भारतीय रिजर्व बैंक से आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरों में कमी के लिए चौतरफा मांग उठ रही है. नीतिगत दरों में कटौती की मांग के बीच मंगलवार को केंद्रीय बैंक ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार तथा निवेश में कमी के लिए ब्याज दरें एकमात्र कारण नहीं हैं.
रिजर्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव ने छठे सांख्यिकी दिवस सम्मेलन के मौके पर कहा, ‘केंद्रीय बैंक का मानना है कि ब्याज दरें वृद्धि दर में कमी की कई वजहों में से एक हैं. रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरों में बढ़ोतरी को ही निवेश में कमी की वजह नहीं माना जा सकता.’ सुब्बाराव ने कहा, ‘मैंने अपने आर्थिक अनुसंधान विभाग वास्तविक ब्याज दरों तथा निवेश गतिविधियों पर विस्तृत अध्ययन को कहा है. अगले एकाध माह में हम इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करेंगे.’
रिजर्व बैंक की तिमाही मौद्रिक नीति की समीक्षा 31 जुलाई को आनी है. सुब्बाराव ने पिछले महीने नीतिगत समीक्षा में ब्याज दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया था, जिसकी उद्योग के साथ-साथ सरकार ने भी आलोचना की थी.
केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा से पहले उद्योग ने एक बार फिर से ब्याज दरों में कटौती की मांग उठानी शुरू कर दी है जिससे आर्थिक वृद्धि को रफ्तार दी जा सके. 2011-12 में आर्थिक वृद्धि दर घटकर 6.5 फीसदी रह गई है, जो इसका नौ साल का निचला स्तर है. रिजर्व बैंक के गवर्नर ने महंगाई, राष्ट्रीय आय तथा वृद्धि की गणना में आंकड़ों के अंतर पर भी सवाल उठाया है.
उन्होंने इनमें सुधार की जरूरत बताई है. इसके साथ ही सुब्बाराव ने 2011-12 में आर्थिक वृद्धि दर के घटकर 6.5 फीसदी रह जाने तथा मार्च, 2010 से अक्तूबर, 2011 के दौरान रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरों में 3.75 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बीच संबंध पर भी सवाल उठाया है.
मौजूदा स्थिति के बारे में रिजर्व बैंक गवर्नर ने कहा, ‘संकट बाद की अवधि में आर्थिक गतिविधियों को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है. भारत इससे अछूता नहीं है.’ सुब्बाराव ने कहा कि निचली तथा स्थिर मुद्रास्फीति के उद्देश्य के साथ भारत की संभावित वृद्धि दर का आकलन एक चुनौती है.
सुब्बाराव ने बताया कि रिजर्व बैंक की 2009-10 की वाषिर्क रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था का संभावित उत्पादन संकट पूर्व की स्थिति के 8.5 फीसदी से घटकर संकट बाद की स्थिति में 8 प्रतिशत रह गया है.
उन्होंने कहा कि ताजा आकलन से लगता है कि संभावित उत्पादन की वृद्धि दर और घटकर 7.5 फीसदी रह गई है.