अपनी अनोखी लोक संस्कृति और परंपराओं के लिए विख्यात छत्तीसगढ़ में एक ऐसा गांव भी है, जहां के लोग अपने ग्राम देवता की प्रसन्नता के लिए चार प्रमुख त्योहार हफ्तेभर पहले ही मना लेते हैं. यह गांव है धमतरी जिले का सेमरा (सी). इस गांव में सिर्फ दशहरा ही उसी तिथि को मनाया जाता है, बाकी दिवाली, होली जैसे कई बड़े त्योहार सप्ताहभर पहले ही मनाए जाते हैं. इस वर्ष भी जब पूरे देश के लोग दिवाली 11-12 नवंबर को मनाएंगे तो सेमरा (सी) में दिवाली के लिए 5 नवंबर की तारीख तय की गई है.
परंपरा की शुरुआत से ग्रामीण अनजान
पौने दो सौ की अबादी वाले सेमरा (सी) में मतभेद और मनभेद की भावना से परे हटकर ग्रामीण सैकड़ों वर्षों से इस अनोखी परंपरा का निर्वहन करते आ रहे हैं. चौंकाने वाली बात यह कि इस परंपरा की शुरुआत कब हुई, इससे ग्रामीण अनजान हैं. यहां ग्राम देवता सिरदार देव के स्वप्न को साकार करने प्रतिवर्ष दिवाली, होली पोला और हरेली का त्योहार तय तिथि से एक सप्ताह पूर्व मनाया जाता है. इस वर्ष बुजुर्ग, युवा और बच्चे 5 नवंबर को दिवाली मनाने की तैयारी में हैं.
सपने को साकार करने के लिए पहले मनाते है त्योहार
गांव के 85 वर्षीय बुजुर्ग डोमार देवांगन ने बताया कि सैकड़ों वर्ष पूर्व इस गांव की भूमि में एक बुजुर्ग आकर निवास किए. उनका नाम सिरदार था. उनकी चमत्कारिक शक्तियों एवं बातों से गांव के लोगों की परेशानियां दूर होने लगीं. मान्यता है कि किसी किसान को स्वप्न देकर सिरदार देव ने कहा था कि प्रतिवर्ष दीपावली, होली, हरेली व पोला ये चार त्योहार हिंदी पंचाग में तय तिथि से एक सप्ताह पूर्व मनाए जाएं, ताकि इस गांव में उनका मान बना रहे. तब से ये चार त्योहार प्रतिवर्ष ग्रामदेव के कथनानुसार मनाते आ रहे हैं. ग्रामवासी देव के स्वप्न को साकार करने के लिए ये त्योहार एक सप्ताह पूर्व मनाते आ रहे हैं.
शादीशुदा महिलाएं नहीं जाती हैं देवता के पास
दशहरा का पर्व इस गांव में पूरे भारतवर्ष के साथ यानी हिंदी पंचाग में तय अंकित तिथि में ही मनाया जाता है. रावण का दहन पूरे गांव में एक स्थान यानी सिरदार देव के मंदिर के पास ही होता है. त्योहार के दिन गांव का प्रत्येक निवासी, बच्चे, बड़े, बुजुर्ग और जवान सिरदार देव के मंदिर के पास एकत्र होते हैं. लेकिन परंपरा के अनुसार गांव की युवतियां एवं शादीशुदा महिलाएं ग्राम देवता सिरदार देव के करीब नहीं जातीं.
इनपुट: IANS