वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि उन्हें प्रधानमंत्री नहीं बन पाने का कोई दुख नहीं है. उन्होंने साथ ही कहा कि मनमोहन सिंह ‘बेहतरीन व्यक्तियों’ में से एक हैं और इस पद को संभालने में सक्षम हैं.
प्रणब मुखर्जी ने कहा, ‘मुझे इसका पछतावा नहीं है, कतई कोई पछतावा नहीं है.’ उन्होंने कहा, ‘मैं इस बात को दोहरा रहा हूं कि मनमोहन सिंह बेहतरीन व्यक्तियों में से एक हैं और प्रधानमंत्री पद के काबिल व्यक्ति हैं. नेहरूजी और इंदिराजी के बाद, वे तीसरे ऐसे व्यक्ति होंगे, जो प्रधानमंत्री के रूप में दूसरा कार्यकाल पूरा करेंगे, इसलिए कोई पछतावा नहीं है.’
प्रणब मुखर्जी ने इस बात को रेखांकित किया कि राष्ट्रपति का पद ऐसा है कि यह ‘मांगा’ नहीं जाता, बल्कि इसकी ‘पेशकश’ की जाती है. उन्होंने कहा, ‘निजी तौर पर, मैं अभी भी यह विश्वास करता हूं कि इस पद की पेशकश की जाती है, यह मांगा नहीं जाता.’
पश्चिम बंगाल के एक गांव से ताल्लुक रखने वाले 77 वर्षीय पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति पद के चुनाव में उनका नामांकन यह दर्शाता है कि देश में ‘कोई भी’ इस सर्वाधिक उच्च संवैधानिक पद को हासिल कर सकता है.
उन्होंने विपक्ष समर्थित उम्मीदवार पीए संगमा की 19 जुलाई को होने वाले चुनाव से पूर्व उनके साथ बहस करने के आह्वान को खारिज कर दिया.
प्रणब मुखर्जी ने कहा, ‘मुद्दा बहस के बारे में नहीं है. बहस किस बात पर हो ? राष्ट्रपति एक प्रमुख का पद है. बहस उन मुद्दों पर होती है जिनका फैसला राजनीतिक दलों द्वारा किया जाता है. वे ऐसे मुद्दों को मतदाताओं और राजनीतिक दलों के नेता के समक्ष रखते हैं जो सरकार का गठन करते हैं या प्रधानमंत्री बनते हैं, ऐसे मुद्दों पर बहस होती है.’
उन्होंने कहा, ‘भारतीय राष्ट्रपति नीति निर्धारण नहीं करता. यहां राष्ट्रपति नीति निर्माता नहीं है. राष्ट्रपति के नाम पर कैबिनेट नीतिगत निर्णय लेती है.’
संगमा को एक ‘प्रतिभावान व्यक्ति’ बताते हुए मुखर्जी ने कहा, ‘हां, मैं उन्हें प्यार करता हूं.’