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बुलेट ट्रेन-बोइंग विमान से भी ज्यादा तेज, इस टेक्नोलॉजी से पूरी तरह बदल जाएगा ट्रैवल...

Hyperloop
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बीते कुछ दशकों में टेक्नोलॉजी ने हमारे जीवन को कई स्तर पर प्रभावित किया है हालांकि अब भी यात्रा करने का तरीका कमोबेश काफी पारंपरिक ही रहा है लेकिन पिछले कुछ समय से एक तकनीक काफी चर्चा में चल रही है जो पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह से बदल देने का माद्दा रखती है.  

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इस तकनीक का नाम है हायपरलूप. ये चुंबकीय कैप्सूल हैं जो जमीन से थोड़ा ऊपर 1223 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा में तैरेंगे. रिपोर्ट्स के अनुसार, ये दुनिया की सबसे तेज बुलेट ट्रेन जापानी शिंकासेन ट्रेन से भी 3.5 गुणा ज्यादा तेज होगा. इसके अलावा ये हायपरलूप बोइंग 747 विमान से भी ज्यादा तेज होगा. 

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गौरतलब है कि हायपरलूप का कॉन्सेप्ट सबसे पहले चर्चा में आया था जब एलन मस्क ने साल 2013 में 58 पेज का 'हायपरलूप अल्फा' नामक रिसर्च पेपर लिखा था और इस पेपर में उन्होंने डिजाइन, खर्चे और इस कॉन्सेप्ट की सेफ्टी को लेकर बात की थी. हालांकि मस्क खुद इस प्रोजेक्ट पर काम नहीं कर रहे हैं. 

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वर्जिन हायपरलूप और हायपरलूप टीटी दो ऐसी कंपनियां हैं जो इस आइडिया को रियैल्टी बनाने के लिए काम कर रही हैं. वर्जिन हायपरलूप यात्रियों के साथ टेस्ट रन भी कर चुका है. 2020 के अंत में इस कंपनी ने लास वेगास और नेवादा के बीच ये सफल टेस्ट किया था और इस यात्रा में कंपनी के को-फाउंडर जोश गिगल और हेड ऑफ पैसेंजर एक्सपीरियंस सारा लुशियन शामिल हुए.  

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इस फ्यूचरिस्टिक तकनीक का मकसद दो शहरों के बीच यात्रा को बेहतर बनाना है. इस तकनीक में एयरप्लेन के मुकाबले कम प्रदूषण होगा. इसके अलावा यात्रा में कम समय लगने के कारण इकोनॉमी और टूरिज्म के बेहतर होने की संभावना भी काफी बढ़ेगी. हालांकि इस प्रोजेक्ट में आर्थिक खर्च और पर्यावरण फैक्टर बड़ी चुनौतियां हैं.  

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हायपरलूप पारंपरिक ट्रेन से दो मायनों में अलग है. ये पॉड्स अंडरग्राउंड ट्यूब से गुजरेंगे और इन ट्यूब से ज्यादातर हवा को बाहर निकाल लिया जाएगा ताकि फ्रिक्शन को कम से कम किया जा सके. इसी के चलते ये पॉड्स 750 मील प्रति घंटे यानी लगभग 1223 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगे.

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इसके अलावा ट्रेन या कार की तरह पहियों पर दौड़ने की जगह ये पॉड्स जमीन से थोड़ा ऊपर हवा में तैरेंगे या फिर फ्रिक्शन को कम करने के लिए इन पॉड्स में मैग्नेटिक लेविटेशन का इस्तेमाल किया जाएगा. मैग्नेटिक लेविटेशन तकनीक हायपरलूप की ग्रोथ के हिसाब से सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जा रही है. 

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हालांकि हायपरलूप के आलोचकों का कहना है कि अत्यधिक जी-फोर्स के चलते लोगों को बैचेनी और जी घबराने जैसी परेशानियां आ सकती हैं वही हायपरलूप के समर्थकों के अनुसार कि इसमें यात्रा करना ऐसा ही होगा जैसे लिफ्ट में या पैसेंजर प्लेन में कोई इंसान यात्रा करता है. 

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गिगेल ने कहा कि वर्जिन हायपरलूप भारत में अपने पैसेंजर रूट्स बनाने को लेकर सोच रहा है. यहां ट्रांसपोर्ट सिस्टम काफी भीड़-भाड़ भरा है. इसके अलावा इसी तरह के पैसेंजर रूट्स सउदी अरब में बनाने की तैयारी है जहां इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है. हमारी कोशिश है कि लाखों लोग इस क्रांतिकारी तकनीक का फायदा उठाएं. 
 

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रिपोर्ट्स के अनुसार, इस तकनीक से लंदन से पेरिस महज आधे घंटे और लॉस एजेंलेस से सैन फ्रैंसिस्को सिर्फ 45 मिनटों में पहुंचा जा सकेगा. ये तकनीक अगले कुछ सालों में दुनिया में दस्तक दे सकती है. (सभी फोटो क्रेडिट: Virgin Hyperloop) 

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