गौरीकुंड से केदारनाथ मंदिर तक 16 किलोमीटर की चढ़ाई में आधी दूरी पर रामबाड़ा जगह आती है जहां हादसे की रात 5 हजार लोगों के रुकने की बात कही जा रही थी. आज वह जगह पूरी तरह श्मशान है. वहां एक बैनर लगा हुआ है जिस पर लिखा है, "मंदाकिनी के सैलाब में अंतर्ध्यान रामबाड़ा- इस यात्रा पथ पर रह-रह कर आएगी तुम्हारी याद हमें उदास कर जाएगी, लेकिन हमें रोना नहीं है, आंसुओं के सैलाब में तुम्हें खोना नहीं है."