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आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाती रहेगी UPA सरकार: प्रणब

सुधारों को लेकर केन्द्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की आलोचना को दरकिनार करते हुये वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि अब सरकार के लिये कुछ कठिन फैसले लेने का समय आ गया है.

प्रणब मुखर्जी प्रणब मुखर्जी

सुधारों को लेकर केन्द्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की आलोचना को दरकिनार करते हुये वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि अब सरकार के लिये कुछ कठिन फैसले लेने का समय आ गया है.

उन्होंने विश्वास जताया कि सुधारों से जुड़े तीन प्रमुख विधेयक- पेंशन, बैंकिंग और बीमा इसी साल पारित होंगे. वाशिंगटन की एक संस्था को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार आर्थिक सुधारों के प्रति प्रतिबद्ध है और दरअसल ऐसे कई मामलों पर कानूनी व प्रशासनिक बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है जिससे अर्थव्यवस्था को फायदा होगा.

उन्होंने कहा, ‘हम ऐसे मुकाम पर हैं जब कुछ कड़े फैसले लेने होंगे. हम इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और हाल ही में पेश आम बजट 2012-13 में इस बारे में प्रस्तावों का उल्लेख भी किया है.’ वह पीटर जी पीटरसन इंस्टीच्यूट फार इंटरनेशनल इकनोमिक्स में पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे. यह समारोह सीआईआई के सहयोग से किया गया था.

मुखर्जी ने कहा, ‘जहां तक विधेयकों का सवाल है तो हमने पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण, बीमा और बैंकिंग संशोधन विधेयक के लिए शुरुआती विधायी प्रक्रिया के लिये प्रतिबद्धता पहले ही जाहिर कर दी है. मुझे उम्मीद है कि ये तीनों विधेयक इस साल कानून बन जाएंगे. संसद के इस सत्र में उक्त विधेयक पारित नहीं हुए तो अगले सत्र में पारित हो जाएंगे.’

साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ ऐसे सुधार हैं जिनके सामने गठबंधन की चुनौतियों के मद्देनजर मुश्किलें पेश आ सकती है. उन्होंने कहा, ‘निश्चित तौर पर हमें राज्य सरकार समेत विभिन्न संबद्ध पक्षों को राजी करना होगा और यदि हम ऐसा कर सके तो शायद जीएसटी और जीएसटी को लागू करने के लिए जरूरी संवैधानिक संशोधन विधेयक संसद के इस सत्र में या अगले सत्र में पारित हो जाएगें और इसके बाद इस साल के खत्म होने से पहले कम से कम 15 राज्यों की विधानसभा इस पर अपनी सहमति व्यक्त कर देंगी.’

प्रत्यक्ष करों के मामले में मुखर्जी ने कहा कि उन्हें पक्का विश्वास है कि संसद के अगले सत्र में पारित होने के बाद अगले वित्त वर्ष से इसे लागू कर दिया जायेगा. ‘कर सुधारों के मुद्दे पर प्रत्यक्ष कर संहिता को अगले वित्त वर्ष से अमल में ला दिया जायेगा.’ अप्रत्यक्ष करों के मामले में उन्होंने कहाख, ‘अप्रत्यक्ष करों के मामले में सबसे अहम निर्णय जीएसटी संविधान संशोधन को लेकर है, यह इसी कैलेंडर वर्ष में संभव हो सकता है.’

इससे पहले अपने शुरुआती भाषण में मुखर्जी ने कहा कि वैश्विक आर्थिक संकट के इस नये दौर में भारतीय अर्थव्यवस्था कई अन्य देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में रही है. उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय बैंकिंग क्षेत्र काफी मजबूत है और इसके नियमन की व्यवस्था पहले से ही है.

देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिये पीछे न हटने वाले सुधारों के प्रति पूरी प्रतिबद्धता है. चालू वित्त वर्ष के दौरान आर्थिक वृद्धि 7.6 प्रतिशत रहने की उम्मीद है और इससे अगले वित्त वर्ष में इसके एक प्रतिशत और उंची रहने की उम्मीद है.

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