उत्तराखंड में सदियों से सर्दियों के मौसम में केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के इलाकों में रहने वाले लोग कम ऊंचाई पर आते रहे हैं. बाद में मौसम बदलने पर वे वापस अपने गांवों को चले जाते थे. लेकिन पिछले कुछ सालों से सर्दियों के बाद भी कुछ गांवों में लोग नहीं लौट रहे हैं. लोगों के गांव खाली कर देने की वजह से उत्तराखंड में लोग इन्हें भूतियां गांव कहने लगे हैं, लेकिन क्या है रहस्य, आइए जानते हैं.. (Photo: Getty Images)
उत्तरखंड सरकार ने आबादी के पलायन को लेकर पिछले साल पलायन आयोग बनाया था. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग के उपाध्यक्ष एसएस नेगी का कहना है कि पिछले 10 सालों में 700 गांव खाली हो चुके हैं और करीब 1.19 लाख लोगों ने घर छोड़ दिया. (Photo: Getty Images)
नेगी के मुताबिक, 50 फीसदी लोगों ने जीवनयापन के लिए अपने गांवों को छोड़ दिया, जबकि आधे लोग खराब शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की वजह से गांव नहीं लौटे. (Photo: Getty Images)
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने इसको लेकर एक बार कहा था- 'हमारे गांव धीरे-धीरे खाली हो रहे हैं. लोग हमेशा के लिए पहाड़ छोड़ रहे हैं. इस समस्या पर ध्यान देने की जरूरत है.' (Photo: Getty Images)
बताया जाता है कि पलायन करने वाले 70 फीसदी लोग राज्य में ही एक जगह से दूसरी जगह चले गए. उत्तराखंड में लोग इन खाली पड़े गांवों को भूतिया गांव कहते हैं. (Photo: Getty Images)
पलायन आयोग के उपाध्यक्ष मुताबिक, 2011 और 2017 की जनगणना के मुताबिक, 734 गांवों में एक भी लोग नहीं मिले, जबकि 565 गांवों में आधे लोग ही थे. ज्यादातर लोग मूलभूत सुविधाओं की कमी की वजह से गए. कई गांव बॉर्डर पर हैं जिसकी वजह से लोगों में चिंता भी होती है. (Photo: Getty Images)
गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले साल उत्तराखंड के बॉर्डर गांवों का दौरा किया था. तब उन्होंने कहा था कि वे जानकारों का एक ग्रुप बनाएंगे जो यहां रहने वाले लोगों की जरूरतों के बारे में स्टडी करेगा. सीमा क्षेत्र में विकास के प्रोग्राम बढ़ाए जाएंगे. (Photo: Getty Images)
एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे ही तीन गांवों का जब दौरा किया गया तो पाया गया कि यहां हॉस्पिटल और प्राइमरी स्कूल गांव से दूरी पर स्थित हैं. (Photo: Getty Images)
बलूनी, नीति और सैना गांव में बिजली तो है, लेकिन रोजगार के मौके न के बराबर हैं. सैना में सिर्फ मनरेगा में काम कर सकते हैं, जबकि सिर्फ नीति में भेड़ पालने और खेती करने के मौके हैं. (Photo: Getty Images)
बलूनी गांव तक गाड़ी से आने के लिए जो रोड है अक्सर लैंडस्लाइड से बंद हो जाता है. सैना गांव से कनेक्टिविटी की बात करें तो गाड़ियों के आने-जाने का रोड 1 किमी दूर है. (Photo: Getty Images)