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कड़ाहे में 'खौलते पानी में बैठे भक्त प्रह्लाद', जानें क्या है सच्चाई?

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अगर आपने असुर सम्राट हिरण्यकश्यप और उसके विष्णु भक्त बेटे प्रह्लाद की कहानी सुनी होगी तो आपको पता ही होगा कि प्रह्लाद को मारने के लिए हिरण्यकश्यप ने क्या कुछ नहीं किया. यहां तक कि उसे खौलते तेल वाले कड़ाहे में डलवा दिया. लेकिन भक्त प्रह्लाद की जान लेने की तमाम कोशिशें बेकार गईं क्योंकि कहानी के मुताबिक भगवान विष्णु उसे हर बार बचा लेते थे. अंत में प्रह्लाद को जला कर मार डालने के लिए हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की मदद ली. लेकिन हुआ ये कि होलिका खुद जलकर मर गई और भक्त प्रह्लाद का बाल तक बांका नहीं हुआ. बुराई पर अच्छाई की जीत दिखाने वाली ये कहानी लोगों को याद रहे, इसलिए होली से एक दिन पहले होलिका दहन का उत्सव मनाया जाता है.

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अब आप ये सोच रहे होंगे कि होली का पर्व तो अभी बहुत दूर है तो फिर हम आपको आज अचानक होलिका दहन की कहानी क्यों सुनाने लगे. तो इसकी वजह ये है कि सोशल मीडिया पर आज के जमाने के एक भक्त प्रह्लाद के वीडियो ने धूम मचा रखी है. कुछ लोग इस वीडियो को देखकर दांतों तले उंगली दबा रहे हैं तो कुछ लोग अंधविश्वास के इस तमाशे के लिए एक बच्चे को खतरे में डालने पर नाराजगी जता रहे हैं.

वीडियो में दिखता ये है कि बड़े से कड़ाहे में एक बच्चा बैठा है. कड़ाहे के नीचे आग जल रही है. कड़ाहे में रखा पानी उबलता हुआ सा दिखता है. लेकिन कंधे पर भगवा गमछा रखे, माथे पर चंदन लगाए हुए ये बच्चा शांतिपूर्वक बैठा है. ऊपर, एक बोर्ड पर भक्त प्रह्लाद लिखा है और तमाशबीन हैरान होकर ये नजारा देख रहे हैं. कुछ लोग फोटो लेने में लगे हैं तो कुछ लोग भक्ति भाव में प्रणाम भी कर रहे हैं.

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आखिर क्या है इस हैरान करने वाले वीडियो की सच्चाई?

वीडियो की असलियत इस वीडियो के ही भीतर छिपी है. आपको हम इस वीडियो में पांच ऐसी चीजें दिखाएंगे जिसे देखकर आप खुद समझ जाएंगे कि इस बच्चे को महज एक तमाशे के लिए इस्तेमाल किया गया है और पहली नजर में जो लगता है वो सिर्फ नजरों का धोखा है. बस, हम जिन चीजों का जिक्र करें, उसे गौर से देखते जाइए.

पहले कड़ाहे में उबाल मारते पानी पर गौर कीजिए. पानी बच्चे के सामने सिर्फ एक छोटे से हिस्से में उबलता हुआ सा दिखता है. बाकी का हिस्सा फूलों से ढंका है लेकिन वहां कोई हरकत नहीं हो रही है. ऐसा संभव नहीं है कि उसी कड़ाहे में एक जगह तो पानी उबाल मार रहा हो लेकिन बाकी जगह बिल्कुल ठंडे पानी की तरह शांत हो.

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दूसरी बात ये भी देखने की है कि पानी एक छोटे से हिस्से में इतना ज्यादा उबाल मार रहा है जैसे कि नीचे कोई हवा निकालता पाइप लगा हो. उबलते हुए पानी के बुलबुले के बजाए ये कुछ वैसा दिख रहा है जैसा मछलियों के एक्वेरियम में लगा पंप दिखता है. यानि कड़ाहे में कहीं से हवा पंप की जा रही है.

तीसरे नंबर पर अब आइए ये खोजने की कोशिश करते हैं कि कड़ाहे में हवा पंप करने वाली पाइप कहां छिपाई गई है. इसके लिए जब आप बच्चे के पीछे ध्यान से देखेंगे तो आपको पल भर के लिए ये पाइप दिखेगा जो चूल्हे के भीतर की ओर गया है.

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लोगों का ध्यान इस पाइप पर ना जाए, इसलिए इस पाइप को लोहे के उस फ्रेम का हिस्सा बना दिया गया है जिसपर बोर्ड लगाकर भक्त प्रह्लाद लिखा हुआ है. यानि इस फ्रेम के एक तरफ के पाइप को कड़ाहे के अंदर फिट कर दिया गया है और उसी से निकलती हवा की वजह से पानी से इतने तेज बुलबुले उठ रहे हैं.

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चौथी पता करने वाली बात ये है कि अखिर लोहे के कड़ाहे के नीचे जल रही आग तो असली है ना - तो बच्चा आराम से कैसे बैठा है. लगता तो यही है कि आग जलेगी तो कुछ देर में लोहे का कड़ाहा भी गर्म हो जाएगा और पानी भी सचमुच में खौलने लगेगा.

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लेकिन यहां भी एक राज है. कड़ाहे के निचले हिस्से को ध्यान से देखने पर आप पाएंगे कि यहां भी मामला कुछ गड़बड़ है. कड़ाहे का निचला हिस्सा वैसा गोल नहीं है जैसा कि आमतौर पर होता है. निचले हिस्से के शेप देखकर ये लगता कि है कि इसमें एक और लेयर को अलग से जोडा गया है और दोनों लेयर के बीच में खाली जगह है. मकसद ये की आग की गर्मी सीधे कड़ाहे के निचले हिस्से पर ना लगे और वो कम गर्म हो.

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और अंत में पांचवीं बात पता करने की ये है कि ये वीडियो कब और कहां का है?

इंटरनेट पर जब हमने इस वीडियो को खोजा तो पाया ये ये कम से कम दो साल पुराना है और 2019 से ही इंटरनेट पर मौजूद है. वीडियो के बैकग्रांउड में ट्रैफिक का काफी शोर है. साथ ही पास में कहीं बैंड बजने की आवाज सुनी जा सकती है. जहां ये तमाशा हो रहा है वहां पंडाल लगा है और कुछ लोग ऐसी पोशाक में हैं जैसा त्योहारों पर पहनते हैं. वीडियो में ऊंची ऊंची बिल्डिंग्स, किसी कोचिंग का ऐड और अपोलो टायर का एक बोर्ड देखा जा सकता है. यानि ये कोई गांव या कस्बा तो नहीं है. ये किसी शहर में त्योहरों के मौके पर लगा कोई मेला हो सकता है. ये कौन सा शहर है ये अभी हम पक्के तौर पर नहीं कह सकते.

लेकिन इतना तो अब आप भी समझ गए होंगे कि ये भक्त प्रह्लाद की चमात्करिक शक्ति नहीं बल्कि बच्चे को खतरे में डालकर तमाशा दिखाने का खतरनाक खेल है.