सबरीमाला श्री अयप्पा मंदिर फिर चर्चा में है. विषय वही है महिलाओं को प्रवेश दिया जाए या नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने एक ओर जहां यह मामला संविधान पीठ को सौंप दिया है, वहीं मंदिर का प्रबंधन संभालने वाले त्रावणकोर देवस्वामी बोर्ड (टीडीबी) के अध्यक्ष पी. गोपालकृष्ण ने एक बेहद ही विवादित बयान दिया है.
गोपालकृष्ण ने कहा कि मंदिर में महिलाओं को प्रवेश देकर इसे थाईलैंड बनाने की कोशिश ना की जाए. अगर महिलाओं को प्रवेश दिया गया तो यह मंदिर एक टूरिस्ट सेंटर बनकर रह जाएगा. जानिए कैसा है ये मंदिर और क्यों महिलाओं का प्रवेश वर्जित है यहां...
ये मंदिर केरल में है. यहां हर साल करोड़ों श्रद्धालु जुटते हैं. पर ये केवल पुरुष होते हैं. यहां महिलाओं का आना वर्जित है. इसके पीछे मान्यता ये है कि यहां जिस भगवान की पूजा होती है (श्री अयप्पा), वे ब्रह्माचारी थे इसलिए यहां 10 से 50 साल तक की लड़कियां और महिलाएं नहीं प्रवेश कर सकतीं.
बता दें कि इस मंदिर में ऐसी छोटी बच्चियां आ सकती हैं, जिनको मासिक धर्म शुरू ना हुआ हो. या ऐसी या बूढ़ी औरतें, जो मासिकधर्म से मुक्त हो चुकी हों. यहां जिन श्री अयप्पा की पूजा होती है उन्हें 'हरिहरपुत्र' कहा जाता है. यानी विष्णु और शिव के पुत्र.
सबरीमाला का नाम शबरी के नाम पर है. जी हां, वही सबरी, जिनका जिक्र रामायण में है. ये मंदिर 18 पहाड़ियों के बीच में बसा है. यहां एक धाम में है, जिसे सबरीमला श्रीधर्मषष्ठ मंदिर कहा जाता है.
यहां दर्शन करने वाले भक्तों को दो महीने पूर्व से ही मांस-मछली का सेवन त्यागना होता है.
मान्यता है कि अगर भक्त तुलसी या फिर रुद्राक्ष की माला पहनकर और व्रत
रखकर यहां पहुंचकर दर्शन करे तो उसकी सभी मनोकामना पूर्ण होती हैं.