदमी की जबरन नसबंदी कराने का मामला सामने आया है. यहां स्वास्थ अधिकारी ने एक आदमी की जबरन नसबंदी करा दी. जिसके बाद एक गांव के लोगों ने जमकर हंगामा किया. पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरु कर दी है.
घटना वायनाड जिले के पुलपल्ली गांव की है. यहां रहने वाले चंद्रन को सीएचसी के एक जूनियर स्वास्थ्य निरीक्षक ने किसी काम के लिए सीएचसी पर बुलाया था. जब चंद्रन वहां पहुंचा तो एक स्वास्थ अधिकारी ने उसे एक टिटनेस निरोधक इंजेक्शन लेने के लिए कहा. और थोड़ी देर बाद जबरन उसकी नसबंदी कर दी गयी.
पुलिस के मुताबिक जब उस दिन शाम को उसे सीएचसी से छुट्टी दी गयी तब अधिकारियों ने उसे 1,000 रुपये भी दिये. घर पहुंचने पर उसे बेचैनी और अपने गुप्तांगों में दर्द महसूस हुआ जिसके बाद अगले दिन वह फिर से सीएचसी गया लेकिन अधिकारियों ने उसे भर्ती नहीं किया.
हालांकि सीएचसी अधिकारियों ने दावा किया है कि चंद्रन के दो बच्चे हैं और उसने सहमति पत्र पर खुद हस्ताक्षर भी किए थे. लेकिन पीड़ित ने इस बात का खंडन किया और कहा कि उसकी शादी एक आदिवासी महिला से हुई थी जिसकी पहली शादी से दो बच्चे थे और वह उसे करीब नौ वर्ष पहले छोड़ कर चली गयी थी.
इस घटना के विरोध में कुछ गांव वालों ने स्वास्थ्य केंद्र पर प्रदर्शन किया. जिसकी वजह से वहां का कामकाज ठप्प हो गया. जिला कलेक्टर केसवेन्द्र कुमार ने प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत की. उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है. डीएम ने भरोसा दिलाते हुए कहा कि जिला चिकित्सा अधिकारी की तरफ से एक विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
हालांकि, स्वास्थ्य अधिकारियों ने दावा किया है कि चंद्रन अपनी इच्छा से नसबंदी कराने के लिए आया था. अब पुलिस भी आगे की कार्रवाई के लिए सीएमओ की जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है.
-इनपुट भाषा