आज वर्ल्ड हेरिटेज डे यानी विश्व धरोहर दिवस है. विश्व के धरोहरों और ऐतिहासिक विरासतों के सम्मान में इसे मनाया जाता है. पूरी दुनिया में फिलहाल 1052 विश्व धरोहर स्थल हैं.इनमें से 36 विश्व धरोहर स्थल भारत में हैं.
नालंदा यूनिवर्सिटी, बिहार : तक्षशिला के बाद नालंदा को दुनिया की दूसरी सबसे प्राचीन यूनिवर्सिटी
माना जाता है. इस यूनिवर्सिटी में सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि कोरिया, जापान,
चीन, ईरान, मंगोलिया सहित कई दूसरे देशों के स्टूडेंट्स भी पढ़ाई के लिए
आते हैं.
कंचनजंघा नेशनल पार्क, सिक्किम : कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना वर्ष 1977 में की गई थी. सिक्किम में
यह सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है और सिक्किम के उत्तरी जिले में 850 वर्ग
किमी क्षेत्र में फैला है.
कैपिटल कॉम्प्लेक्स, चंड़ीगढ़ :
चंड़ीगढ़ का कैपिटल कॉम्प्लेक्स इस सूची में जगह बनाने वाला 17वां ऐसा
स्थान है जिसे फ्रेंच स्विस आर्किटेक ली कोर्बुजियर ने डिजाइन किया था.
काजीरंगा नेशनल पार्क :
असम की इस जगह को यूनेसको (UNESCO) ने 1985
में वर्ल्ड हेरिटेज साइट की लिस्ट में शामिल कर लिया था. इस राष्ट्रीय
उद्यान को खतरे में आई गैंडों की प्रजाति को बचाने के लिए 1908 में स्थापित
किया गया था.
हम्पी :
कर्नाटक के हम्पी में तुंगभद्रा नदी के किनारे कई
पुरातात्विक स्मारक हैं. इन स्मारकों के समूह को भी सांस्कृतिक महत्व के
चलते वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किया गया है.
जंतर मंतर :
जयपुर का जंतर मंतर पुरातात्विक एस्ट्रोनॉमिकल
उपकरणों की वजह से जाना जाता है. इसे महाराजा जय सिंह ने बनवाया था. UNESCO
ने इसे सांस्कृतिक महत्व की वजह से वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किया.
हुमांयू का मकबरा :
मुगल शासक हुमांयू का मकबरा 1570 में उनकी बेगम
बीगा (हाजी बेगम) ने दिल्ली में बनवाया था. UNESCO ने इसे 1993 में विश्व
पुरातात्विक धरोहर घोषित कर दिया था.
ऐलोरा की गुफाएं :
ऐलोरा की गुफाओं में बौद्ध, हिंदू और जैन
संस्कृति का मेल देखने को मिलता है. ये महाराष्ट्र में हैं. इन गुफाओं में
600 to 1000 ईसवी की कला झलकती है. ये सासंकृतिक विरासत भी वर्ल्ड हेरिटेज
साइट का हिस्सा है.
फतेहपुर सीकरी :
फतेहपुर सीकरी 16वीं शताब्दी में बनवाया गया. यह
शहर 14 साल तक मुगल शासको की राजधानी रहा. यहां बुलंद दरवाजा, शलीम चिश्ती
की दरगाह, पांच महल जैसी कई खुबसूरत और ऐतिहासिक इमारतें हैं. इसलिए
फतेहपुर सीकरी को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किया गया है.
रेलवे लाइंस : UNESCO ने दार्जिलिंग हिमालय रेलवे, पश्चिम बंगाल
(1999), नीलगिरि माउन्टेन रेलवे, ऊटी (2005) और कालका-शिमला रेलवे (2008)
को विश्व की प्राकृतिक पुरातात्विक धरोहरों में शामिल किया है.
कुतुब मीनार: कुतुब मीनार को बनवाने की शुरुआत 1192 में
कुतुबुद्दीन ऐबक ने करवाई थी. बाद में इसे इल्तुतमिश और अलाउद्दीन खिलजी ने
भी बनवाया. इस मीनार की लम्बाई 238 फुट है. UNESCO ने इसकी बेहतरीन बनावट
के लिए इसे वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किया.
मानस वाइल्ड लाइफ सेंचुरी: 'मानस वाइल्ड लाइफ सेंचुरी', असम
120,000 एकड़ में फैली है. यह मानस नदी के मैदानों पर है. इसे 1985 में
विश्व पुरातात्विक धरोहर घोषित कर दिया गया था.
महाबोधी मंदिर: सम्राट अशोक ने पहला मंदिर, महाबोधी मंदिर
बनवाया था. इस मंदिर का निर्माण बिहार के बोध गया में 260 ई.पू. करवाया गया
था. यह वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में सांस्कृतिक और पुरातात्विक महत्व से
शामिल किया गया है.
केवलादेव नेशनल पार्क : विश्व पुरातात्विक धरोहर में शामिल
केवलादेव नेशनल पार्क राजस्थान के भरतपुर में है. यह नेशनल पार्क सिंध-गंगा
के मानसून जंगल में 6,880 एकड़ में फैला है. यहां पक्षियों की 364
प्रजातियां देखने को मिलती हैं. इसे 1986 में वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित
किया गया.
ऐलिफेंटा गुफाएं: ऐलिफेंटा गुफाएं महाराष्ट्र के ऐलिफेंटा द्वीप
पर है. यह द्वीप अरब सागर पर बसा है. इनमें गुफाओं के 2 ग्रुप हैं. पहले
समूह में 5 बड़ी हिंदू गुफाएं हैं और दूसरे ग्रुप में 2 छोटी बौद्ध गुफाएं
हैं. ये गुफाएं 1970 में दोबारा बनवाई गईं औ 1987 में ऐलिफेंटा गुफाएं
पुरातात्विक धरोहर बन गईं.
गोवा के चर्च: 15वीं और 16वीं शताब्दी में पुर्तगाली भारत आए और
उन्होंने देश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में एक शहर बसाया जिसका नाम है
गोवा. उस समय पुर्तगालियों ने गोवा में कुछ चर्च और कॉन्वेंट भी बनवाए जो
वर्ल्ड हेरिटेज साइट की लिस्ट में शामिल हैं.
जैन सेंचुरी : कर्नाटक के बगलकोट जिले में पत्तदकल के स्मारक हैं.
यहां 9 मंदिरों के साथ उत्तरी कर्नाटक में जैन सेंचुरी को 1987 में UNESCO
ने पुरातात्विक धरोहर घोषित किया था.
छत्रपति शिवाजी टर्मिनल: मुंबई का छत्रपति शिवाजी टर्मिनल एक
ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन है. इस स्टेशन को फेडरिक विलियम स्टीवन ने डिजाइन
किया था. इसे बनने में 10 साल लगे और इसका नाम विक्टोरिया टर्मिनस रखा गया.
यह 1887 में बनकर तैयार हुआ. 1996 में शिव सेना की मांग पर इसका नाम
छत्रपति शिवाजी टर्मिनस. जुलाई 2004 में इसे वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल
किया गया.
अजंता की बौद्ध गुफाएं: महाराष्ट्र में अजंता की बौद्ध गुफाएं 2
चरणों में बनवाई गईं. पहले ई.पू दूसरी सदी में ये गुफाएं बनी थी. फिर ई.पू
5वीं और 6वीं सदी के गुप्त काल में इन गुफाओं को बनवाया गया. ये गुफाएं
अद्भुत चित्रकारी से सजी हैं. अजंता की गुफाएं भी पुरातात्विक धरोहर हैं.
भीमबेटका: भीमबेटका नेचुरल रॉक शेल्टर मध्यप्रदेश की विंध्य पर्वत
श्रंखलाओं पर बने हैं. ये 25,400 में फैले हैं. यह रॉक शेल्टर 1957 में
खोजे गए. इन पत्थरों की गुफाओं पर बने चित्र मध्य पाषाण के इतिहास को
दर्शाता है. 2003 में UNESCO ने इन पत्थरों के घरों को पुरातात्विक धरोहर
घोषित किया था.
राजस्थान के किले: राजस्थान अपने आलीशान किलों के लिए जाना जाता
है. इनमें से रणथम्बोर का किला, जैसलमेर का किला, चितौड़गढ़ का किला और
आमेर का किला वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किए गए हैं.
वैली ऑफ फ्लॉवर :
उत्तराखंड के चमोली में वैली ऑफ फ्लॉवर नेशनल
पार्क और नंदा देवी नेशनल पार्क की प्राकृतिक खूबसूरती को देखते हुए UNESCO
ने इन्हें वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया है.
चोल शासन के मंदिर:
तमिलनाडु के ऐरावतेश्वर मंदिर, दारासुरम और
बॄहदेश्वर मंदिर, तंजावुर और गंगईकोंडा वर्ल्ड हेरिटेज साइट का हिस्सा हैं.
इन महान चोल मंदिरों को चोल शासक राजाराज चोल (प्रथम) ने 1003-1010 ई. में
बनवाया था.
खजुराहो:
मशहूर खजुराहो मंदिरों के समूह चंदेल राजाओं ने बनवाए
थे. इस समूह में 85 मंदिर बनवाए गए थे जिनमें से 22 बचे है. इन मंदिरों की
कलाकृतियां के जरिए 10वीं शताब्दी में चंदेलों के समय को देखा जा सकता है.
ये अक्टूबर 1982 में कला और कारीगरी की वजह से वर्ल्ड हेरिटेज साइट में
शामिल किए गए.
आगरा का किला:
16वीं शताब्दी में अकबर ने आगरा का किला बनवाना
शुरू किया और 18वीं शताब्दी औरंगजेब ने इसे पूरा करवाया. शाहजाहां ने भी
इसका कुछ हिस्सा बनवाया था. यह किला 1982 में वर्ल्ड हेरिटेज साइट बना.
हिमालय नेशनल पार्क:
हिमाचल प्रदेश का ग्रेट हिमालय नेशनल पार्क
754.4 स्क्वायर किलोमीटर में फैला है. यह हिमाचल के कुल्लू में है. ग्रेट
हिमालय नेशनल पार्क भी विश्व की प्राकृतिक पुरातात्विक धरोहरों में शामिल
है.
ताज महल:
दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताज महल भी विश्व
पुरातात्विक धरोहर है. यह मुगल शासक शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की याद
में बनवाया था. इसे बनने में 16 साल लगे थे.
सहयाद्रि पर्वत:
पश्चिमी घाट को सहयाद्रि पर्वत के नाम से भी जाना
जाता है. यहां कुल 39 ऐसी जगह हैं जिनमें नेशनल पार्क, वाइल्ड लाइफ
सेंचुरी और रिजर्व जंगल हैं, जिन्हें UNESCO ने वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित
किया है. इनमें 20 केरल में, 5 तमिलनाडु में, और 4 महाराष्ट्र में हैं.
कोणार्क का सूर्य मंदिर:
कोणार्क का सूर्य मंदिर भी पुरातात्विक
धरोहर है. यह राजा नरसिंहादेव ने बनवाया था. इस मंदिर को सूर्य देव के रथ
के रूप में बनाया गया है, जिसमें भगवान सूर्य और 24 पहिए हैं. यह मंदिर
पत्थरों पर की गई नक्कासी से सजा हुआ है. इसे 1984 वर्ल्ड हेरिटेज साइट में
शामिल किया गया था.
सुंदरवन नेशनल पार्क:
पश्चिम बंगाल का सुंदरवन नेशनल पार्क टाइगर रिजर्व के लिए जाना जाता है. ये भी विश्व की प्राकृतिक पुरातात्विक धरोहरों में शामिल है.
लाल किला:
दिल्ली का लाल किला 17वीं शताब्दी में 5वें मुगल शासक
शाहजहां ने बनवाया था. इसे भी विश्व पुरातात्विक धरोहर घोषित किया गया है.
लाल किले के अंदर 'दीवान-ए-आम', 'दीवान-ए-खास' जैसे कई आलीशान हिस्से हैं.
सांची स्तूप:
मध्यप्रदेश के सांची स्तूपों से तो हर कोई वाकिफ है.
यह बौद्ध स्मारक 200 से 100 ई.पू. मौर्य सम्राट अशोक ने बनवाए थे. यह
जनवरी 1989 में सांस्कृतिक महत्वता के चलते वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल
किए गए. इन स्तूपों की खोज 1818 में हुई.
रानी की वाव:
UNESCO ने गुजरात के पाटन में बनी रानी की वाव को भी विश्व पुरातात्विक धरोहरों में शामिल किया है.
महाबलीपुरम :
चेन्नई से 58 किलोमीटर दूर महाबलीपुरम में पल्लव
राजाओं ने 7वीं से 8वीं सदी में कई मंदिर बनवाए थे. UNESCO ने महाबलीपुरम
में बने मंदिरों के समूह को 1984 में पुरातात्विक धरोहर घोषित किया.
चंपानेर-पावागढ़ :
गुजरात का चंपानेर-पावागढ़ आर्कियोलॉजिकल पार्क 2004 में पुरातात्विक धरोहर घोषित किया गया था.
आपको बता दें कि अहमदाबाद को यूनेस्को ने विश्व की धरोहरों में शुमार किया है. अब यह शहर पेरिस, विएना, कैरो, ब्रुसेल्स, रोम व एडिनबर्ग की श्रेणी में शामिल हो गया है.