छोटे बच्चों की जीवनशैली पर आधारित एक अध्ययन में पाया गया कि में से आधे सप्ताह में तीन बार रात का भोजन टीवी के सामने करते हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के अध्ययनकर्ता लुईस हार्डी का कहना है कि ज्यादातर अभिभावक यह समझ नहीं पाते कि उनके बच्चों में वजन सम्बंधी परेशानियां हैं.
'प्रीवेंटिव मेडीसिन' जर्नल के मुताबिक पांच साल से कम उम्र के 1,200 से ज्यादा बच्चों पर यह अध्ययन किया गया. परिणामों में पाया गया कि लगभग एक-तिहाई मोटे बच्चों के शयनकक्ष में टीवी था.
सिडनी विश्वविद्यालय से जारी वक्तव्य के मुताबिक स्वस्थ व अधिक वजन वाले 60 प्रतिशत से ज्यादा बच्चों को उनके मीठा खाने के प्रति अच्छे व्यवहार के लिए पुरस्कृत किया गया. अध्ययन में शामिल पांचवे हिस्से से ज्यादा मोटापाग्रस्त व अधिक वजन वाले बच्चों में देखा गया कि वे नाश्ता नहीं करते हैं.
किंडरगार्टन के अधिक वजन वाले बच्चों के 70 प्रतिशत अभिभावकों को लगता है कि उनके बच्चों का वजन सही है. मोटापाग्रस्त बच्चों के 30 प्रतिशत अभिभावक सोचते हैं कि उनके बच्चों का वजन सही है. शोधकर्ताओं का कहना है कि जब बच्चे स्कूल जाना शुरू करते हैं तभी उनके जीवनशैली सम्बंधी व्यवहारों की नींव तैयार हो जाती है.