सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति पहाड़ों के बीच खड़े होकर आसमान की ओर इशारा करता नजर आता है. वीडियो में ऊपर लिखा है-“I wish I knew this earlier! IAF PILOT” और नीचे बताया गया है कि यह सेना का एक खास तरीका है, जिससे समय और दूरी का अंदाजा लगाया जाता है. इस वीडियो ने लोगों का ध्यान इसलिए खींचा है क्योंकि इसमें दावा किया जा रहा है कि भारतीय वायुसेना के पायलट एक खास तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, जिससे वे बिना किसी घड़ी या उपकरण के समय का अंदाजा लगा सकते हैं. वीडियो में दिखाया गया व्यक्ति सूरज की दिशा और हाथ के इशारों के जरिए कुछ समझाने की कोशिश करता है.
इस वीडियो को Grittywheels नाम के इस्टा पोस्ट से शेयर किया गया है. पोस्ट के कैप्शन में लिखा है- भारतीय वायु सेना के एक पायलट से मुलाक़ात हुई... और उन्होंने मुझे एक कमाल की बात सिखाई. अब चाहे मैं पहाड़ों में हूं या समुद्र के किनारे,यह महज़ एक सूर्यास्त नहीं रह गया है, बल्कि यह आसमान की ओर से मिली एक 'खामोश ब्रीफ़िंग' है.
जानें क्या है यह तरीका?
वीडियो के मुताबिक, सूरज की स्थिति और हाथ की दूरी के जरिए समय का अनुमान लगाया जा सकता है. जैसे- सूरज और क्षितिज के बीच की दूरी को हाथ से मापा जाता है. एक हाथ की चौड़ाई लगभग 15 डिग्री मानी जाती है. इससे अंदाजा लगाया जाता है कि सूरज कितनी देर में डूबेगा. इस तरह के तरीके को आम भाषा में नेचुरल नेविगेशन या फील्ड जजमेंट कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल पुराने समय से सैनिक और पायलट करते आए हैं.
क्या सच में IAF पायलट ऐसा करते हैं?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, सेना और एयरफोर्स में ट्रेनिंग के दौरान कई तरह के बेसिक सर्वाइवल स्किल्स सिखाए जाते हैं. इनमें बिना उपकरण के दिशा, समय और दूरी का अंदाजा लगाना भी शामिल होता है. हालांकि, आज के समय में पायलट्स के पास एडवांस टेक्नोलॉजी, GPS और आधुनिक उपकरण होते हैं, इसलिए वे सिर्फ ऐसे तरीकों पर निर्भर नहीं रहते. लेकिन इमरजेंसी या खास परिस्थितियों में ये पारंपरिक तरीके काम आ सकते हैं.
सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हुआ वीडियो?
इस वीडियो के वायरल होने की सबसे बड़ी वजह आसान और दिलचस्प तरीका है. लोग इसे देखकर हैरान हैं कि बिना किसी घड़ी या मशीन के भी समय का अंदाजा लगाया जा सकता है. कई यूजर्स ने इसे उपयोगी बताया, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि यह तरीका पूरी तरह सटीक नहीं होता और सिर्फ अनुमान के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है.
क्या यह तरीका भरोसेमंद है?
विशेषज्ञों का कहना है कि यह तरीका 100% सटीक नहीं होता. मौसम, स्थान और मौसम की स्थिति पर निर्भर करता है. इसे सिर्फ अनुमान के लिए इस्तेमाल करना चाहिए
यानी यह एक रफ आइडिया देता है, लेकिन पूरी तरह भरोसा करना सही नहीं है. इस वायरल क्लिप का मकसद लोगों को यह दिखाना है कि प्रकृति को समझकर भी हम कई चीजों का अंदाजा लगा सकते हैं. यह हमें पुराने समय के उन तरीकों की याद दिलाता है, जब लोग बिना किसी आधुनिक तकनीक के जीवन जीते थे.