अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में आत्मघाती धमाके की खबर है. अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के अफगानिस्तान दौरे से लौटते ही ब्लास्ट की आवाज सुनी गई.
जानकारी के मुताबिक काबुल के जलालाबाद रोड पर आत्मघाती धमाका किया गया. धमाके के तुरंत बाद अमेरिकी दूतावास को अलर्ट कर दिया गया है.
इससे पहले, दुनिया के सबसे बड़े आतंकवादी ओसामा बिन लादेने के मारे जाने की पहली बरसी पर अमेरिकी राष्ट्रपति अफगानिस्तान पहुंचे. अचानक हुए इस दौरे में ओबामा ने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति के साथ एक समझौते पर दस्तखत किए.
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनके अफगान समकक्ष हामिद करजई ने मंगलवार रात काबुल में एक ऐतिहासिक सामरिक भागीदारी समझौते पर दस्तखत किए. दस पन्ने के इस समझौते में अमेरिका ने कहा है कि वह 2014 में अफगानिस्तान में नाटो बलों का अभियान खत्म होने के बाद भी काबुल का समर्थन करता रहेगा.
जिस धरती से अमेरिका के सबसे बड़े इंतकाम का खाका खींचा गया, अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा उसी सरजमीं पर पूरी दुनिया को उस जीत की याद दिलाने आए.
बिना किसी पूर्व निर्धारित योजना के बीती रात ओबामा काबुल पहुंचे. चंद घंटों बाद अफगानिस्तान के बगराम एयरबेस से अमेरिकी नागरिकों को संबोधित किया. ओसामा की बरसी पर उस इंतकाम की याद दिलाय़ी जो ठीक एक साल पहले पूरा हुआ था.
जिस बगराम एयरबेस से ओबामा ने अमेरिकी नागरिकों को संबोधित किया, उसी एयरबेस पर ओसामा के मारे जाने की पूरी प्लानिंग रची गई थी. 1 मई, 2011 को इसी एयरबेस से ओसामा के खात्मे के लिए नेवी सील कमांडो ने उड़ान भरी थी.
उसी इंतकाम की याद दिलाते हुए ओसामा की पहली बरसी पर ओबामा ने अफगानिस्तान से दोस्ती को और मजबूत करने का भरोसा दिलाया.
बराक ओबामा ने कहा, मैं अफगानिस्तान आया हूं, क्योंकि ये दोनों देशों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है. मैं दोनो देशों के बीच संबंध को और मजबूत बनाने और 10 सालों में अमेरिका और अफगानिस्तान के लोगों ने जो बलिदान दिया है, उसके लिए धन्यवाद करने यहां आया हूं. मैं दोनों देशों के बेहतर भविष्य की कामना करता हूं.
इस मौके को औऱ खास बनाने के लिए ओबामा ने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति के साथ आतंकवाद के खिलाफ साझा अभियान पर एक समझौता भी किया. ये भी भरोसा दिलाया कि 2014 में नाटो सेना के हटने तक अफगानी फौज खुद इतनी ताकतवर हो चुकी होगी कि वो देश की हिफाजत कर सके.
ओबामा ने एक साथ कई निशाने साधे हैं. अमेरिका में जल्द ही चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में एकाएक अफगानिस्तान आकर उन्होंने अमेरिकी नागरिकों को 10 पुराने इंतकाम के पूरा होने की याद दिलाई. ये भी जता दिया कि जल्द ही अमेरिका युद्ध का बोझ अपने कंधे से उतार फेंकने वाला है. दूसरी तरफ अफगानिस्तान से समझौता कर उन्हें ये भरोसा दिलाया कि अमेरिका उन्हें मजधार में छोड़कर नहीं जा रहा.