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राष्ट्रपति ने पुणे में आवास का इरादा त्यागा

विवादों के बाद राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने सेवानिवृत्ति के बाद पुणे में आवंटित आवास को छोड़ने की घोषणा की.

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प्रतिभा पाटील
प्रतिभा पाटील

विवादों के बाद राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने सेवानिवृत्ति के बाद पुणे में आवंटित आवास को छोड़ने की घोषणा की.

राष्ट्रपति भवन ने एक वक्तव्य में कहा, ‘..कुछ लोगों द्वारा मामले को युद्ध विधवाओं के आवास से जोड़े जाने पर राष्ट्रपति ने पुणे में उनकी सेवानिवृत्ति के बाद बनने वाले प्रस्तावित आवास के आवंटन को त्यागने का फैसला किया है.’

वक्तव्य में पुणे के आवास का हवाला दिया गया लेकिन यह साफ नहीं हो पाया कि राष्ट्रपति की सेवानिवृत्ति के बाद क्या योजनाएं हैं.

राष्ट्रपति भवन के सूत्रों ने बताया कि यह उनका फैसला है. उन्होंने कहा कि भावी योजना पर वह सही समय पर फैसला करेंगी.

पुणे के खाडकी कैंट में उनके प्रस्तावित आवास से जुड़ी जमीन को लेकर चल रहे विवाद को विराम देने की मांग करते हुए वक्तव्य में कहा गया, ‘उम्मीद है कि इससे सारे संदेह खत्म हो जाएंगे.’ एनजीओ ‘ग्रीन थंब’ के हिस्सा पुणे स्थित ‘जस्टिस फॉर जवान’ के सेवानिवृत्त ले. कर्नल सुरेश पाटिल ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को पुणे में 2.6 लाख वर्गफुट जमीन देने की सरकार की योजना का खुलासा किया था जिसके बाद विवाद उठ खड़ा हुआ.

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सुरेश पाटिल ने दावा किया कि 4500 वर्ग फुट में होने वाले निर्माण के लिए ब्रिटिश जमाने के दो बंगलों को तोड़ा जाएगा. हालांकि राष्ट्रपति भवन ने लगातार यह कहा कि कुछ भी गलत नहीं हो रहा या किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं हो रहा. राष्ट्रपति के सेवानिवृत्ति के बाद रहने के लिए बनने वाले आवास के लिए सारे नियमों का कड़ाई से पालन किया गया.

वक्तव्य में राष्ट्रपति भवन ने कहा कि राष्ट्रपति सेवानिवृत्ति के बाद अपने रहने के लिए पुणे वाले आवास को लेकर कुछ भ्रमक प्रचारों को देख, पढ रही हैं.

वक्तव्य में कहा गया, ‘उन्होंने प्रतिक्रिया नहीं देने का विकल्प चुना क्योंकि वह हमेशा से देश के संविधान और अपनी अंतर्रात्मा के प्रति जवाबदेह रही हैं.’ राष्ट्रपति भवन के वक्तव्य में कहा गया, ‘ऐसी उम्मीद की गई कि तथ्यों के सार्वजनिक किए जाने के बाद संबंधित लोग इससे संतुष्ट हो जाएंगे लेकिन राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा स्पष्टीकरण दिए जाने के बावजूद यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि संदेह कायम रहा.’

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