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छात्रों का रोड पर खाना-रोड पर सोना, नीतीश राज में अजब बिहार दर्शन

छात्रों का रोड पर खाना-रोड पर सोना, नीतीश राज में अजब बिहार दर्शन
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बिहार के मुख्यमंत्री बिहार दर्शन योजना के तहत किस तरह की लापरवाही हो रही है उसकी बानगी पटना की सड़कों पर देखने को मिली है. रात में सड़क के किनारे ही बच्चे सो गए, लेकिन किसी ने इनके लिए कोई व्यवस्था नहीं की. इन्हें खाना भी सड़क पर ही दिया गया.
छात्रों का रोड पर खाना-रोड पर सोना, नीतीश राज में अजब बिहार दर्शन
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पूर्वी चम्पारण के कोटवा प्रखंड के राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय मच्छरगावां स्कूल के 57 छात्र-छात्राएं मुख्यमंत्री बिहार दर्शन योजना के तहत पहले राजगीर घूमने गए और रात में 11 बजे पटना लौटे.
छात्रों का रोड पर खाना-रोड पर सोना, नीतीश राज में अजब बिहार दर्शन
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छात्रों को रहने की कोई जगह नहीं मिली तो प्राचार्य ने पटना चिड़ियाघर के सामने गेट नम्बर एक के पास सोने के लिए कह दिया. बच्चे रात भर वहीं रहे. (फोटो- फेसबुक)
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मुख्यमंत्री बिहार दर्शन योजना के तहत स्कूल को 20 हजार रुपये मिलते हैं ताकि बच्चों को बिहार के दर्शनीय और ऐतिहासिक स्थलों को दिखाने ले जाया जा सके. अक्सर किसी न किसी जिले से स्कूली बच्चे पटना आते हैं और उसी दिन शाम को लौट जाते हैं. लेकिन इस स्कूल ने दो दिन का कार्यक्रम बनाया था. (फोटो- फेसबुक)
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प्राचार्य आनंद कुमार का कहना है कि उन्हें पटना के बारे में कोई जानकारी नहीं थी कि कहां जाना है और कहां रुकना है. उन्होंने कहा कि बच्चों की तबीयत ठीक नहीं होने के कारण रात सड़क किनारे गुजारनी पड़ी. बच्चों ने बताया कि उन्हें डर लग रहा था लेकिन और कोई चारा नहीं था.
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24 सितंबर की रात को ये पूर्वी चम्पारण से निकले और 25 की सुबह राजगीर पहुंचे. दिन भर रहने के बाद शाम साढ़े सात बजे ये पटना के लिए निकले. बुधवार को भी ये बच्चे पटना में ही हैं. बच्चों को सड़क किनारे गांधी मैदान में खाना बनाकर खिलाया गया.
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