शेर तेजी से पहले विलुप्त होती प्रजातियों में शामिल है. हालांकि अब एक नई उम्मीद सामने आई है. (प्रतीकात्मक फोटो:getty)
वैज्ञानिकों ने शेर के पहले टेस्ट ट्यूब कब यानी बच्चों को पैदा करने में सफलता पा ली है.
ये बच्चे स्वस्थ हैं और अपने आस पास के एनवायरनमेंट में तेजी से बड़े हो रहे हैं.
यूनिवर्सिटी ऑफ प्रिटोरिया(University of Pretoria) के वैज्ञानिकों ने आईवीएफ तकनीक से इन बच्चों को जन्म देने में सफलता पाई है.
आपको बता दें कि एक शेर के स्पर्म को मादा शेरनी के गर्भाश्य में डाला गया था. इसके साढ़े 3 महीने बाद उसने साउथ अफ्रीका के उकुटुलु कजर्वेशन सेंटर (Ukutulu Conservation Centre) में 2 स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया है.
इनमें से एक मादा शेरनी और एक शेर है.
यह तकनीक शेर के अलावा टाइगर और स्नो लेपर्ड को बचाने में भी कारगर हो सकती है.
इन बच्चों का इंस्टिट्यूट में खास ख्याल रखा जा रहा है.
आपको बता दें कि एशिया में सिर्फ 4 हजार के आसपास टाइगर की आबादी बची है. सेंट्रल एशिया में 7 हजार से भी कम स्नो लेपर्ड बचे हैं. अफ्रीका के जंगलों में वर्तमान में सिर्फ 18 हजार शेर रह गए हैं. उनको भी बचाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है.
वैज्ञानिकों को उम्मीद है इस तकनीक से एक बार फिर जंगलों में शेर की कुनबा बड़ा हो सकेगा.