नक्सलवाद के उदय के लिए खराब शासन को जिम्मेदार ठहराते हुए पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लै ने कहा है कि यह देश के लिए खतरे की घंटी है.
पिल्लै ने कहा, ‘माओवाद या नक्सलवाद देश के लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है. आज मैं सोचता है कि भारत के राजनीतिक दलों को इस समस्या की गंभीरता का एहसास नहीं है.’ उन्होंने कहा, ‘वे इस तथ्य को नहीं समझ पाए हैं कि यह एक गंभीर समस्या है जिसे न केवल सुरक्षाबलों द्वारा, विकास द्वारा बल्कि स्थिति के गंभीर राजनीतिक प्रबंधन द्वारा सुलझाया जाना है.’ वे गुरुवार को एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे.
जीके पिल्लै ने खराब शासन को नक्सलवाद के उदय के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, ‘कई मूलभूत विकास मुद्दे हैं जिन्हें हम लंबे समय तक अनसुलझे छोड़ देते हैं और ऐसे में यह लोगों को अन्य रास्ते चुनने के लिए बाध्य करता है एवं नक्सलवाद सिर उठाता है. हमारे पास शासन के गंभीर मुद्दे हैं.’
पूर्व गृह सचिव ने कहा, ‘यह लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है, यह राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के लिए खतरे की घंटी है. शिक्षकों, डॉक्टरों और नर्सों की कमी है और आपको इन सभी मोर्चे पर एक साथ कदम उठाना है, यदि आप ऐसा नहीं करते तो आप मुश्किल में पड़ जाते हैं.’