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नूपुर तलवार को सुप्रीम कोर्ट से राहत, गिरफ्तारी पर रोक

आरुषि-हेमराज हत्‍याकांड में आरोपी नूपुर तलवार को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत मिल गई है. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है.

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आरुषि-हेमराज हत्‍याकांड में आरोपी नूपुर तलवार को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत मिल गई है. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है.

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि जब तक यह मामला कोर्ट में है, उनकी गिरफ्तारी नहीं की जाए. याचिका की सुनवाई कर रही बेंच ने मामला चीफ जस्टिस को सौंप दिया. इससे पहले सीबीआई की नजरों से बचती आ रही नूपुर तलवार सुप्रीम कोर्ट में हाजिर हो गईं.

नूपुर तलवार की गिरफ्तारी के लिए सीबीआई ने बीती रात 10 ठिकानों पर छापे मारे. हरियाणा में भी छापेमारी की गई, पर सीबीआई नूपुर को गिरफ्तार नहीं कर सकी.

आरुषि-हेमराज हत्याकांड में सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की ओर टिकी रहीं. गिरफ्तारी से बचने के लिए नूपुर तलवार ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई, जिसपर शुक्रवार को सुनवाई हुई.

वैसे सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को नूपुर तलवार के वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि नूपुर कहीं भागी नहीं हैं. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर तलवार की गिरफ्तारी पर रोक नहीं लगाई है.

गौरतलब है कि मृतक आरुषि की मां नुपुर तलवार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अपने खिलाफ जारी वारंट पर रोक लगाए जाने की मांग की. न्यायमूर्ति ए.के. पटनायक एवं न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की खंडपीठ ने कहा कि चूंकि यह मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं है, इसलिए इस पर शुक्रवार को सुनवाई होगी.

गाजियाबाद की अदालत से गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद सीबीआई नूपुर तलवार की तलाश में है, लेकिन वे अब तक गिरफ्तार नहीं की जा सकी है.

नुपुर ने गुरुवार को अपने वकील के जरिए न्यायालय में यह कहते हुए अर्जी दाखिल कराई कि चूंकि उनकी समीक्षा याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय 27 अप्रैल को सुनवाई करने वाला है, इसलिए वह बुधवार को न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं हो सकतीं.

नूपुर ने अपनी अर्जी में न्यायालय से कहा कि न तो मामले की प्रारम्भिक जांच करने वाली उत्तर प्रदेश पुलिस और न ही सीबीआई ने उन्हें अभियुक्त माना. उन्होंने कहा कि निचली अदालत के मजिस्ट्रेट ने उन्हें अभियुक्त माना है और उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है.

मजिस्ट्रेट के न्यायालय में पेश होने पर अपनी गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए नूपुर ने कहा कि मामले में नई जांच करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि जांच एजेंसी पहले ही अपनी अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है. उन्होंने कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा यदि नए सिरे से जांच कराई जाती है तो किसी को कोई लाभ नहीं होगा.

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