इस समय देश का उत्तरी भाग भारी बर्फबारी की चपेट में है. कश्मीर में एलओसी (Line of Control) के पास इस समय माइनस 20 से 25 सेल्सियस पर तापमान है. ऐसे में वहां सीमा की रक्षा के लिए तैनात जवानों का जीवन सरल नहीं है. वह देश की रक्षा के लिए खतरनाक मौसम में भी डटे रहते हैं. इस मौसम में सैनिकों की जीवटता देखने वाली होती है. (Photo:Rouf A Roshangar)
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नॉर्थ कश्मीर में इस दौरान बहता हुआ पानी जम जाता है. जगह-जगह बर्फ की तरह जमे हुए झरने दिखाई देने लगते हैं जहां कभी बहता हुआ पानी था. (Photo:Rouf A Roshangar)
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इस समय आर्मी के वाहन एक जगह से दूसरी जगह तभी मूव करते हैं जब उन्हें सेस (Snow and Avalanche Study Establishment) से इजाजत मिलती है. वाहन भी सड़क पर तभी चलते हैं जब उनके टायरों पर हैवी चैन बंधी होती है. (Photo:Rouf A Roshangar)
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यहां सैनिक की पोस्ट आधी बर्फ में होती है. बर्फ में आधा शरीर होने के बाद भी वह घंटों तक सीमा की रखवाली के लिए हथियारों के साथ तैनात रहते हैं. (Photo:Rouf A Roshangar)
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यहां रहने के लिए सैनिकों को एस्किमो टाइप के स्पेशल हट बनाकर दिए जाते हैं जो एयर और वाटरप्रूफ होते हैं. इस तरह के घरों में बर्फ फिसलकर नीचे गिर जाती है और हवा, पानी भी अंदर नहीं जाता. (Photo:Rouf A Roshangar)
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जब इन इलाकों में बहता हुआ पानी जम जाता है तो फिर पीने और नहाने के पानी के लिए बर्फ का ही इस्तेमाल करना होता है. (Photo:Rouf A Roshangar)
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जीरो तापमान पर वाटर सप्लाई के पाइप में पानी जम जाता है. तब पीने और नहाने के लिए बर्फ को उबालना पड़ता है, तब जाकर सैनिकों को पीने का पानी मिलता है. (Photo:Rouf A Roshangar)
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हिम स्खलन के दौरान एक स्पेशली ट्रेंड रेस्क्यू टीम होती है जो ऐसे माहौल में बचाव का काम करती है. यह टीम इस दौरान एलओसी के पास रह रहे लोकल लोगों की भी मदद करती है. (Photo:Rouf A Roshangar)
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इस मौसम में सैनिकों के लिए स्पेशल विंटर ड्रेस होती है जिसमें पैंट, जैकेट, ग्लव्स, होते हैं. इस ड्रेस की वजह से उन्हें बर्फ में चलने में कोई परेशानी नहीं होती और शरीर गर्म रहता है. (Photo:Rouf A Roshangar)
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ऊंची जगहों पर जाने की बेहतर सुविधा हो, इसके लिए स्नो स्कूटर भी सैनिकों को प्रोवाइड कराए जाते हैं. बर्फ की वजह से जब सतह स्लिपरी हो जाती है, तब यह काफी मददगार होते हैं. (Photo:Rouf A Roshangar)