रामलीला मैदान में अन्ना हजारे के नेतृत्व में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान भी कुछ लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में फैले भ्रष्टाचार से रू-ब-रू होना पड़ रहा है.
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इस आंदोलन के दौरान अन्ना के नाम की टोपियां बना कर कमाई करने वाले हरीश ने बताया, ‘आप किस भ्रष्टाचार की बात कर रहे हैं. यह लोग कहते हैं कि यहां आने वाले हर व्यक्ति को मुफ्त में खाना और पानी बांटा जा रहा है. कल मुझसे खाने के एवज में दो टोपियां मुफ्त में मांगी गयीं. क्या यह भ्रष्टाचार नहीं है?’
हरीश किताबों में जिल्द लगाने का अपना धंधा छोड़ कर यह टोपियां बेच रहे हैं. यहां तिरंगा झंडा बेचने आए सोनू को भी कुछ ऐसा ही अनुभव हुआ. बिहार राज्य के निवासी सोनू ने बताया कि कल रात सोते वक्त किसी ने उनके 20 झंडों की पूरी गांठ ही चुरा ली.
राजस्थान की निवासी रामदयी ने बताया लोग यहां भी मोल-तोल करने से नहीं कतराते. उन्होंने बताया कि लोग 10 रुपये की टोपी में भी छूट मांगते हैं.
अन्ना के आंदोलन पर विशेष कवरेज
हालांकि इन लोगों का यह भी कहना है कि इन सब मुश्किलों के बावजूद भारी संख्या में लोगों के मौजूद होने से यहां से अच्छी कमाई हो रही है. यहां टोपियां बेचने वाली सोनम बताती हैं, ‘मैंने अब तक 10-10 रुपए की 500 टोपियां बेची हैं. यह तो दिन की शुरुआत के वक्त की बात है. शाम में और लोगों के आने पर बिक्री दोगुनी हो जाती है. मैं रोज एक हजार से अधिक टोपियां बेच लेती हूं.’
नींबूपानी बेचने वाले पृथ्वी ने बताया कि उन्हें पहले कभी 500 रुपये से अधिक की कमाई नहीं हुई, लेकिन अब रोज 1500 रुपयों की कमाई हो जाती है.
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उधर इस सबसे परेशान हो चुके पुलिसकर्मियों का कहना है कि वह चाहते हैं कि यह सब जल्द खत्म हो. पुलिस के एक कांस्टेबल ने कहा, ‘पिछले 10 दिनों से मैं इस पीसीआर वैन में बैठे रहने के सिवा कुछ नहीं कर रहा हूं. अब बहुत हो गया. कम से कम एक पक्ष को तो अब पीछे हटना चाहिए.
यहां पर अपने परिवार के साथ आए रामपाल ने कहा कि यहां सबसे बड़ी समस्या शौचालय है. हालांकि यहां मौजूद 73 वर्षीय नीलिमा शर्मा का कहना है कि सभी मुश्किलों के बावजूद लोग इस आंदोलन में डटे रहेंगे.