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एक साल में निर्णय होकर मंदिर बनने लगेगा: सिंघल

विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष अशोक सिंघल का नाम संघ परिवार की ओर से चलाए जा रहे राम मंदिर आंदोलन के साथ पर्यायवाची की तरह है. विवादित स्थल के मालिकाने को लेकर चल रहे मुकदमे पर फैसले का उन्हें इंतजार भी है और अगर फैसला मंदिर के खिलाफ गया तो उनकी सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी भी है.

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विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष अशोक सिंघल का नाम संघ परिवार की ओर से चलाए जा रहे राम मंदिर आंदोलन के साथ पर्यायवाची की तरह है. विवादित स्थल के मालिकाने को लेकर चल रहे मुकदमे पर फैसले का उन्हें इंतजार भी है और अगर फैसला मंदिर के खिलाफ गया तो उनकी सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी भी है, लेकिन वे बार-बार कहते हैं कि आस्था का मसला होने के चलते सरकार को इसे कानून बनाकर हिंदुओं को सौंप देना चाहिए. एसोसिएट एडीटर  श्यामलाल यादव से आर.के. पुरम स्थित अपने ऑफिस में बात करते वक्त 84 वर्षीय सिंघल ने अयोध्या विवाद से ''राजनैतिक फायदा उठाने'' के लिए भाजपा को ''भूल स्वीकार'' करने की नसीहत दी तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तारीफ करने से भी नहीं चूके. बातचीत के अंशः

आपने जनजागरण अभियान शुरू किया है. मालिकाने पर फैसला आने वाला है. क्या लड़ाई निर्णायक मुकाम पर पहुंच रही है?

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कोर्ट के फैसले को हम अंतिम समाधान नहीं मानते. हाइकोर्ट का फैसला होगा, फिर सुप्रीम कोर्ट में जाएगा. इसका अंतिम समाधान संसद के माध्यम से ही होगा. यह स्थान हिंदू समाज के सुपुर्द किया जाए, ऐसा निर्णय जब आम सहमति से संसद में हो जाएगा तो मेरी समझ् से वही इसका अंतिम समाधान होगा. निर्णय आएगा तो सुप्रीम कोर्ट में जाएगा. यह जरूर है कि सुप्रीम कोर्ट में ज्‍यादा वक्त नहीं लगेगा. पूरे देश की भावना है कि भगवान जो कपड़े के मंदिर में बैठे हैं, वह उनके लिए सम्मानजनक स्थान नहीं है. इसलिए उन्हें सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए भव्य मंदिर बनना चाहिए. जहां रामलला बैठे हैं, वही स्थान राम जन्मभूमि है और वहीं पर मंदिर बनना चाहिए, यह बात हमारे संतों ने कही है. उन्होंने यह भी कहा है कि हमने ब'त वर्ष पहले एक मॉडल तैयार किया था, वह नागर शैली का था. सोमपुरा जी ने तैयार किया था उसे. उसी आधार पर पत्थरों की गढ़ाई का काम लगभग ६० फीसदी कार्यशाला में पड़ा हुआ है. संतों का कहना है कि मंदिर उन्हीं पत्थरों से बनना चाहिए. वे इसी के लिए बनाए गए हैं.

मंदिर के साथ मस्जिद बनाने के किसी फार्मूले पर बात बन सकती है?

नित्य की लड़ाई हमें नहीं चाहिए. वहां मंदिर भी रहे और मस्जिद भी रहे, यह नित्य की लड़ाई है. अयोध्या सिर्फ राम जन्मभूमि ही नहीं, यह बड़ा तीर्थ है. भगवान राम इक्ष्वाकु वंश में हुए. इसी वंश में महात्मा बुद्ध हुए. इसी वंश में गुरुनानक हुए. हमने बड़ा संत सम्मेलन किया था कुंभ में. हमारी उच्चाधिकार समिति ने प्रस्ताव पास किया कि मंदिर संसद के कानून से बने और वहीं बने. उन्हीं पत्थरों से बनेगा और वहां कोई मस्जिद नई नहीं बनाई जाएगी. लाखों मंदिरों में करोड़ों लोग संकल्प ले रहे हैं कि संसद में कानून बनाकर मंदिर बनाया जाए. प्रजातंत्र की गरिमा रखने के लिए यह जरूरी है कि जनमत को देखते हुए संसद में कानून बनाकर मंदिर बनवाया जाए.{mospagebreak}

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लेकिन इस मसले के फिर से राजनीतिकरण का खतरा नहीं है?

देखिए, यह कार्यक्रम संतों ने तय किया है. यह वोट का विषय नहीं है. यह राष्ट्रीय विषय है. किसी को राजनैतिक माइलेज इसमें नहीं लेना चाहिए. यह राजनैतिक माइलेज का विषय नहीं है. राम जन्मभूमि पर मंदिर बनना विश्व शांति के लिए जरूरी है.

कानून बनाकर जन्मस्थान पर मंदिर बनवाने की यह मांग कभी पालमपुर में भाजपा ने उठाई थी. लेकिन सरकार में आने पर उससे मुकर गई. इस समय आपकी इस मांग में वह साथ है?

उनको यह नहीं करना चाहिए था. उनको अपनी यह भूल स्वीकार करनी ही पड़ेगी, ऐसा मेरा मानना है. भूल स्वीकार करनी पड़ेगी क्योंकि राम को सत्ता का विषय बनाना... वोट का विषय बनाना... और जन्मभूमि के लिए कुछ नहीं करना... वे अपने अंतःकरण से पूछें कि क्या यह ठीक है? अगर ऐसी भूल उनसे हुई है तो उन्हें इस भूल को स्वीकार कर लेना चाहिए, ऐसा मानना है.

क्या पूरा संघ परिवार इस लड़ाई में आपके साथ है?

केवल संघ परिवार ही नहीं, सारा संत समाज है. जितने बड़े साधु-संत हैं, वे शुरू से हमारे आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं. वे हमारे आंदोलन में हैं, ऐसा नहीं कह सकते, लेकिन जो कार्यक्रम हमने लिए हैं, उनमें सब संत, सारे हिंदू संगठन हमारे साथ हैं. संघ परिवार तो है ही. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तो इस पूरे प्रकरण में शुरू से ही जुड़ा हुआ है. हम लोगों ने पहले ११ करोड़ हस्ताक्षर संग्रह किए. वह सिर्फ हस्ताक्षर नहीं, एक संकल्प है.{mospagebreak}

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और भाजपा भी आपके साथ है?

भाजपा भी हिंदू के नाते से इसमें शामिल होगी, इसका मुझे पूरा विश्वास है. राजनैतिक दल के नाते नहीं, एक हिंदू के नाते वह जरूर शामिल होगी. भाजपा में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं. हनुमान को सभी मानते हैं. मैं कहता हूं कि भाजपा ही नहीं, चाहे बसपा में हों, सपा में हों, कांग्रेस में हों या कहीं और सब को समर्थन करना चाहिए.

संसद में कानून बनाने की मांग से लगता है कि हाइकोर्ट के फैसले की या तो आपको परवाह नहीं है या फिर फैसला अपने खिलाफ आने का डर है.

हाइकोर्ट का फैसला आएगा. पक्ष में आएगा तो लोग आनंद मनाएंगे. खिलाफ आए तो लोग सड़कों पर संघर्ष के लिए न खड़े हों. हिंदू समाज के जो संस्कार हैं उसको देखते हुए वे एक मर्यादा में रहकर ही आनंद मनाएंगे और प्रतिकूल आता है तो भी संयत रहते हुए कार्यक्रम चलाने चाहिए.

आपको लगता है कि कानून बनाकर जमीन देने की मांग पर सरकार विचार करेगी?

देखिए, रामसेतु का मसला आया तो वह भी जनशक्ति के आधार पर सुलटा है. सुप्रीम कोर्ट में मामला गया तो न्यायाधीशों को लगा कि यह बड़ा गंभीर विषय है और इसलिए उन्होंने उसका रास्ता निकालने की कोशिश की और रास्ता निकला. रामसेतु तोड़कर अब भविष्य में जल परिवहन वालों को नहीं दिया जा सकता. अमरनाथ का श्राइन बोर्ड का जो मसला आया वहां भी जनशक्ति के दबाव में ही १०० एकड़ जमीन वापस करनी पड़ी. हिंसक संघर्ष में हमारा विश्वास नहीं है. मुसलमान शांतिप्रिय है. जितना मुसलमान है, सब शांतिप्रिय है. लेकिन उनका अपहरण कर लिया है जेहादियों ने. यह संकट मुसलमानों के सामने है. जेहादियों के डर से ही कोई उदारवादी मुसलमान भी यह नहीं कह सकता कि तीन मंदिर हिंदुओं को दे दो. जेहादियों की वजह से ही भगवान कपड़े के मंदिर में बैठे हैं. कोई उदारवादी मुसलमान बोले तो तुरंत ही हिटलिस्ट में आ जाएगा. सब को विचार करना चाहिए कि अब परस्पर मधुर संबंधों का समय आया है.{mospagebreak}

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अगर हाइकोर्ट ने आपके प्रतिकूल फैसला दिया तो क्या सुप्रीम कोर्ट जाएंगे?

जाएंगे. जरूर जाएंगे.

रामसेतु की तरह और श्राइन बोर्ड मसले की तरह आपके जन दबाव के सामने सरकार इस मामले में भी झुकने वाली है?

इसे जन दबाव मत कहिए, जनशक्ति कहिए. हरेक सामान्य सांसद के अंतःकरण में राम हैं. एक भव्य मंदिर बनना चाहिए, हर कोई चाहेगा, ऐसा मेरा मानना है. मंदिर आम सहमति से बनना चाहिए. लेकिन समझैते से नहीं हो सकता. समझैते की कोई गुंजाइश रह नहीं गई है. बड़ी कोशिश की हम लोगों ने, नहीं हो पाया.

तो मामला निर्णायक मुकाम पर है?

एक ही रास्ता है संसद में कानून बनाने का. यह होगा. मेरा तो विश्वास है कि एक साल भर में सब बातें निर्णय होकर मंदिर बनने लग जाएगा.

आपने प्रधानमंत्री से मिलकर ऐसा अनुरोध किया है?

मैंने गंगा के बारे में चिट्ठी लिखी थी, उन्होंने निर्णय भी किया है. मुझे तो बहुत आनंद हुआ है. उनको एक चिट्ठी लिखी है, उत्तर भी आया है. मंदिर के बारे में भी मैंने उनको चिट्ठी लिखी है कि ऐसा निर्णय हमारा हुआ है. उनका जवाब आया है कि चिट्ठी मिल गई है. मनमोहन सिंह जी ने अगर गंगा के विषय में यह सब किया है तो मेरा मानना है कि वे राम जन्मभूमि के बारे में भी जरूर करेंगे.

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