भारत की स्टार शटलर ज्वाला गुट्टा इस बार फिर अपने एक ट्वीट को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है. दरअसल एक यूजर ने ज्वाला का मजाक बनाने के लिए
उनकी मां पर निशाना साधा. यूजर ने ट्वीट किया, 'क्या आपकी मां चीन से है, इसलिए आप हमेशा मोदी का विरोध करती हैं.
इससे ज्वाला गुट्टा भड़क गई और उन्होंने जवाब दिया, 'आप अपना दिमाग खो चुके हैं, एक और शब्द, आपको ब्लॉक कर दूंगी.' गौरतलब है कि ज्वाला के नाना त्सेंग चीनी पत्रकार और सिंगापुर में अखबार के संपादक थे.
आपको बता दें कि सत्ताधारी पार्टी को लेकर ज्वाला गुट्टा हमेशा कुछ न कुछ बयान देती रहती हैं. इसके अलावा ज्वाला मौजूदा मोदी सरकार को लेकर भी हमेशा सवाल जवाब करते रहती हैं.
ज्वाला के नाना त्सेंग की मुलाकात 1937 में महात्मा गांधी से हुई. महात्मा गांधी की मौत के बाद त्सेंग चीन वापस लौट गए थे. इसके बाद वह 1977 में आए और वर्धा के सेवाग्राम में रहे और बापू की आत्मकथा का चीनी में अनुवाद किया. उनके साथ उनकी बेटी येलन भी आई थीं.
इस दौरान येलन को एक हैदराबादी युवक क्रांति गुट्टा से प्रेम हो गया. दोनों ने 1982 में शादी कर ली और एक साल बाद वर्धा में ही ज्वाला पैदा हुईं. गौरतलब है कि ज्वाला के दादा त्सेंग ने आचार्य विनोबा भावे के आश्रम में ही प्राण त्यागे थे.
येलन खुद बेडमिंटन खेलती थीं इसके चलते उन्होंने अपनी बेटी ज्वाला को भी बेडमिंटन खिलाड़ी बनाना चाहती थी. ज्वाला जब चार साल की थीं, तभी से बेडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था.
ज्वाला के पिता रोजाना उसे स्कूटर पर बैठाकर घर से 38 किमी दूर लालबहादुर इंडोर स्टेडियम ले जाते और लाते. वहां ज्वाला ने एसएम आरिफ की निगरानी में बेडमिंटन सीखा. ज्वाला गुट्टा 14 साल की थीं जब पहला नेशनल खिताब मिला.
2006 में ज्वाला पहली महिला थीं, जो भारत के लिए राष्ट्रकुल में मेडल जीती थी. गौरतलब है कि ज्वाला की लाइफ विवादों से घिरी है. ज्वाला की शादी बेडमिंटन खिलाड़ी चेतन आनंद से हुई, लेकिन 6 वर्ष में ही दोनों अलग हो गए.
इसके अलावा ज्वाला को अनुशासनहीनता के कारण टीम से बाहर कर दिया गया था. दरअसल ज्वाला चीफ नेशनल कोच की बजाय आरिफ से ट्रेनिंग लेना चाहती थी. ज्वाला का नाम पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन के साथ भी जुड़ चुका है.
हालांकि इस बारे में ज्वाला गुट्टा ने कभी भी खुलकर बात नहीं की थी. इसके अलावा ज्वाला को आजीवन प्रतिबंध का भी सामना करना पड़ा था. दरअसल मुंहफट होने के कारण ज्वाला के खेलने पर आजीवन प्रतिबंध भी लगा, लेकिन अदालत ने प्रतिबंध से इनकार कर दिया और ज्वाला अब तक बरकरार है.